गुजरात: 500 रुपये की रिश्वत लेने वाले पुलिसकर्मी को 5 साल की जेल, 10 साल बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला

गुजरात के मोरबी जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां पर कोर्ट ने एक पुलिसकर्मी को 500 रुपये रिश्वत लेने के मामले में दोषी पाए जाने पर 5 साल की सजा सुनाई है. साथ ही कोर्ट ने पुलिसकर्मी पर 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

ब्रिजेश दोशी

  • मोरबी,
  • 22 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 10:53 AM IST

गुजरात के मोरबी जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां साल 2014 के रिश्वतखोरी के मामले मे कोर्ट ने आरोपी पुलिसकर्मी को दोषी पाते हुए 5 साल के कारावास की सजा सुनाई है. मोरबी जिले के मालिया पुलिस थाने के एक कॉन्स्टेबल पर पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए से रिश्वत मांगने का आरोप था और उसे एसीबी ने रंगे हाथ पकड़ा था. उसी केस मे स्थानीय कोर्ट ने आरोपी को 5 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है.

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पासपोर्ट वेरिफिकेशन के लिए पुलिसकर्मी ने मांगा था 500 रुपये

जानकारी के मुताबिक साल  2014 में शिकायतकर्ता मनोज की भाभी पूजा को अपने पति के पास नैरोबी जाना था. जिसके लिए पासपोर्ट बनाने की कागज़ी प्रक्रिया होती है. इसी प्रक्रिया के दौरान पुलिस वेरिफिकेशन भी होता है, जिसके लिए  17 मार्च 2014 को पूजा को मालिया पुलिस स्टेशन से फोन आया. पूजा पुलिस थाने पहुंची और कॉन्स्टेबल अमरतभाई ने हस्ताक्षर ले लिए और बाद में 500 रुपये का भुगतान करने के लिए कहा.  पूजा ने पूछा कि सारी प्रक्रिया और फीस तो पहले से भर दी ही तो अब पैसे क्यों दें?

इसके बाद पुलिसकर्मी अमरत मकवाणा ने दूसरे दिन भी फोन करके फिर से कहा कि अगर आपको  पासपोर्ट चाहिए तो 500 रुपये देने होंगे, अन्यथा पासपोर्ट नहीं बनेगा.  लेकिन पूजा  रिश्वत की रकम नहीं देना चाहती थी. इसलिए मनोज ने एंटी करप्शन ब्यूरो से शिकायत की और एसीबी की टीम ने जाल बिछाकर रिश्वतखोर पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया.

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कोर्ट ने सुनाई 5 साल की सजा

यह मामला विशेष न्यायाधीश (ACB) एवं प्रधान सत्र न्यायाधीश की अदालत में चला. इस दौरान सरकारी वकील विजय जानीने ने 7 मौखिक और 35 दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में पेश किए. इसे ध्यान में रखते हुए अदालत ने मालिया पुलिस थाने के कॉन्स्टेबल अमरत मकवाना को दोषी ठहराया. अदालत ने आरोपी अमरत  मकवाना को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा के तहत अपराध का दोषी ठहराते हुए उसे 5 साल की कठोर कारावास और 1 हज़ार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. 

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