83 साल के रिटायर्ड नेवी ऑफिसर से ठगी, डिजिटल अरेस्ट करके साइबर ठगों ने ऐंठे 42.50 लाख रुपये

अहमदाबाद में रिटायर्ड नेवी ऑफिसर से 42.50 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बताया जाता है कि साइबर ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर ठगी की.

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रिटायर्ड नेवी ऑफिसर से ठगी लाखों की ठगी. (Photo: Representational ) रिटायर्ड नेवी ऑफिसर से ठगी लाखों की ठगी. (Photo: Representational )

अतुल तिवारी

  • अहमदाबाद,
  • 21 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:19 AM IST

अहमदाबाद के सेटेलाइट में रहने वाले 83 साल के रिटायर्ड नेवी ऑफिसर डिजिटल अरेस्ट का शिकार हो गए. साइबर ठगों ने रिटायर्ड नेवी अफसर को 48 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट करके 42.50 लाख रुपए की साइबर ठगी को अंजाम दिया. जिसे लेकर अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज करवाई गई है.

ऑफिसर के बेटे ने दर्ज कराई है शिकायत

83 साल के रिटायर्ड नेवी ऑफिसर के 53 साल के बेटे द्वारा अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच में दर्ज एफ़आईआर के मुताबिक उनके पिता रिटायर्ड नेवी ऑफिसर उनकी माता के साथ रहते हैं. 8 दिसंबर के दिन रिटायर्ड नेवी ऑफिसर को सुबह 11:30 बजे एक टेलीकॉम डिपार्टमेंट के नाम से नॉर्मल कॉल आया, जिसमें कहा गया था कि आपके नंबर पर कई सारी शिकायत दर्ज है. जिसकी जांच सीबीआई मुंबई कर रही है. 

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जिसके लिए फ़ोन ट्रांसफर किया जा रहा है. लेकिन बाद में कॉल कनेक्ट नहीं हुआ तो सीबीआई मुंबई की टीम बाद में कॉल करेगी कहा गया था. इसके कुछ समय बाद एक अज्ञात शख्स की तरफ से रिटायर्ड नेवी ऑफिसर को वीडियो कॉल आया और कहा गया कि उन्होंने नरेश गोयल नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है. जिसने 20 लाख रुपए आपके अकाउंट में ट्रांसफर किए हैं. लेकिन रिटायर्ड नेवी ऑफिसर ने किसी नरेश गोयल नाम के शख्स को नहीं जानते की बात कही थी.

कुछ समय रिटायर्ड नेवी ऑफिसर को दोबारा साइबर ठगों ने वीडियो कॉल किया. जिसमें स्क्रीन पर सामने एक कोर्ट रूम दिखाई दिया. जिसमें जज की चेयर पर एक शख्स बैठा हुआ था. वीडियो कॉल करने वाले ने रिटायर्ड नेवी ऑफिसर को कोर्ट में प्रस्तुत किए जाने को कहा. जिसके बाद वहां मौजूद फर्जी जज ने रिटायर्ड नेवी ऑफिसर को कहा था कि उनके खिलाफ 27 केस दर्ज हैं. 

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इसकी जांच गुप्त तरीके से सीबीआई द्वारा चलाई जा रही है तो इस बात की जानकारी अपने परिवार या बच्चों से शेयर ना करें. जिसके बाद रिटायर्ड नेवी ऑफिसर से कहा गया था कि अगर आप किसी भी केस में संलिप्त नहीं हैं तो एक अंग्रेजी में एप्लीकेशन देनी होगी. जिसमें आपके बैंक अकाउंट की डिटेल शेयर करनी होगी.

इसके बाद 9 दिसंबर के दिन सुबह एक बार फिर वीडियो कॉल आया और कहा गया कि जब तक जांच चल रही है तब तक आप घर छोड़कर बाहर नहीं निकालेंगे, ना किसी से संपर्क करेंगे. साइबर ठगों ने रिटायर्ड नेवी ऑफिसर से कहा था कि आपके बैंक अकाउंट में जो भी रकम है, उसे चेक करना जरूरी होने की वजह से आपको रकम आरटीजीएस करनी पड़ेगी. लेकिन 83 साल के रिटायर नेवी ऑफिसर को चलने में समस्या थी जिसकी वजह से उन्होंने यह सारी बात अपनी पत्नी से बतायी.

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बैंक कर्मियों की वजह रुक गया बड़ा फ्रॉड

जिसके बाद रिटायर्ड नेवी ऑफिसर की पत्नी रिक्शा में बैठकर बैंक पहुंची और बैंक में रखी हुई एफडी को तुड़वाकर, रुपये बताए गए बैंक अकाउंट नंबर में ट्रांसफर करवाए. सीबीआई की जांच चालू होने का कहकर दूसरी एफडी को भी तुड़वाया गया और उसमें रखी हुई रकम को भी आरटीजीएस करवाया गया. इसके बाद 11 दिसंबर के दिन और भी पैसे ट्रांसफर करने के लिए साइबर ठगों ने कहा इसके लिए रिटायर्ड नेवी ऑफिसर की पत्नी एक बार फिर बैंक में गई.

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इस पर बैंक के कर्मियों को शक हुआ. जिसके बाद उन्होंने पूछताछ की तो बुजुर्ग के साथ साइबर फ्रॉड की जानकारी लगी. जिसके बाद बैंक कर्मियों ने एफडी तोड़ने से मना कर दिया और समझाया भी. साथ ही इसकी जानकारी परिवार को दी. जिसके बाद परिवार वालों ने 42.50 लाख रुपये की ठगी की शिकायत साइबर क्राइम ब्रांच में दर्ज करवाई गई. शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. 
 

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