ममता का सांसद सयानी घोष और सुदीप बंदोपाध्याय पर सख्त एक्शन, TMC के अहम पदों से हटाया

दिल्ली में टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की मुलाकात ने सियासी हलचल तेज कर दी है. पार्टी के भीतर मचे घमासान के बीच हुई इस बैठक के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या बंदोपाध्याय भी बागी गुट में शामिल होने जा रहे हैं.

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बागी गुट की नेता काकोली घोष ने घोषणा की है कि यह गुट संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देगा. (Photo: Social Media) बागी गुट की नेता काकोली घोष ने घोषणा की है कि यह गुट संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देगा. (Photo: Social Media)

अमित भारद्वाज / अनिर्बन सिन्हा रॉय

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:49 AM IST

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के बीच शनिवार को नई दिल्ली में हुई मुलाकात ने पार्टी के भीतर चल रहे घमासान के बीच एक नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है. इस मुलाकात के बाद अब ममता के करीबी कुणाल घोष को सुदीप बंदोपाध्याय की जगह नॉर्थ कोलकाता संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष बनाया गया है.

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इसके अतिरिक्त, पार्टी ने सयानी घोष को AITC यूथ प्रेसिडेंट के पद से हटा दिया है और उनकी जगह अर्नब बनर्जी को नया अध्यक्ष बनाया गया है.

बंदोपाध्याय, बागी TMC सांसद शताब्दी रॉय के साथ दोपहर में बीजेपी नेता के मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने बैठक की.

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब बागी TMC सांसद कह रहे हैं कि वे सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर असली TMC के तौर पर मान्यता की मांग करेंगे. यह कदम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद उठाया जा रहा है.

पूर्व राज्य मंत्री ने दिया इस्तीफा

इस बीच, पूर्व राज्य मंत्री डॉ. मानस रंजन भुनिया ने TMC की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने ममता बनर्जी को पत्र लिखकर व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने इस्तीफ़े की जानकारी दी है.

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वहीं, बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने शुक्रवार को दावा किया कि पार्टी के 28 लोकसभा सदस्यों में से 19 सदस्य पहले से ही इस गुट का समर्थन कर रहे हैं.

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न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, बागी गुट की नेता काकोली घोष ने घोषणा की है कि मान्यता मिलने के बाद यह गुट संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देगा. 

बंदोपाध्याय, टीएमसी के सबसे वरिष्ठ सांसदों में से एक हैं और उन्हें लंबे समय से पार्टी नेतृत्व व दिल्ली के राजनीतिक हलकों के बीच एक अहम कड़ी माना जाता रहा है.

इसलिए, उनके और बीजेपी के एक वरिष्ठ रणनीतिकार के बीच किसी भी तरह की बातचीत पर पश्चिम बंगाल की राजनीति की भविष्य की दिशा के संकेतों के लिए बारीकी से नजर रखी जाएगी, खासकर राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC के राजनीतिक भविष्य के संदर्भ में.

राज्य विधानसभा में TMC के 80 में से 64 विधायकों का एक समूह पहले ही पार्टी से अलग हो चुका है और उसने स्पीकर रथिंद्र बोस से मान्यता हासिल कर ली है, जिसमें बागी गुट के नेता रिताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता नामित किया गया है.

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हालांकि, ममता के नेतृत्व वाले गुट ने कलकत्ता हाई कोर्ट में इस मान्यता को चुनौती दी है और कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है.

बंदोपाध्याय के कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि कोलकाता उत्तर के सांसद की सत्ता और पद की लालसा के कारण ही TMC ने कई महत्वपूर्ण नेताओं को बीजेपी के हाथों गंवा दिया.

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