दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास शनिवार शाम बड़ा हादसा हो गया, जब सैदुलाजाब इलाके में स्थित एक पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और धूल का घना गुबार दूर तक फैल गया. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और बचाव दल मौके पर पहुंच गए और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरने से कुछ क्षण पहले तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी. आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि पहले उन्हें लगा कि किसी जनरेटर में विस्फोट हुआ है, लेकिन इसके तुरंत बाद धूल, मिट्टी और मलबे का विशाल गुबार उठने लगा. इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि वह इमारत के पीछे रहता है और अचानक इतनी तेज आवाज आई कि कुछ समय के लिए समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ है. लोगों ने एहतियात के तौर पर अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर लीं.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिस इमारत का ढांचा ढहा है, उसके बेसमेंट पर एक कोचिंग संस्थान संचालित होता था, जबकि ऊपरी मंजिलों पर निर्माण कार्य चल रहा था. इसी वजह से आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे छात्र या अन्य लोग फंसे हो सकते हैं. हालांकि, घटना के समय इमारत में कितने लोग मौजूद थे, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है.
300 से 400 लोगों आवाजाही रहती थी
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह एक व्यस्त व्यावसायिक इमारत थी, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए आते थे और कई लोग ऑफिस के कामों के लिए भी पहुंचते थे. एक निवासी ने बताया कि सामान्य दिनों में कार्यालय समय के दौरान यहां 300 से 400 लोगों की आवाजाही रहती थी. उन्होंने कहा कि यदि यह हादसा दिन के व्यस्त समय में होता तो जनहानि कहीं अधिक हो सकती थी.
ताश के पत्तों की तरह ढह गई इमारत
हादसे के बाद इमारत पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह ढह गई और कुछ ही सेकंड में विशाल मलबे के ढेर में तब्दील हो गई. टूटे हुए खंभे, कंक्रीट और अन्य निर्माण सामग्री पूरे इलाके में बिखर गई. संकरी सड़क पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए, जबकि पुलिस और बचाव दल लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखने में जुटे रहे.
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मलबे के नीचे लोगों के फंसे होने की खबर फैलते ही स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में जुट गए. कई लोग मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट की मदद से मलबे के बीच तलाश करते दिखाई दिए. वहीं, कुछ लोगों ने दावा किया कि पास स्थित एक छोटे ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है, जहां एक मेस संचालित होती थी. हालांकि वहां मौजूद लोगों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया और किसी गंभीर चोट की सूचना नहीं है.
7:44 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली
दिल्ली अग्निशमन सेवा को शाम 7:44 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही सात दमकल गाड़ियों को मौके पर रवाना किया गया. दमकल कर्मियों, पुलिस और अन्य आपदा राहत एजेंसियों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू किया. एंबुलेंस भी मौके पर तैनात की गईं ताकि घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके.
स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास की अधिकांश इमारतें सुरक्षित हैं और हादसे का प्रभाव मुख्य रूप से ढही हुई इमारत तथा उससे सटे कुछ छोटे ढांचों तक सीमित रहा. फिर भी, प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के क्षेत्र की जांच शुरू कर दी है ताकि किसी अन्य भवन को संभावित खतरे का आकलन किया जा सके.
फिलहाल बचाव अभियान जारी है और प्रशासन मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटा हुआ है. अधिकारियों का कहना है कि इमारत गिरने के कारणों की जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं. घटना के बाद पूरे इलाके में चिंता और दहशत का माहौल है, जबकि लोग मलबे में फंसे संभावित लोगों के सुरक्षित निकाले जाने की प्रार्थना कर रहे हैं.
aajtak.in