सिक्किम के नामची जिले में एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुए भूस्खलन के बाद राहत और बचाव अभियान दूसरे दिन भी लगातार जारी है. बचाव दल बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सुरंग के भीतर फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. सबसे बड़ी मुश्किल सुरंग के अंदर जमा मीथेन गैस, ऑक्सीजन की कमी, कम दृश्यता और संकरी सुरंग बन गई है. इन्हीं कारणों से राहत कार्य लगातार प्रभावित हो रहा है.
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के डीआईजी मोहसिन शाहेदी ने बताया कि अब तक कुल 13 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 25 मजदूर अब भी लापता हैं. बचाव अभियान फिलहाल सुरंग के 200 मीटर के उस हिस्से पर केंद्रित है, जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है. अधिकारियों के अनुसार, सुरंग के अंदर करीब 1.5 किलोमीटर की दूरी पर बड़ी मात्रा में मीथेन गैस जमा हो गई थी.
माना जा रहा है कि यह गैस भूमिगत चट्टानों और प्राकृतिक परतों से निकलकर सुरंग में इकट्ठा हुई. गैस को बाहर निकालने की कोशिश के दौरान विस्फोट हुआ, जिसके बाद भूस्खलन हुआ और सुरंग का एक हिस्सा मलबे से बंद हो गया. हादसे के तुरंत बाद कुछ मजदूर बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन कई मजदूर सुरंग के भीतर ही फंस गए.
एनडीआरएफ की चार टीमें रोटेशन में काम में जुटी
एनडीआरएफ के डीआईजी मोहसिन शाहेदी ने बताया कि घटना की सूचना सोमवार दोपहर करीब 3 बजे एनडीआरएफ को मिली. इसके तुरंत बाद पाक्योंग स्थित रीजनल रिस्पॉन्स सेंटर से टीम को रवाना किया गया. यह केंद्र घटनास्थल से करीब 40 किलोमीटर दूर है. टीम शाम करीब 5 बजे मौके पर पहुंची, हालात का आकलन किया और तुरंत बचाव अभियान शुरू किया. उन्होंने बताया कि शुरुआती बचाव में एक मजदूर को बाहर निकाला गया था, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई.
उन्होंने कहा कि मंगलवार तक दो शव पहले ही बरामद हो चुके थे और आज 11 अन्य शव निकाले गए. इस तरह अब तक कुल 13 शव बरामद किए जा चुके हैं. फिलहाल 25 मजदूर लापता बताए जा रहे हैं. डीआईजी ने बताया कि घटनास्थल पर एनडीआरएफ की चार टीमें तैनात हैं, जो रोटेशन के आधार पर लगातार काम कर रही हैं. राहत अभियान संयुक्त रूप से चलाया जा रहा है और सुरंग के 200 मीटर के दायरे में फंसे लोगों की तलाश जारी है.
जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी बनी मुश्किल
बचाव कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर मौजूद मीथेन गैस और ऑक्सीजन की कमी है. इसके अलावा सुरंग के अंदर दृश्यता बेहद कम है और रास्ता भी काफी संकरा है. इन परिस्थितियों के कारण बचावकर्मियों को सुरंग के भीतर आगे बढ़ने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. घटना की जानकारी सोमवार को करीब 3.40 बजे जिला प्रशासन को मिली थी. इसके बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला पुलिस और फायर एंड इमरजेंसी सर्विस की टीमें मौके पर पहुंचीं.
फायर एंड इमरजेंसी सर्विस ने सबसे पहले बचाव अभियान शुरू किया, लेकिन सुरंग के भीतर मीथेन गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण बचावकर्मियों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी. कई कर्मियों की तबीयत भी बिगड़ गई, जिसके बाद शुरुआती अभियान रोकना पड़ा. इसके बाद एनडीआरएफ ने भी प्रयास किया, लेकिन खतरनाक परिस्थितियों के कारण शुरुआती कोशिश सफल नहीं हो सकी.
विशेष गैस सुरक्षा उपकरणों वाली टीम भी पहुंची
बचाव अभियान को तेज करने के लिए पश्चिम बंगाल से गैस सुरक्षा उपकरणों से लैस विशेष टीम को बुलाया गया है. इसके अलावा पाक्योंग और सिलीगुड़ी स्थित एनडीआरएफ की दूसरी बटालियन के अतिरिक्त जवानों को भी मौके पर भेजा गया है. फिलहाल विभिन्न एजेंसियां संयुक्त रूप से राहत और बचाव अभियान चला रही हैं. सुरंग के भीतर फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं.
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