दिल्ली की सड़कों का कायाकल्प: ₹658 करोड़ से चमकेगी 270 किमी सड़क, रेखा सरकार की मंजूरी

दिल्ली सरकार ने राजधानी की 270.63 किलोमीटर सड़कों को नया बनाने के लिए 657.99 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की है. यह फैसला मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई में हुई EFC बैठक में लिया गया. काम को तीन जोन में बांटा गया है, पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली.

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दिल्ली में 658 करोड़ की सड़क परियोजना को मंजूरी मिल गई है (Photo: PTI) दिल्ली में 658 करोड़ की सड़क परियोजना को मंजूरी मिल गई है (Photo: PTI)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 25 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:04 AM IST

दिल्ली में सड़कों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है. रेखा गुप्ता सरकार ने शहर की 270 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सड़कों को नया बनाने का प्लान मंजूर किया है. इसके लिए सरकार करीब 658 करोड़ रुपये खर्च करेगी. 

दिल्ली की सड़कों को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई में व्यय वित्त समिति यानी EFC की बैठक हुई. इस बैठक में 270.63 किलोमीटर लंबी सड़कों को नया बनाने और मजबूत करने के लिए 657.99 करोड़ रुपये की योजना को हरी झंडी दी गई.

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सरकार का कहना है कि इस काम से दिल्ली की सड़कें आधुनिक तरीके से बनेंगी. इससे सड़कों की क्वालिटी अच्छी होगी और लोगों को सफर करने में आसानी होगी.
 

दिल्ली में एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी की बैठक हुई (Photo: PTI)



इस पूरे काम को तीन हिस्सों में बांटा गया है. पूर्वी दिल्ली में 58.29 किलोमीटर सड़कें बनेंगी, जिसके लिए 147.08 करोड़ रुपये खर्च होंगे. उत्तरी दिल्ली में 104.42 किलोमीटर सड़कें बनेंगी, जिसकी लागत 247.31 करोड़ रुपये होगी. दक्षिणी दिल्ली में सबसे ज्यादा 107.92 किलोमीटर सड़कें बनेंगी, जिसके लिए 263.61 करोड़ रुपये तय किए गए हैं. तीन जोन में बंटे इस काम को अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे सड़कें गड्ढा मुक्त और ज्यादा मजबूत बनेंगी.

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सड़कें बनाने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल होगा. पहले पुरानी और खराब सड़क की ऊपरी परत को मशीन से हटाया जाएगा. इसके बाद नई और मजबूत परत बिछाई जाएगी, जिससे सड़कें ज्यादा टिकाऊ बनेंगी. इसके साथ ही सड़कों पर नई लाइन बनाई जाएगी, साइन बोर्ड लगाए जाएंगे और बारिश का पानी निकालने का भी इंतजाम किया जाएगा.

इस बार सरकार ने टेंडर देने का तरीका भी बदला है. पहले हर सड़क का अलग टेंडर होता था, लेकिन अब पूरे जोन का एक साथ टेंडर दिया जाएगा. इससे काम की निगरानी बेहतर होगी. साथ ही ठेकेदार को 5 साल तक सड़क की जिम्मेदारी लेनी होगी, यानी इस दौरान कोई खराबी आई तो उसे ठीक करना ठेकेदार का काम होगा. सरकार ने यह भी कहा है कि धूल कम करने के लिए हवा से जुड़े नियमों का भी पालन किया जाएगा.

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