दिल्ली: मालवीय नगर अग्निकांड में MCD का एक्शन, झूठी रिपोर्ट देने वाले हेल्थ इंस्पेक्टर को किया टर्मिनेट

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश-इन होटल में आग लगने से 23 लोगों की मौत के मामले में MCD ने बड़ी कार्रवाई की है. नगर निगम ने संविदा पर कार्यरत सहायक जन स्वास्थ्य निरीक्षक प्रिंस मान की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं.

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होटल का लाइसेंस मंजूर करने वाले अधिकारी की सेवा समाप्त (Photo: PTI) होटल का लाइसेंस मंजूर करने वाले अधिकारी की सेवा समाप्त (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:43 PM IST

दिल्ली के मालवीय नगर में 3 जून को एक होटल में आग लगी. 23 लोगों की जान गई, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी थे. जब जांच हुई तो पता चला कि जिस सरकारी अफसर ने इस होटल को लाइसेंस दिया था, उसने आग से ठीक एक दिन पहले यानी 2 जून को जांच की थी. और वो जांच इतनी लापरवाही से की गई कि होटल की खामियां जानबूझकर नजरअंदाज कर दी गईं. MCD ने उस अफसर प्रिंस मान को नौकरी से निकाल दिया है.

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मालवीया नगर के हौज रानी इलाके में 'फ्लोरिश-इन' नाम का एक होटल था. 3 जून को यहां भीषण आग लग गई. कुल 23 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी थे.

लाइसेंस का मामला क्या था?

किसी भी होटल या दुकान को चलाने के लिए MCD (दिल्ली नगर निगम) से एक हेल्थ लाइसेंस लेना पड़ता है. इस होटल ने भी ऐसा लाइसेंस मांगा था.

यह आवेदन 17 मार्च को प्रिंस मान को मिला था. मान एमसीडी के साऊथ जोन में "सहायक जन स्वास्थ्य निरीक्षक" (APHI) पद पर ठेके पर काम करते थे. यानी वो पक्के सरकारी नहीं, बल्कि कांट्रेक्चुअल एम्पलाई थे.

प्रिंस मान ने क्या किया और क्या नहीं किया?

17 मार्च को फाइल मिलने के बाद प्रिंस मान ने पूरे 78 दिन तक कुछ नहीं किया. फाइल बस उनकी मेज पर पड़ी रही. MCD के नियमों के हिसाब से इसे जल्दी निपटाना था, लेकिन मान ने इसे बिना किसी कारण के लटकाए रखा.

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आखिरकार 2 जून को यानी आग से ठीक एक रात पहले उन्होंने जगह का दौरा किया. लेकिन यह दौरा महज खानापूर्ति था. MCD की जांच में सामने आया कि उन्होंने जमीन पर जो हालात थे और जो कागजात जमा किए गए थे, उनमें जो फर्क था, उसे जानबूझकर नजरअंदाज किया. 

होटल में जो गड़बड़ियां थीं, वो दिख रही थीं. लेकिन मान ने अपनी रिपोर्ट में सब ठीक लिख दिया. इस झूठी और गुमराह करने वाली रिपोर्ट के आधार पर उसी दिन 2 जून को लाइसेंस मंजूर कर दिया गया. अगले दिन 3 जून को होटल में आग लग गई और 23 लोग मारे गए.

MCD ने क्या कार्रवाई की?

जांच के बाद एमसीडी के जन स्वास्थ्य विभाग ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया. इस आदेश में लिखा गया कि प्रिंस मान ने 78 दिन तक फाइल को बिना किसी वजह के लटकाए रखा. जो जांच की, वो सरसरी और ऊपरी थी ठीक से नहीं की. कागजात में खामियां थीं, जमीन पर हालात अलग थे. यह सब जानते हुए भी झूठी रिपोर्ट लिखी. झूठी रिपोर्ट की बुनियाद पर लाइसेंस दिलवाया.

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एमसीडी ने कहा कि प्रिंस का यह रवैया 'पूरी तरह बेईमानी और घोर लापरवाही' को दर्शाता है. यह भी कहा गया कि ऐसे व्यक्ति को किसी जिम्मेदारी वाले पद पर रखना सही नहीं है.
इसलिए सहायक आयुक्त (जन स्वास्थ्य) के अधिकार के तहत यह आदेश जारी हुआ कि प्रिंस मान की कांट्रेक्चुअल नौकरी तुरंत प्रभाव से खत्म की जाती है.

यह आदेश उपायुक्त (दक्षिण क्षेत्र), जिला स्वास्थ्य अधिकारी (दक्षिण क्षेत्र) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया ताकि तुरंत पालन हो सके.

बड़ा सवाल - जो इस मामले से उठता है

अगर प्रिंस मान ने सच में जांच की होती, होटल में जो खामियां थीं उन्हें रिपोर्ट में लिखा होता, तो शायद लाइसेंस नहीं मिलता. शायद होटल बंद होता. शायद 23 जानें बचतीं. 78 दिन की लापरवाही और एक झूठी रिपोर्ट इतनी बड़ी त्रासदी की वजह बन गई.

इनपुट: ANI

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