सरकारी अस्पतालों से खुश मरीज, कहा- बंद हो जाएं निजी अस्पताल, फर्क नहीं पड़ता

केजरीवाल सरकार द्वारा मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने के बाद दिल्ली में अस्पतालों पर राजनीति गर्म हो गई है. जहां एक ओर बीजेपी केजरीवाल सरकार के इस कदम को गलत साबित करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर मैक्स अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है.

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आजतक की टीम ने मरीजों से की बात आजतक की टीम ने मरीजों से की बात

वंदना भारती / शुभम गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 11 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 5:33 PM IST

केजरीवाल सरकार द्वारा मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने के बाद दिल्ली में अस्पतालों पर राजनीति गर्म हो गई है. जहां एक ओर बीजेपी केजरीवाल सरकार के इस कदम को गलत साबित करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर मैक्स अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है.

शालीमार बाग के में इलाज करा रहे मरीजों का कहना है कि इस अस्पताल के बंद हो जाने के बाद उनके पास अच्छे अस्पतालों का विकल्प कम हो गया. दरअसल, मरीजों का दावा है कि उस क्षेत्र में मौजूद सरकारी अस्पतालों में अच्छा इलाज नहीं मिल पाता. ऐसे में उनके पास मैक्स ही एक ऐसा विकल्प बचा था, जहां वो अपना इलाज करा सकते थे.  

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रोहिणी के अम्बेडकर अस्पताल का हाल

इसी मुद्दे को लेकर आजतक की टीम ने उस इलाके के सरकारी अस्पतालों का मुआयना किया.  सबसे पहले हमारी टीम पहुंची रोहिणी के डॉक्टर अम्बेडकर अस्पताल में. यह बहुत पुराना अस्पताल है. रोजाना यहां हजारों लोग इलाज कराने आते हैं.  आजतक की टीम ने यहां इलाज करा रहे मरीजों से यह जानने की कोश‍िश की कि वो इस अस्पताल के बारे में क्या सोचते हैं.

लोगों का कहना था कि हम बहुत खुश हैं सरकारी अस्पताल के इलाज से. मयंक का कहना था कि उसकी पत्नी का इलाज यहीं चल रहा है. उनकी पत्नी की डिलीवरी यही हुई है. मगर उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई. जब हमने पूछा कि अगर बंद होता है तो उन्हें क्या दिक्कत होगी?

इस सवाल पर उनका कहना था कि अगर बंद होता है तो उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी और ना ही उन्हें इस बात से कोई फर्क पड़ता है. सरकारी अस्पतालों में दवाएं समय पर मिलती हैं और आज कल साफ सफाई का भी खास ख्याल रखा जा रहा है. डॉक्टर का व्यवहार भी बहुत अच्छा रहता है.   निजी अस्पताल में तो लूट मची हुई है. जरा सी दिक्कत पर सीधा ऑपरेशन ही होता है. अगर मैक्स बंद होता है तो हमें तो कोई फर्क नहीं पड़ता.  

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मंगोलपुरी में संजय गांधी अस्पताल से भी लोग खुश

इसके बाद  हमारी टीम पहुंची मंगोलपुरी के संजय गांधी अस्पताल में. यह भी एक बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां रोजाना ही हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं. यहां के मरीजों से भी आजतक की टीम ने बात की. लोगों का कहना था कि हमें यहां अच्छा इलाज मिलता है. ना इलाज पर खर्च और ना ही दवाओं पर ज्यादा खर्च होता है. निजी अस्पतालों का खर्च उठाना आम लोगों के बस की बात नहीं है. बंद हो जाए, हमें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता और ना ही इस बात से कोई परेशानी है. अपनी पूरी जिंदगी संजय गांधी अस्पताल से इलाज कराने वाली एक वृद्ध महिला ने कहा कि मैंने ताउम्र इसी अस्पताल से इलाज कराया. निजी अस्पताल में इलाज कराती तो शायद घर बिक चुका होता.

मैक्स के बाहर मरीज आज भी परेशान

जब से लगाया गया है, उसके बाद से ही यहां महीनों से इलाज करा रहे मरीज काफी परेशान हो रहे हैं. आज भी कुछ ऐसे मरीज मिले, जिन्हें ऑपरेशन के लिए या चेकअप के लिए आज की डेट दी गई थी. लेकिन उनका इलाज नहीं हो रहा है. मरीजों ने कहा 'हमें मना कर दिया. अस्पताल का कहना है कि ओपीडी बंद कर दी गई है.'

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