'ग्लोबल पेरेंटिंग डे' पर बोले सिसोदिया- बच्चों में मानसिक तनाव को दूर करने को माइंडफुलनेस कारगर'

'ग्लोबल पेरेंटिंग डे' पर दिल्ली सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि बच्चों में मानसिक तनाव को दूर करने के लिए माइंडफुलनेस एक्सरसाइज जरूरी है.

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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया (फोटो-ITGD) दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया (फोटो-ITGD)

पंकज जैन

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2021,
  • अपडेटेड 6:05 PM IST
  • आज के दौर में पेरेंटिंग पर बात करने की बहुत जरूरतः मनीष सिसोदिया
  • पेरेंट्स को बच्चों के स्तर पर मनोविज्ञान समझने की जरूरतः एक्सपर्ट्स
  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए 10 हजार से अधिक अभिभावक शामिल

दिल्ली सरकार द्वारा आज मंगलवार को 'ग्लोबल पेरेंटिंग डे' के अवसर पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया. कोरोना संकट के इस समय जब बच्चे पूरा समय घर में होते हैं तो इस दौरान पेरेंटिंग काफी महत्वपूर्ण हो गई है. इसका ध्यान रखते हुए वेबिनार में एक्सपर्ट्स ने अभिभावकों को बेहतर पेरेंटिंग के गुर सिखाए.

वेबिनार में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया, बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अमित सेन, डॉ. शैलजा सेन सहित बहुत से अभिभावकों, स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों ने भाग लिया. सिसोदिया ने कहा कि कोरोना काल में बच्चों के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए माइंडफुलनेस एक्सरसाइज बेहद अहम हैं और मेडिटेशन से लोगों को अवसाद को दूर करने में सहायता मिलेगी.

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पेरेंटिंग के पुराने तरीकों से समाधान नहींः सिसोदिया

भारत में पेरेंटिंग के महत्व पर बात करते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज के दौर में भारत में पेरेंटिंग पर बात करने की बहुत जरूरत है. कोरोना काल में बेहतर पेरेंटिंग, अभिभावकों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी है. इस संकट के समय बच्चे घर से बाहर नहीं निकल सकते, स्कूल नहीं जा सकते अपने दोस्तों से नही मिल सकते. बच्चों को सारा समय घर में बिताना होता है.

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों की दुनिया घर से बाहर निकल अपने सपनों की उड़ान भरने की दुनिया होती है. लेकिन कोरोना संकट में बच्चों की दुनिया पिछले 1.5 साल से घर में सिमट कर रह गई है. और इस दौर में अभिभावकों के सामने पेरेंटिंग से संबंधित नई-नई चुनौतियां आ रही है.

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उन्होंने कहा कि जो देश इस संकट के समय और इसके बाद की पेरेंटिंग कर लेगा वहां का समाज खुशहाल होगा और तरक्की करेगा. उन्होंने कहा कि भारत में पेरेंटिंग आज भी काफी हद तक पुराने ढांचे पर आधारित है जिसे बदलने की जरूरत है. आज भारतीय परिवारों को जरूरत है कि वो नए दौर की पेरेंटिंग सीखें क्योंकि ये नया दौर है जिसमें आने वाली चुनौतियां भी नई हैं. इन चुनौतियों का पेरेंटिंग के पुराने तरीकों से समाधान नहीं किया जा सकता है.

बच्चों का मनोविज्ञान समझने की जरूरतः एक्सपर्ट

उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने कहा कि महामारी के इस समय में जब बच्चे 24×7 घर में हैं तो उनमें मानसिक ठहराव, चिड़चिड़ापन, संबंधों के बैलेंसिंग में गड़बड़ी, मानसिक तनाव जैसी परेशानियां उत्पन्न हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि अभिभावक पेरेंटिंग के नए तरीकों को सीखें और अपनाएं. जिससे वे बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास में आने वाली बाधाओं को तोड़ सकें. ताकि वे सक्रिय और रचनात्मक बने रहें. दिल्ली के स्कूलों में हैप्पीनेस करिकुलम के माध्यम से सिखाए गए माइंडफुलनेस एक्सरसाइज और मेडिटेशन से अवसाद को दूर करने में सहायता मिलेगी. बच्चे अपने माता-पिता को भी ये एक्सरसाइज सीखा सकते हैं.

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बाल मनोविज्ञान एक्सपर्ट शैलजा सेन और अमित सेन ने वेबिनार में अभिभावकों को बेहतर पेरेंटिंग के गुर सिखाए. उन्होंने कहा कि इस महामारी ने हर व्यक्ति को प्रभावित किया है. लेकिन हमारे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. इस दौर में अभिभावकों को अपने दृष्टिकोण के साथ-साथ पेरेंटिंग के अपने तरीकों में भी बदलाव लाने की जरूरत है. एक्सपर्ट्स ने बताया कि पेरेंट्स को बच्चों के स्तर तक जाकर उनके मनोविज्ञान समझने की जरूरत है. उन्होंने अभिभावकों को अपने घरों में माइंडफुलनेस, मेडिटेशन, योग, स्ट्रेस बस्टर जैसे एक्टिविटीज करने की सलाह दी.


 

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