दिल्ली में पानी की किल्लत कैसे दूर होगी, पुरानी पाइपलाइनें कब बदलेंगी और लोगों को राहत कब मिलेगी? इन सवालों के बीच दिल्ली के जलमंत्री प्रवेश वर्मा ने मंगलवार को सचिवालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार का पूरा एक्शन प्लान सामने रखा. उन्होंने कहा कि दिल्ली का पानी संकट अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि यह कई सालों से बुनियादी ढांचे की अनदेखी का नतीजा है.
मंत्री के मुताबिक, दिल्ली को हर दिन करीब 1,250 एमजीडी पानी की जरूरत होती है. लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि राजधानी की 16,634 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का बड़ा हिस्सा काफी पुराना हो चुका है. करीब 33 प्रतिशत पाइपलाइनें 30 साल से ज्यादा पुरानी हैं, जबकि 19 प्रतिशत 25 से 30 साल पुरानी हैं. ऐसे में पानी लीकेज और सप्लाई की दिक्कत लगातार बढ़ रही है.
पुरानी पाइपलाइनें बदलने का प्लान, 8 जोन में काम शुरू
प्रवेश वर्मा ने बताया कि सरकार अब इस जर्जर पाइपलाइन नेटवर्क को बदलने की तैयारी में पूरी तरह जुट गई है. इसके लिए दिल्ली को आठ अलग-अलग जोनों में बांटा गया है, जिसमें से वजीराबाद और चंद्रावल जोन में काम भी शुरू हो चुका है. बाकी बचे इलाकों के लिए तेजी से डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) पर काम चल रहा है. आने वाले समय में निजी कंपनियां इन पाइपों को बदलने के साथ-साथ पानी सप्लाई की पूरी जिम्मेदारी संभालेंगी.
इसके साथ ही उन्होंने पानी की रास्ते में होने वाली बर्बादी का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि हैदरपुर तक आने वाली CLC नहर से सिर्फ 5 फीसदी पानी खराब होता है, मगर पुरानी व जर्जर हो चुकी DSB नहर में 40 से 45 फीसदी तक पानी रास्ते में ही बह जाता है. इस खुली नहर की बर्बादी को रोकने के लिए अब पाइपलाइन से पानी लाने की योजना है, जिसके लिए IIT रुड़की से विशेष स्टडी कराई जा रही
इस दौरान, उन्होंने पानी की बर्बादी का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि हैदरपुर में CLC नहर से सिर्फ 5 फीसदी पानी खराब होता है, जबकि पुरानी DSB नहर में 40 से 45 प्रतिशत तक पानी बर्बाद हो जाता है. इसे रोकने के लिए अब खुली नहर की जगह पाइपलाइन से पानी लाने की योजना पर काम हो रहा है. इसके लिए IIT रुड़की से स्टडी कराई जा रही है.
जलमंत्री ने दावा किया कि पानी की दिक्कत कम करने के लिए टैंकरों के फेरे पहले से दोगुने किए गए हैं. पहले जहां करीब 200 बोरवेल लगाए जाते थे, वहीं पिछले एक साल में 560 बोरवेल लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि यह समस्या एक साल की नहीं है, बल्कि पहले बुनियादी ढांचे पर ध्यान न देने की वजह से पैदा हुई है.
प्रवेश वर्मा मुताबिक, जहां 2024-25 में पानी से जुड़े कामों पर 1,254 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, वहीं 2025-26 में करीब 2,900 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट शुरू या पूरे किए जा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि 2032 तक रेणुका डैम से दिल्ली को पानी मिलने की उम्मीद है. तब तक ड्यूल पाइपलाइन और नई सप्लाई व्यवस्था पर तेजी से काम किया जाएगा.
सुशांत मेहरा