पानी माफिया की लूट यूहीं चलती रही तो बूंद-बूंद को तरस जाएगी दिल्ली

दिल्ली के जामिया नगर इलाके की एक संकरी गली में गैर क़ानूनी प्लांट से मोटे पाइप के जरिए पानी लेकर जार में भरते जवानों के साथ बच्चे भी दिखाई दिए. दिल्ली में जहां इस गर्मी में पारा नए रिकार्ड बना रहा है, घरों की टोटियां सूखी पड़ी है.

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अवैध तरीके से दिल्ली में चल रहा पानी का धंधा अवैध तरीके से दिल्ली में चल रहा पानी का धंधा

नितिन जैन

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2019,
  • अपडेटेड 6:49 PM IST

यमुना से सटी रिहाइशी बस्तियों की संकरी गलियां, ठेलों पर कतार में लगे जार और इनमें जिन पाइपों से पानी भरा जा रहा है. उनके सिरे जुड़े हैं गैर कानूनी ढंग से चलाए जा रहे पानी के प्लांट से. ये वो पानी है जो ज़मीन के सीने में गहरे सुराख यानी बोरवेल के जरिए निकाला जाता है. ये सब ऐसे ही चलता रहा तो एक साल में ही दिल्ली का ग्राउंडवाटर बिल्कुल सूखने की कगार तक पहुंच जाएगा. इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने पानी की इस लूट से जेबें भरने वाले दिल्ली के पानी माफिया को कैमरे में कैद कर बेनकाब किया.

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दिल्ली के जामिया नगर इलाके की एक संकरी गली में गैर क़ानूनी प्लांट से मोटे पाइप के जरिए पानी लेकर जार में भरते जवानों के साथ बच्चे भी दिखाई दिए. दिल्ली में जहां इस गर्मी में पारा नए रिकार्ड बना रहा है, घरों की टोटियां सूखी पड़ी है. वहीं दिल्ली का पानी माफिया चोरी की बिजली के जरिए ज़मीन के नीचे के पानी को निकाल रहा है. फिर इसे पानी के संकट से जूझती दिल्ली में जारों के जरिए बेचकर मोटी कमाई कर रहा है.

दिल्ली में आधिकारिक तौर पानी की आपूर्ति 900 मिलियन गैलन प्रति दिन है. लेकिन पानी की मांग इससे कहीं ज़्यादा 1200 मिलियन गैलन प्रतिदिन की है. इसी 300 मिलियन गैलन पानी की कमी की स्थिति को पानी माफिया अपने फायदे के लिए भुना रहा है.

पुलिस की नाक के नीचे चलने वाले इन गैर कानूनी प्लांट से जो पानी निकलता है उसके ट्रीटमेंट के लिए निर्धारित मानकों की भी परवाह नहीं की जाती. ना कोई परमिट और ना ही कोई सुरक्षा प्रमाणपत्र. इस गोरखधंधे में बेतहाशा पानी हर दिन व्यर्थ भी जाता है. लेकिन इस सबके बावजूद अवैध प्लांट चलाने वालों के लिए पानी का ये धंधा मुनाफ़े वाला है.

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अवैध प्लांट की तस्वीर

इंडिया टुडे एसआईटी के अंडरकवर रिपोर्टर अपनी जांच के तहत जामिया नगर में पानी का गैर क़ानूनी प्लांट चला रहे अल्तमस तक पहुंचे. अल्तमस ने इस धंधे के ताने-बाने के बारे में बताया.

 रिपोर्टर- तुम्हारा नए प्लांट में कितना लगा (खर्च) है?

अल्तमस- 1 लाख 80 हजार.

रिपोर्टर- कैपेसिटी क्या है? कितना पानी निकालता है?  

अल्तमस- 1000 लीटर पानी एक घंटे में.

एक अवैध प्लांट से हर घंटे एक हज़ार लीटर पानी निकाला जाता है. अल्तमस ने कबूला कि उसके जैसे ऑपरेटर लागत कम रखने के लिए चोरी की बिजली का इस्तेमाल करते हैं.

रिपोर्टर- प्लांट कितनी बिजली खाता है?

अल्तमस- बिजली अगर एक नंबर की (वैध) चलाओगे तो बिल आएगा 20,000 रुपए महीना.

रिपोर्टर- दो नंबर (अवैध) की चलाएंगे तो...

अल्तमस- जिससे आप चोरी की बिजली लेते हो उसे 1,000 से 1,500 रुपए अलग से देने पड़ते हैं.  

अंडर कवर रिपोर्टर ने फिर जामिया नगर की एक और गली का रुख किया. यहां भी ज़मीन के नीचे से पानी निकालने पर लगी पाबंदियों का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन होते दिखा. यहां पानी की अवैध यूनिट चलाने वाले ललित ने दावा किया कि पानी माफिया पुलिस को इस धंधे से आंखें बंद रखने के लिए घूस देते हैं.  

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ललित- पुलिस का सब हो जाता है. सारा माल (उपकरण) हमने अपना लगाया है. 44,000 लगे हैं. पुलिस का अलग से है.

रिपोर्टर- पुलिसवाला क्या लेता है?

ललित- 2000 से 3000 रुपए.

रिपोर्टर- दिक्कत तो नहीं करता.

ललित- कोई दिक्कत नहीं.

नीति आयोग की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2020 तक दिल्ली ‘ज़ीरो ग्राउंडवॉटर सिटी’ हो जाएगा यानी सिर्फ एक ही साल बाद दिल्ली में ज़मीन के नीचे का पानी बिल्कुल सूख जाएगा. ऐसे में अब भी ना चेता गया और पानी की ये चोरी ऐसे ही चलती रही तो निकट भविष्य में इसकी सामाजिक और आर्थिक लागत बहुत बड़ी चुकानी होगी.

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