दिल्ली जिमखाना क्लब की बेदखली को लेकर चल रहे विवाद में अब अगली अहम सुनवाई 30 जुलाई को होगी. क्लब के सदस्यों और दिल्ली जिमखाना क्लब स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन को एस्टेट ऑफिसर के सामने अपनी बात रखने के लिए 30 जुलाई की तारीख दी गई है. इससे पहले 28 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है.
यह मामला भूमि एवं विकास कार्यालय यानी एलएंडडीओ की ओर से जारी बेदखली की कार्रवाई से जुड़ा है. एलएंडडीओ ने 29 जून को सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. नोटिस में पूछा गया था कि क्लब के खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों नहीं पारित किया जाए. साथ ही 7 जुलाई तक जवाब देने और उसी दिन व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने को कहा गया था.
क्लब के सदस्य विजय खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन ने इस नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. उनका कहना है कि नोटिस समय से पहले जारी किया गया क्योंकि क्लब की लीज समाप्त करने का आदेश पहले से ही हाईकोर्ट में चुनौती के दायरे में है.
28 जुलाई को पहले दिल्ली हाईकोर्ट में होगी सुनवाई
मंगलवार को विजय खुराना और स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधि एस्टेट ऑफिसर के सामने पहुंचे. हालांकि उन्होंने इस दौरान अपना पक्ष नहीं रखा. विजय खुराना ने बताया कि मामला 28 जुलाई को हाईकोर्ट में सूचीबद्ध है. ऐसे में अदालत के फैसले के बाद ही यह तय किया जाएगा कि एस्टेट ऑफिसर के सामने कौन-कौन से तर्क रखे जाएंगे.
सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन ने क्लब के सदस्यों और स्टाफ की ओर से दायर उन आवेदनों पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा, जिनमें 29 जून के कारण बताओ नोटिस के संचालन पर रोक लगाने की मांग की गई है. हाईकोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि एस्टेट ऑफिसर के सामने होने वाली सुनवाई अगली सुनवाई की तारीख के बाद ही हो. इसी के बाद एस्टेट ऑफिसर ने 30 जुलाई की नई तारीख तय की.
पूरा विवाद एलएंडडीओ के 22 मई के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थायी लीज समाप्त कर दी गई थी. आदेश में क्लब को 27.3 एकड़ जमीन 5 जून तक खाली करने को कहा गया था. सरकार ने इसके पीछे रक्षा ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता का हवाला दिया था. हालांकि, 26 मई को केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि वह 5 जून तक क्लब परिसर का जबरन कब्जा नहीं लेगी और पूरे मामले में कानून के अनुसार ही आगे की कार्रवाई करेगी.
विजय खुराना ने अपनी याचिका में कहा है कि 29 जून का कारण बताओ नोटिस इस आधार पर जारी किया गया कि क्लब की लीज वैध रूप से समाप्त हो चुकी है, जबकि यही मुद्दा अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है. इसलिए बेदखली की कार्रवाई जल्दबाजी में शुरू की गई. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी मांग की है कि क्लब के कब्जे और उसके सामान्य संचालन की वर्तमान स्थिति को बनाए रखा जाए.
अंतिम आदेश और सख्त कार्रवाई पर रोक की भी मांग
वैकल्पिक रूप से उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि जब तक हाईकोर्ट इस मामले में फैसला नहीं देता, तब तक एस्टेट ऑफिसर कोई अंतिम आदेश जारी न करें और न ही किसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाए. अब इस पूरे मामले में सभी की नजर 28 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर रहेगी. इसके बाद 30 जुलाई को एस्टेट ऑफिसर के सामने क्लब के सदस्य और स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन अपना पक्ष रखेंगे.
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