दिल्लीः कोरोना मरीजों के लिए 80 नहीं, अब 60 फीसदी बेड रहेंगे रिजर्व

दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में दिए अपने हलफनामे में कहा है कि वो प्राइवेट अस्पतालों में कोविड मरीजों के लिए आरक्षित किए गए 80 प्रतिशत ICU बेड की संख्या घटाकर 60 फ़ीसदी करने के लिए तैयार है.

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दिल्ली में कोरोना मरीजों की संख्या में कमी आई है, इस कारण प्राइवेट अस्पतालों में आरक्षित ICU बिस्तरों को घटाने की मांग की जा रही है. दिल्ली में कोरोना मरीजों की संख्या में कमी आई है, इस कारण प्राइवेट अस्पतालों में आरक्षित ICU बिस्तरों को घटाने की मांग की जा रही है.

पूनम शर्मा

  • दिल्ली,
  • 28 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 5:54 PM IST
  • दिल्ली में कोरोना के गंभीर मरीजों की संख्या में कमी आई है
  • प्राइवेट अस्पताल आरक्षित बिस्तरों को कम करने की मांग कर रहे हैं
  • दिल्ली सरकार हो गई है तैयार

जैसे ही राजधानी दिल्ली में कोरोना महामारी के मामले सामने आने लगे थे, तभी दिल्ली सरकार ने 33 प्राइवेट अस्पतालों की 80 फीसदी आईसीयू बेड कोविड मरीजों के लिए रिजर्व कर दिया था. सरकार के इसी फैसले के खिलाफ प्राइवेट अस्पतालों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका डाली थी. सोमवार के दिन इसी मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच में सुनवाई हुई है. सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अपने हलफनामें में कहा है कि वो इन प्राइवेट अस्पतालों के 80 फ़ीसदी आईसीयू बेड, जो कोविड मरीजों के लिए रिज़र्व किये गए थे, उनको 80 फ़ीसदी से घटाकर 60 फ़ीसदी करने के लिए तैयार है.

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आपको बता दें कि 24 दिसंबर को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा एक आदेश दिया गया था, जिसमें दिल्ली सरकार को 'रिव्यु कमेटी' की सिफारिशों को शामिल करने के निर्देश दिए थे. दिल्ली सरकार ने इस हलफनामे में कोविड मरीजों के लिए 20 फ़ीसदी बेड घटाने की सिफारिश इसी फैसले के बाद की है.

हाईकोर्ट के 24 दिसंबर वाले फैसले के बाद 26 दिसंबर कोभी रिव्यू करने के लिए एक बैठक हुई. जिसमें नीति आयोग के सदस्य वी के पॉल और एम्स के डायरेक्ट रणदीप गुलेरिया को भी शामिल किया गया था. नीति आयोग के सदस्य और एम्स के डायरेक्टर दोनों ने इस बात की सिफारिश की कि नॉन कोविड मरीजों के लिए इन 33 प्राइवेट अस्पतालों के 20 फ़ीसदी बेड  बढ़ाए जाने चाहिए.

रणदीप गुलेरिया और वीके पॉल ने पाया कि दिल्ली में कोविड के मामले अब कम हो रहे है. जिसकी वजह से आईसीयू बेड में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भी 23 फ़ीसदी गिरावट आई है. इस स्थिति को दोबारा रिव्यू करने के लिए 10 दिन के बाद एक बैठक और कराई जा सकती है. आज भी सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को बताया के यह रिव्यू मीटिंग 5 जनवरी को दोबारा की जाएगी.

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एम्स के डायरेक्टर और नीति आयोग के सदस्य ने इस बात की सिफारिश भी की है कि 15 जनवरी तक स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि उस दौरान नया साल भी निकल चुका होगा और यूके से आए नए कोविड का भी मूल्यांकन किया जा सकेगा. यानी नए साल के जश्न मनाने वाले या शादियों को अटेंड करने के दौरान कोविड मरीजों की संख्या में अगर कोई बढ़ोतरी होती है, तो उसके लिए15 जनवरी तक बैठक करके हालात की समीक्षा की जा सकती है. जिससे यह साफ हो सके कि क्या आगे भी इन 33 प्राइवेट अस्पतालों के 60 फ़ीसदी आईसीयू बेड कोविड मरीजों के लिए रिज़र्व करने की जरूरत है. दिल्ली हाईकोर्ट ने फ़िलहाल दिल्ली सरकार को 5 जनवरी को होने वाली रिव्यू मीटिंग से जुड़ी जानकारियां कोर्ट को देने के निर्देश दिए हैं और 8 जनवरी तक के लिए इस मामले की सुनवाई टाल दी है.

प्राइवेट अस्पतालों के एसोसिएशन की तरफ से लगाई गई इस याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने अपने नोटिफिकेशन के माध्यम से 80 फ़ीसदी आईसीयू बेड तो कोविड मरीजों के लिए रिजर्व कर दिए. लेकिन आर्थिक तौर पर इन प्राइवेट अस्पतालों को दिल्ली सरकार के द्वारा कुछ भी नहीं दिया जा रहा है. जो सीधे तौर पर उनके व्यवसाय और उनके आर्थिक हितों की अनदेखी है.

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