दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DoE) ने सोशल मीडिया पर फैल रही कथित फर्जी और भ्रामक सूचनाओं को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. निदेशालय ने सिविल लाइंस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए पुलिस से कानूनी कार्रवाई की मांग की है. मामला सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से आवारा कुत्तों की गिनती कराए जाने से जुड़ी झूठी खबरों से संबंधित है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिक्षा निदेशक वेदिता रेड्डी ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर यह गलत दावा किया जा रहा है कि शिक्षा निदेशालय ने शिक्षकों को अपने-अपने स्कूलों के आसपास आवारा कुत्तों की गिनती करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से झूठा और मनगढ़ंत है. उन्होंने कहा, “ऐसा कोई भी निर्देश कभी जारी नहीं किया गया. शिक्षक केवल शैक्षणिक कार्यों में ही संलग्न हैं. यह शरारतपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण नैरेटिव है.”
शिक्षा निदेशालय के अनुसार, इस तरह की भ्रामक सूचनाओं से अभिभावकों और शिक्षकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हुई है. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग खुद को शिक्षक बताकर आवारा कुत्तों की गिनती करते हुए वीडियो बना रहे हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं.
निदेशालय ने बताया कि सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और उनके टाइमलाइन से जुड़े डिजिटल साक्ष्य एकत्र कर लिए गए हैं और पुलिस को सौंप दिए गए हैं. शिकायत में कहा गया है कि अज्ञात और शरारती तत्वों द्वारा जानबूझकर झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है, जिससे शिक्षा विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा है और सार्वजनिक विश्वास व व्यवस्था प्रभावित हुई है.
शिक्षा निदेशालय ने दोहराया कि संबंधित सर्कुलर में कहीं भी आवारा कुत्तों की गिनती का कोई उल्लेख नहीं है और इस बारे में विभाग पहले ही आधिकारिक तौर पर स्पष्टीकरण जारी कर चुका है. इसके बावजूद सोशल मीडिया पर शिक्षक बनकर वीडियो बनाने और झूठी जानकारी फैलाने के मामलों को गंभीर बताते हुए तत्काल जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है.
शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 353(2) (सरकारी प्राधिकरण की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले झूठे बयान), धारा 196 (सार्वजनिक भय और उपद्रव फैलाने वाले बयान), धारा 221 और 299 (जालसाजी व झूठी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66D (ऑनलाइन धोखाधड़ी व प्रतिरूपण) और धारा 67 (आपत्तिजनक व भ्रामक इलेक्ट्रॉनिक सामग्री का प्रसारण) का उल्लेख किया गया है.
शिक्षा निदेशालय ने पुलिस से एफआईआर दर्ज कर भ्रामक सामग्री के स्रोत, उसे फैलाने वालों और आगे प्रसारित करने वालों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध किया है.
सुशांत मेहरा