लॉकडाउन में अस्पताल के चक्कर काटने को मजबूर कैंसर पीड़ित महिला

दिल्ली में कांति देवी कैंसर की मरीज है. पिछले 10 महीने से अपना इलाज करा रही हैं. कुछ दिन पहले उनको अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था, लेकिन लगातार दो हफ्तों से उनकी हालत बिगड़ती जा रही है.

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कांति देवी कांति देवी

मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 18 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 11:14 PM IST

  • कोरोना संकट के कारण देश में लॉकडाउन
  • अन्य रोगियों को हो रहीं कई परेशानियां

कोरोना वायरस के कारण लोगों की जिंदगियों पर काफी असर पड़ा है. वहीं कोरोना वायरस के संकट से निपटने के लिए लागू लॉकडाउन के कारण अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों की दिक्कतें थोड़ी और बढ़ गई है. देशभर के अस्पताल इस वक्त कोरोना से लड़ रहे हैं ऐसे में अन्य मरीजों को न तो बेहतर इलाज मिल पा रहा है और लॉकडाउन की वजह से वह अपने घरों को जाने में भी परेशानी झेल रहे हैं.

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कोविड-19 से पहले भी लोग बीमार हुआ करते थे और अस्पताल में भर्ती होते थे. लेकिन कोविड-19 के कारण अस्पतालों में कई अन्य बीमारियों से पीड़ित रोगियों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है. ऐसा ही एक मामला दिल्ली से सामने आया है. जहां एक कैंसर की मरीज पिछले कई हफ्तों से अस्पताल के चक्कर काट रही है, लेकिन उन्हें इलाज की जगह दवा देकर ही वापस लौटाया जा रहा है.

दरअसल, दिल्ली में कांति देवी कैंसर की मरीज है. पिछले 10 महीने से अपना इलाज करा रही हैं. कुछ दिन पहले उनको अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था, लेकिन लगातार दो हफ्तों से उनकी हालत बिगड़ती जा रही है और वह कई बार एम्स के चक्कर काट चुकी है. परिजनों का कहना है कि ओपीडी बंद हो गया है और आपातकालीन सेवाओं में भारी भीड़ लगी रहती है. डॉक्टर भी कुछ दवा लिखकर वापस भेज देते हैं.

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ऐसे हालात में अब कैंसर मरीज कांति देवी काफी परेशान हैं. उन्होंने बताया कि डॉक्टर लॉकडाउन के बाद आने के लिए कहते हैं. परेशानी की वजह से कई दिनों से खाना भी नहीं खाया है. वहीं उनके बेटे राकेश का आरोप है कि डॉक्टर बार-बार उनको वापस भेज रहे हैं.

बेटे ने बताया कि मां का घर में रहना भी मुश्किल है. कैंसर के कारण मां को इतना ज्यादा दर्द होता है कि उठाने के लिए भी चार लोगों की जरूरत पड़ती है. बार-बार उत्तम नगर से एम्स आना आसान नहीं है. वहीं दोगना खर्चा भी हो जाता है. कांति के पति ने बताया कि एम्स के डॉक्टर बहुत अच्छे हैं. लॉकडाउन से पहले इलाज हो रहा था. लेकिन जैसे ही ओपीडी बंद हुआ है, डॉक्टर रफा दफा करने में ही लगे रहते हैं.

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