छत्तीसगढ़: खरीद-फरोख्त का टेप आया सामने, कांग्रेस बोली- BJP की मान्यता हो रद्द

कम्बल वाले बाबा के नाम से मशहूर गणेश यादव का एक ऑडियो टेप सामने आया है, जिसमें वो कांग्रेस विधायक चिंतामणि महाराज को 10 करोड़ रुपये और मंत्री पद का ऑफर देकर बीजेपी में शामिल होने की बात कह रहे हैं.

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कम्बल वाले बाबा (फोटो- सुनील नामदेव) कम्बल वाले बाबा (फोटो- सुनील नामदेव)

राम कृष्ण / सुनील नामदेव

  • रायपुर,
  • 18 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 11:03 PM IST

छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी विधायकों की खरीद-फरोख्त वाले एक ऑडियो टेप के सामने आने के बाद राजनीति गरमा गई है. कांग्रेस ने इस ऑडियो टेप को चुनाव आयोग को सौंपकर बीजेपी की मान्यता खत्म करने की मांग की है. ये ऑडियो टेप कम्बल वाले बाबा के नाम से मशहूर गणेश यादव का है. कम्बल वाले बाबा ने कांग्रेस विधायक चिंतामणि महाराज को 10 करोड़ रुपये और मंत्री पद का ऑफर देकर बीजेपी में शामिल होने की बात कही है.

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राज्य के गृहमंत्री राम सेवक पैकरा के बेहद करीबी कम्बल वाले बाबा ने स्वीकार किया है कि यह ऑडियो टेप उन्हीं का है और वो खुद इतने सक्षम है कि किसी को भी मोटी रकम दे सकते हैं. राजनांदगांव पहुंचे कम्बल वाले बाबा ने बीजेपी नेता मधुसूदन यादव से मुलाकात की और उनके साथ ताजा राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा भी की. इस दौरान कम्बल वाले बाबा मीडिया से बचते नजर आए, लेकिन उन्होंने इस बात को स्वीकार करने में तनिक भी देरी नहीं लगाई कि यह उनका ही ऑडियो टेप है.

वहीं, इस ऑडियो टेप के वायरल होने के बाद छत्तीसगढ़ में बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं. दावा किया जा रहा है कि यह ऑडियो टेप कम्बल वाले बाबा उर्फ़ गणेश यादव का है और वो इसमें अंबिकापुर के लुंड्रा विधानसभा सीट से कांग्रेस के मौजूदा विधायक चिंतामणि महाराज से बातचीत कर रहे हैं.

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10 करोड़ और मंत्री बनाने का प्रलोभन

ऑडियो टेप में कम्बल वाले बाबा कांग्रेस विधायक को बीजेपी में शामिल होने का प्रलोभन दे रहे है. इसके एवज में उन्हें 10 करोड़ रुपये नगद और मंत्री पद का ऑफर भी दिया जा रहा है. बातचीत में कम्बल वाले बाबा का दावा है कि वो मुख्यमंत्री रमन सिंह से बातचीत के बाद ही यह प्रस्ताव दे रहे हैं. दूसरी ओर कांग्रेस विधायक चिंतामणि महाराज ने कम्बल वाले बाबा के इस ऑफर को ठुकरा दिया है. उन्होंने अपने साथ हुई इस बातचीत के ऑडियो टेप को कांग्रेस आलाकमान को भी सौंपा है.

कांग्रेस ने चुनाव आयोग में दी शिकायत

वहीं, इस को सार्वजनिक कर कांग्रेस ने बीजेपी पर अपने विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है. कांग्रेस ने मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की है. चुनाव आयोग को यह टेप सौंपकर कांग्रेस ने बीजेपी की मान्यता रद्द करने की भी मांग की है.

सरगुजा इलाके में कम्बल वाले बाबा के नाम से गणेश यादव काफी मशहूर है. उनको राज्य के गृहमंत्री राम सेवक पैकरा का बेहद करीबी माना जाता है. वो न सिर्फ बीजेपी के समर्थक हैं, बल्कि बीजेपी के कई नेताओं के लिए चुनावी जोड़-तोड़ में भी वो लगे रहते हैं. इस ऑडियो टेप के सामने आने के तीन दिन पहले ही कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और तानाखार से विधायक रामदयाल उइके ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था.

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ऑडियो टेप में रामदयाल उइके का भी जिक्र

कम्बल वाले बाबा ने इस ऑडियो टेप में यह भी कहा कि रामदयाल उइके भी मंत्री पद और 10 करोड़ के ऑफर पर बीजेपी में आए हैं. कम्बल वाले बाबा ने इस बात को स्वीकार किया है कि यह टेप उन्हीं का है और उन्होंने चिंतामणि महाराज से बातचीत भी की थी. हालांकि इसके लिए बीजेपी ने उन्हें न तो अधिकृत किया है और न ही बीजेपी के किसी नेता ने ऐसा करने के लिए उनसे कहा है.

मीडिया के सामने आने नहीं आ रहे कम्बल वाले बाबा

उधर, इस घटना के बाद प्रदेश में राजनीति गरमा गई है. हालांकि कम्बल वाले बाबा अपनी बात रखने के लिए न तो कैमरे पर आ रहे हैं और न ही पत्रकारों के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं. दूसरी ओर इस ऑडियो टेप के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कम्बल वाले बाबा को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा कि किसी बाबा से न तो पार्टी का कोई लेना देना है और न ही सरकार का. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के बाबा अपनी दुकानदारी चलाने के लिए ऐसी हरकत करते हैं.

बीजेपी ने कम्बल वाले बाबा से काटा किनारा

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इस ऑडियो टेप सार्वजनिक होने के बाद बीजेपी ने कम्बल वाले बाबा से पूरी तरह किनारा कर लिया है. राज्य के बीजेपी अध्यक्ष धर्मलाल कौशिक ने भी साफ़ किया कि कम्बल वाले बाबा से बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है और न ही वो पार्टी के कार्यकर्ता हैं. उन्होंने दावा किया कि बीजेपी मिशन- 65 के तहत काम कर रही है और उसके कार्यकर्ता ही पार्टी का आधार हैं, न कि कोई बाबा. वहीं, चुनाव आयोग में पहुंचकर कांग्रेस ने बीजेपी की मान्यता रद्द करने की मांग की है. कांग्रेस ने को इस ऑडियो टेप को सौंपकर बीजेपी पर उनके विधायकों की खरीद-फरोख्त और उन्हें लालच देने की शिकायत की है. फिलहाल निगाहें चुनाव आयोग के फैसले पर लगी हुई हैं.

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