बिहार को बाढ़ और गाद से बचाने के लिए बने राष्ट्रीय नीति: सुशील मोदी

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गाद प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की है. गाद प्रबंधन पर आयोजित सेमिनार के उद्धाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गाद प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नीति बननी चाहिए.

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गाद प्रबंधन पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते सुशील कुमार मोदी गाद प्रबंधन पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते सुशील कुमार मोदी

सुजीत झा / राम कृष्ण

  • पटना,
  • 22 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 6:47 PM IST

बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गाद प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की है. गाद प्रबंधन पर आयोजित सेमिनार के उद्धाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गाद प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय नीति बननी चाहिए. बिहार की पहल पर भारत सरकार ने गाद समस्या के अध्ययन के लिए एक कमेटी का गठन किया है. सूबे की गरीबी, पिछड़ेपन और पलायन का मुख्य कारण हर साल आने वाली बाढ़ है.

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उन्होंने कहा कि गाद के कारण बाढ़ का क्षेत्र बढ़ा है. हर साल बाढ़ से राहत और बचाव कार्य पर सरकार को काफी धन खर्च करना पड़ता है, जिससे विकास के अन्य कार्य प्रभावित होते हैं. मोदी ने कहा कि हाल के वर्षों में बिहार की सभी नदियों में गाद का काफी जमाव हुआ है. बूढ़ी गंडक को छोड़कर बिहार की सभी नदियों का उद्गम नेपाल है.

ने कहा कि हाल के दिनों में नेपाल में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई, जिसके कारण बरसात के दिनों में वहां से आने वाली नदियां अपने साथ काफी मात्रा में गाद लेकर आती हैं और बिहार के समतल इलाके में उसे छोड़ देती हैं. इसके कारण नदियों में जगह-जगह 15-20 फुट तक के टीले बन जाते हैं और पानी का प्रवाह बाधित हो जाता है. नतीजतन नदियां अपना रास्ता बदल रही हैं और नए-नए क्षेत्रों में बाढ़ से परेशानी हो रही है.

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ने कहा कि क्लाइमेट चेंज के कारण भी कई तरह की परेशानियां पैदा हुई हैं. पिछले साल एक महीने में जितनी बारिश होती थी, उतनी तीन दिनों में अररिया और किशनगंज के इलाके में हुई. इसकी वजह से वहां के लोगों को बाढ़ की भारी तबाही झेलनी पड़ी. इस साल कोसी के इलाके में तापमान में अचानक आई गिरावट से मक्के की फसल में दाने नहीं आए. मौसम परिवर्तन, गाद और बाढ़ का आपस में संबंध है. रिवर हेल्थ एसेसमेंट के जरिए इसे नियंत्रित करने की जरूरत है.

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