फैक्ट चेक: मुंडका अग्निकांड में 50 से भी ज्यादा जानें बचाने वाले दयानंद तिवारी को मीडिया ने किया नजरअंदाज? झूठा है ये दावा

13 मई को यानी जिस दिन ये घटना हुई थी, उस दिन दयानंद तिवारी नाम के एक क्रेन ऑपरेटर ने अपने एक साथी के साथ मिलकर 50 से भी ज्यादा लोगों की जान बचाई थी.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
दिल्ली के मुंडका में लगी भीषण आग के दौरान 50 से भी ज्यादा लोगों की जान बचाने वाले क्रेन ऑपरेटर दयानंद तिवारी को लेकर मीडिया में न कोई चर्चा हुई. न ही पत्रकारों ने उनकी तारीफ में कुछ पोस्ट किया.
सच्चाई
दिल्ली के मुंडका इलाके में लगी आग के दौरान 50 से ज्यादा लोगों की जान बचाने वाले क्रेन ऑपरेटर दयानंद तिवारी के बारे में कई मीडिया रिपोर्ट छपी थीं. उनकी तारीफ करते हुए कई पत्रकारों ने अपने वेरिफाइड ट्विटर हैंडल से ट्वीट भी किया था.

ज्योति द्विवेदी

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2022,
  • अपडेटेड 4:00 PM IST

दिल्ली के मुंडका इलाके की जिस इमारत में आग लगने से 25 से भी ज्यादा  लोगों की मौत हो चुकी है, उसके मालिक को अब गिरफ्तार कर लिया गया है.

13 मई को यानी जिस दिन ये घटना हुई थी, उस दिन दयानंद तिवारी नाम के  एक क्रेन ऑपरेटर ने अपने एक साथी के साथ मिलकर 50 से भी ज्यादा लोगों की जान बचाई थी.

अब सोशल मीडिया पर कुछ लोग  कि दयानंद के हिंदू होने की वजह से उनके इस योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है. ये भी आरोप है कि दयानंद के बारे में न तो मीडिया में खबरें छपीं और न ही पत्रकारों ने उनकी तारीफ में कसीदे पढ़े. वहीं अगर वो (दयानंद), मुसलमान होता तो अब तक देशका हीरो बन चुका होता.मिसाल के तौर पर, एक  ने इस बाबत लिखा,“दयानन्द तिवारी जो खुद एक गरीब परिवार से आते हैं उन्होंने डीजल या अपनी चिंता ना करके हुए 50 से ज्यादा लोगों को उस जलती इमारत से निकाला. आप कल्पना करिए यदि दयानंद तिवारी की जगह कोई अब्दुल या  कोई रहमान होता उनका कितना गुणगान इस देश की मीडिया और सेक्युलर  पत्रकारों द्वारा किया जाता.”

कई वेरिफाइड  ने भी दयानंद तिवारी को लेकर मीडिया में कोई  चर्चा न होने की .

ऐसी ही एक पोस्ट का  देखा जा सकता है.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि दिल्ली के हालिया मुंडका अग्निकांड में कई लोगों की जान बचाने वाले क्रेन ऑपरेटर दयानंद  तिवारी की बहादुरी और जज्बे को लेकर ज्यादातर मीडिया वेबसाइट्स में खबर छपी थी. कई पत्रकारों ने भी सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ की थी.

नेकी कर खबरों में छा गए

दयानंद तिवारी और उनके साथी अनिल तिवारी, मुंडका उद्योग नगर से आ रहे थे जब उन्होंने  रास्ते में जलती हुई चार मंजिला इमारत देखी. दोनों ने क्रेन की  मदद से इमारत में फंसे तकरीबन 50 से ज्यादा लोगों को बचाया, जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं. हालांकि बाद में आग बढ़ जाने के कारण वे और लोगों को नहीं बचा पाए.

दयानंद और अनिल की इस बहादुरी के बारे में , ,  , ,   , , ,    और   जैसी कई न्यूज वेबसाइट्स में खबरें छपी थीं.

इसके अलावा,  वाले कई पत्रकारोंऔर  ने भी  दयानंद तिवारी की बहादुरी की सराहना की थी और  था.

अलग-अलग विशेषणों से नवाजा गया

दयानंद तिवारी और अनिल तिवारी को उनकी बहादुरी भरे कारनामे के बाद किसी ने  कहा, किसी ने  तो किसी ने उन्हें   दे दिया. ‘न्यूज 18’ ने उनका एक्सक्लूसिव इंटरव्यू लिया जिसे नीचे देखा जा सकता है.

इसमें कोई शक नहीं है कि मुंडका अग्निकांड मामले में दयानंद तिवारी और उनके साथी ने जिस तरह दिलेरी के साथ लोगों की जान बचाई, वो उन्हें एक हीरो का दर्जा देती है. लेकिन ये कहना गलत है कि इन दोनों के हिंदू होने की वजह से मीडिया ने इनके योगदान को दबा दिया.

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