फैक्ट चेक: मौत के 100 साल बाद भी मुस्कुरा रहा है बौद्ध भिक्षु? ये है वायरल तस्वीर की सच्चाई

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. ये तस्वीर बौद्ध भिक्षु लुआंग फोर पियान की है, जिनकी मौत नवंबर 2017 में बैंकॉक में हुई थी.पोस्ट

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
मंगोलिया में बौद्ध भिक्षु का 100 साल पुराना शव, जो अभी भी मुस्कुरा रहा है.
सच्चाई
तस्वीर एक बौद्ध भिक्षु के शव की है जिनकी 2017 में बैंकॉक में मौत हुई थी. उनके शिष्यों ने पाया कि मौत के दो महीने बाद भी उनका शव खराब नहीं हुआ था.

धीष्मा पुज़क्कल

  • नई दिल्ली,
  • 19 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 3:03 PM IST

क्या कोई आदमी मौत के बाद भी मुस्कुरा सकता है? वह भी ऐसा शख्स, जिसकी मौत सौ साल पहले हो चुकी हो? लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा ही दावा किया जा रहा है.

एक बौद्ध भिक्षु की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब शेयर की जा रही है. दावा किया जा रहा है कि मंगोलिया के एक इलाके में एक बौद्ध भिक्षु को "एक सदी पहले दफनाया गया था" लेकिन उनका शरीर अब भी मुस्कुरा रहा है. कहा जा रहा है कि बौद्ध भिक्षु अब तक "ध्यान की गहरी अवस्था में है" और इसी के जरिये उसने इस नामुमकिन को मुमकिन बनाया.

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एक  ने तस्वीर को शेयर करते हुए अंग्रेजी में कैप्शन लिखा है, जिसकी हिंदी कुछ इस तरह है, “करीब 100 साल पुरानी एक भिक्षु की ममी दुनिया भर की वेबसाइट पर खबर बनी हुई है. कुछ बौद्ध भिक्षुओं के मुताबिक, वह अब भी जीवित है और ध्यान की गहरी मुद्रा में है. ये शव मंगोलिया के एक इलाके में मिला है.” 

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. ये तस्वीर बौद्ध भिक्षु लुआंग फोर पियान की है, जिनकी मौत नवंबर 2017 में बैंकॉक में हुई थी.पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन  और  देखा जा सकता है. 

AFWA की पड़ताल

रिवर्स सर्च की मदद से हमने पाया कि जिन बौद्ध भिक्षु की तस्वीर वायरल हो रही है, उनकी मौत 2017 में बैंकॉक, थाईलैंड के एक अस्पताल में हुई थी.

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हमें 2018 की कई  मिलीं, जिनमें ये तस्वीर इस्तेमाल की गई है.  की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तस्वीर में दिख रहे भिक्षु का नाम श्रद्धेय लुआंग फोर पियान है. 92 वर्ष की उम्र में 16 नवंबर, 2017 को बैंकॉक के एक अस्पताल में उनकी मौत हुई थी.

खबरों के मुताबिक, ये तस्वीर तब खींची गई जब उनके शिष्यों ने मौत के दो महीने बाद उनका शव ताबूत से बाहर निकाला था. बौद्ध परंपरा के मुताबिक नए वस्त्र पहनाने के लिए उनके शव को बाहर निकाला गया था. बौद्ध गुरु पियान मूल रूप से कंबोडिया के रहने वाले थे. उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन थाईलैंड में एक आध्यात्मिक बौद्ध गुरु के रूप में सेवा करके बिताया था.

ब्रिटिश न्यूज वेबसाइट ‘’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भिक्षु का शव खराब नहीं हुआ था और ऐसे दिख रहा था जैसे कि उनकी मौत हुए 36 घंटे से ज्यादा का वक्त नहीं हुआ है.

हालांकि, 2015 में मंगोलिया में एक  का शव पद्मासन की अवस्था में मिला था जो दो सदी पुराना था. फोरेंसिक रिपोर्ट में कहा गया था कि ये शव एक ऐसे व्यक्ति का है जो लामा हो सकता है या कोई तिब्बती बौद्ध गुरु हो सकता है. AFWA ने पाया कि 2015 में मंगोलिया में मिले बौद्ध भिक्षु की  वायरल हो रही तस्वीर से अलग है.

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