फैक्ट चेक: पुलिसकर्मियों की पुरानी तस्वीरों के जरिये किसान आंदोलन के बारे में फैलाया जा रहा भ्रम

सोशल मीडिया पर दो तस्वीरें वायरल हो रही हैं. पहली तस्वीर में खाकी वर्दी पहने एक व्यक्ति के हाथ पर 'RSS' लिखा हुआ नजर आ रहा है. दूसरी तस्वीर में पुलिस की वर्दी में एक आदमी जाते हुए दिख रहा है और उसके दोनों हाथों में पत्थर हैं.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
पुलिसकर्मियों की ये तस्वीरें मौजूदा किसान आंदोलन के दौरान ली गई हैं जिनमें एक के हाथ पर आएसएस लिखा है और दूसरे के हाथों में पत्थर हैं.
सच्चाई
पहली तस्वीर को फरवरी 2020 में कई लोगों ने शेयर किया था, वहीं दूसरी तस्वीर अगस्त 2013 से सोशल मीडिया पर मौजूद है. इनका किसान आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है.

अर्जुन डियोडिया

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 11:41 PM IST

गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुई हिंसा के बाद से किसान आंदोलन में तनाव की स्थिति बनी हुई है. दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर 29 जनवरी को कुछ लोगों की किसानों से झड़प हो गई, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. किसानों की तरफ से आरोप लगाया गया कि उन पर ये हमला पुलिस की मिलीभगत से हुआ है. इसी के मद्देनजर सोशल मीडिया पर दो तस्वीरें वायरल हो रही हैं. पहली तस्वीर में खाकी वर्दी पहने एक व्यक्ति के हाथ पर 'RSS' लिखा हुआ नजर आ रहा है. दूसरी तस्वीर में पुलिस की वर्दी में एक आदमी जाते हुए दिख रहा है और उसके दोनों हाथों में पत्थर हैं. तस्वीरों को किसान आंदोलन से जोड़ा जा रहा है और दुख जताते हुए कहा गया है कि ये देश में क्या हो रहा है.

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इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि दोनों तस्वीरें पुरानी हैं. पहली तस्वीर को फरवरी 2020 में कई लोगों ने शेयर किया था, वहीं दूसरी तस्वीर अगस्त 2013 से सोशल मीडिया पर मौजूद है. इनका किसान आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है.

इस भ्रामक पोस्ट को  और  पर काफी शेयर किया जा रहा है.  का आर्काइव  देखा जा सकता है.

क्या है सच्चाई?

पहली तस्वीर

इस तस्वीर को कुछ कीवर्ड और रिवर्स सर्च की मदद से खोजने पर हमें 16 फरवरी 2020 का एक ट्वीट मिला. ट्वीट में वायरल तस्वीर सहित ऐसी ही दो और तस्वीरें मौजूद हैं और इन्हें चेन्नई में हुए नागरिकता कानून के विरोध से जोड़ा गया है. साथ ही, ट्वीट के कैप्शन में तमिल भाषा में कुछ लिखा हुआ है और चेन्नई पुलिस के हैशटैग भी इस्तेमाल किए गए हैं.

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वायरल तस्वीर को 16 फरवरी 2020 को और भी कई लोगों ने  पर  किया था.

दूसरी तस्वीर

खोजने पर हमें 23 अगस्त 2013 को की गई एक फेसबुक पोस्ट मिली जिसमें ये तस्वीर मौजूद थी. तस्वीर को "Nirmalagiri College SFI" नाम के फेसबुक पेज से शेयर किया था. इस नाम से केरल के कन्नूर जिले में एक कॉलेज है. इस फेसबुक पेज पर भी मलयालम भाषा में की गई पोस्ट मौजूद हैं. अगस्त 2013 में केरल के रहने वाले एक अन्य फेसबुक यूजर ने भी किया था.

द्वारा इस दिन पोस्ट की गई 

ये तस्वीर पिछले साल भी नागरिकता कानून के विरोध से जोड़कर भ्रामक दावे के साथ शेयर हुई थी. कुछ मीडिया संस्थाओं ने इसे ख़ारिज करते हुए थी.

यहां इस बात की पुष्टि हो जाती है कि पहली तस्वीर लगभग एक साल पुरानी है और दूसरी तस्वीर सात साल से ज्यादा पुरानी है. पुख्ता तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि तस्वीरें कहां की हैं लेकिन संभवत: ये दक्षिण भारत की हैं. इन तस्वीरों को किसान आंदोलन से जोड़कर भ्रम फैलया जा रहा है.

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