फैक्ट चेक: पाकिस्तान में पुलिस बर्बरता की फोटो कश्मीर के नाम पर वायरल

फेसबुक पर तमाम यूजर कश्मीर पर लिखा गया एक लेख शेयर कर रहे हैं. इस लेख में एक बुजुर्ग व्यक्ति का फोटो लगा है जिसके साथ पुलिस बर्बरता से पेश आती दिख रही है.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
एक लेख में इस्तेमाल फोटो जिससे यह अर्थ निकलता है कि कश्मीर में पुलिस एक बुजुर्ग शख्स के साथ बर्बरता से पेश आ रही है.
सच्चाई
यह फोटो पाकिस्तान के लाहौर की है और पांच साल पुरानी है.

चयन कुंडू

  • नई दिल्ली,
  • 03 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 3:54 AM IST

फेसबुक पर तमाम यूजर कश्मीर पर लिखा गया एक लेख शेयर कर रहे हैं. इस लेख में एक बुजुर्ग व्यक्ति का फोटो लगा है जिसके साथ पुलिस बर्बरता से पेश आती दिख रही है. फोटो में देखा जा सकता है कि बुजुर्ग आदमी खून से लथपथ है और तीन पुलिसकर्मी उसे घसीटते हुए लाठी से पीट रहे हैं.

क्या है दावा

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वेबसाइट “teesrijungnews.com” ने हिंदी में इस लेख को प्रकाशित किया है, जिसका शीर्षक है, “कश्मीर से जारी रिपोर्ट बेहद डरावनी है...वो 13 हजार बच्चे कहां हैं और किस हालत में हैं!” लेख में बुजुर्ग के साथ पुलिस बर्बरता की फोटो को कवर फोटो के रूप में इस्तेमाल किया गया है.

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क्या है सच

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि यह पोस्ट लोगों को गुमराह करने वाली है. वायरल हो रहे लेख में इस्तेमाल की गई फोटो पांच साल पुरानी है और यह कश्मीर की फोटो नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के लाहौर की है.

कई फेसबुक यूजर जैसे , और   ने इस पोस्ट को शेयर किया है.

AFWA की पड़ताल

रिवर्स सर्च की मदद से हमने गूगल खंगाला तो पाया कि वायरल हो रही यह तस्वीर सोशल मीडिया पर कई सालों से मौजूद है.

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पाकिस्तान के लाहौर स्थित मॉडल टाउन में घटी एक घटना को लेकर कई पाकिस्तानी वेबसाइट जैसे , और ने कई बार इस तस्वीर का इस्तेमाल किया है.

यूट्यूब चैनल “Sharifistan Channel” ने 18 सितंबर, 2016 को इस वायरल तस्वीर के अलावा कुछ और तस्वीरें और वीडियो अपलोड किया है और साथ में कैप्शन लिखा है, “17 जून, 2014 को लाहौर के मॉडल टाउन में नरसंहार की घटना #StateTerrorism”.

कई अन्य यूट्यूब चैनल जैसे ने भी 2014 में इसी घटना का वीडियो अपलोड किया है.

2014 में क्या हुआ था

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ने भी लाहौर के मॉडल टाउन में 2014 में घटी इस घटना पर खबर दी थी. 17 जून, 2014 को मॉडल टाउन में पुलिस और पाकिस्तान अवामी तहरीक (PAT) के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी.

इस झड़प के दौरान पाकिस्तान की पुलिस ने न सिर्फ लाठी चार्ज की, बल्कि फायरिंग भी की थी. इस पुलिसिया कार्रवाई में महिलाओं सहित कई लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे. प्रदर्शनकारियों ने उनके नेता के घर से बैरिकेडिंग हटाने का विरोध किया था. जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री के भाई शहबाज शरीफ उस वक्त पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री थे.

निष्कर्ष

शेयर किए जा रहे लेख में पांच महिला सदस्यों की 'फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट' के बारे में बात की गई है. इस टीम ने कश्मीर से 370 हटाने के बाद कश्मीर घाटी का दौरा किया और अपनी रिपोर्ट में कथित मानवाधिकार उल्लंघन पर चिंता जताई है. इस रिपोर्ट के बारे में मुख्यधारा के ने खबर छापी है.

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इन खबरों के मुताबिक, कश्मीर में गिरफ्तारी और हिरासत का जिक्र करते हुए फैक्ट फाइंडिंग टीम की एक सदस्य ने कहा, “हमें प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक कश्मीर में पाबंदी लागू होने के बाद 13,000 लड़कों को हिरासत में लिया गया है.”

हालांकि, वायरल हो रही पोस्ट भ्रामक है क्योंकि लेख में पुलिस बर्बरता की जिस फोटो का इस्तेमाल किया गया है वह कश्मीर की न होकर पाकिस्तान के लाहौर की है और पांच साल पुरानी है.

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