UNSC में वीटो पावर की क्यों छिड़ी है लड़ाई? भारत समेत कौन-कौन से हैं दावेदार? जानें सबकुछ

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की वकालत हो रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के बाद अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कहा कि सुधार की जरूरत को नकारा नहीं जा सकता. भारत अभी सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य है और लंबे समय से स्थायी सदस्यता देने की मांग कर रहा है.

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भारत अभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य है. (फाइल फोटो) भारत अभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य है. (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 11:34 AM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) के बाद अब विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की वकालत की है. जयशंकर ने बुधवार को कहा कि हमने कभी ये नहीं सोचा कि ये आसान प्रक्रिया है, लेकिन हमारा मानना है कि सुधार की जरूरत को हमेशा के लिए नहीं नकारा जा सकता.

कुछ दिन पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए बाइडेन ने भी कहा था कि अब समय आ गया है कि सुरक्षा परिषद में ऐसे सुधार किए जाएं जो आज की जरूरत को बेहतर तरीके से पूरा कर सकें. 

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बाइडेन ने कहा था कि अमेरिका सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी, दोनों सदस्यों को बढ़ाने का समर्थन करता है. इनमें वो देश भी शामिल हैं, जिनकी स्थायी सदस्यता की मांग का समर्थन हम लंबे समय से करते आ रहे हैं.

बुधवार को विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि मेरा मानना है कि राष्ट्रपति (जो बाइडेन) ने कहा, वो सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए अमेरिकी समर्थन को दिखाता है. उन्होंने कहा कि ये किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है, ये हम सभी और संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों पर निर्भर करता है.

पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद है क्या? वीटो पावर को लेकर क्या है लड़ाई? स्थायी सदस्यता के लिए भारत के अलावा और कौन-कौन से दावेदार हैं? जानते हैं...

क्या है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद?

- दूसरे विश्व युद्ध के बाद एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच की जरूरत पड़ी जो सभी देशों को साथ लेकर चल सके. इसलिए 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र का गठन हुआ. इसका हेडक्वार्टर न्यूयॉर्क में है. मौजूदा समय में 193 देश इसके सदस्य हैं.

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- संयुक्त राष्ट्र के 6 प्रमुख अंग- जनरल असेंबली, सिक्योरिटी काउंसिल, इकोनॉमिक एंड सोशल काउंसिल, ट्रस्टीशिप काउंसिल और सेक्रेटेरिएट और इंटरनेशनल कोर्ट है. इंटरनेशनल कोर्ट नीदरलैंड के हेग में स्थित है. बाकी सभी न्यूयॉर्क में है.

- संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के तहत अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी सुरक्षा परिषद यानी सिक्योरिटी काउंसिल पर है. सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं. इनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य हैं.

- स्थायी सदस्यों में अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस हैं. अस्थायी सदस्यों में भारत के अलावा अल्बानिया, ब्राजील, गेबन, घाना, आयरलैंड, केन्या, मैक्सिको, नॉर्वे और यूएई हैं. अस्थायी सदस्य दो साल के लिए क्षेत्रीय आधार पर चुने जाते हैं.

भारत की क्या है मांग?

- भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता देने की मांग करता रहा है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गठन के बाद से अब तक कई बार भारत अस्थायी सदस्य बन चुका है.

- भारत पहली बार 1950-51 में अस्थायी सदस्य बना था. उसके बाद 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में दो साल के लिए सदस्य बना था. अभी भारत की अस्थायी सदस्यता इस साल दिसंबर में खत्म हो रही है.

- सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्यता देने का समर्थन कई देश करते भी हैं, लेकिन अब तक कुछ खास हुआ नहीं है. 

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- हाल ही में महासभा को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत बड़ी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में भारत ने कई गंभीर मुद्दों को सुलझाने के लिए ब्रिज की तरह काम किया है. हमने समुद्री सुरक्षा, शांति स्थापना और आतंकवाद का मुकाबला करने जैसी चिंताओं पर भी ध्यान केंद्रित किया है.

वीटो पावर की क्या है लड़ाई?

- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो पावर सिर्फ पांच स्थायी देशों के पास ही हैं. वीटो पावर स्थायी सदस्यों को सुरक्षा परिषद के किसी भी प्रस्ताव को वीटो (अस्वीकार) करने का अधिकार देता है.

- वीटो पावर को लेकर अक्सर लड़ाई होती रहती है. इसे अलोकतांत्रिक भी माना जाता है, क्योंकि स्थायी सदस्यों के पास बिना किसी शर्त के वीटो पावर है.

- लेकिन यहां सुधार भी नहीं हो सकता. क्योंकि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 108 और 109 के तहत पांच स्थायी सदस्यों को चार्टर में किसी भी संशोधन पर वीटो पावर दिया गया है. अगर वीटो पावर में कोई संशोधन करना भी है तो इन पांचों स्थायी सदस्य देशों की अनुमति लेनी होगी.

- संयुक्त राष्ट्र की स्थापना, शांति और सुरक्षा बनाए रखने में इन पांच सदस्य देशों की भूमिका को अहम माना जाता है, इसलिए इन्हें वीटो पावर दिया गया है. 

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- वीटो पावर के साथ एक चिंता की बात ये भी है कि अगर पांच में से एक सदस्य देश भी इसका इस्तेमाल करता है, तो वो प्रस्ताव खारिज हो जाता है. यही वजह है कि अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग उठ रही है.

भारत के अलावा और कौन-कौन दावेदार?

भारत के अलावा ब्राजील, साउथ अफ्रीका, जापान और जर्मनी भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता पर दावेदारी करते हैं. भारत की मांग का समर्थन चीन को छोड़कर बाकी चारों स्थायी सदस्य करते भी हैं. लेकिन चीन के अड़ंगे की वजह से भारत इसका स्थायी सदस्य नहीं बन पा रहा है.

 

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