ICU बेड के करते रहे मिन्नतें, रेमडेसिविर के लिए भटके, फिर भी नहीं बचे तारक मेहता फेम एक्टर के पापा

यशोदा गांधी ने कहा- 'पिछले साल जब से कोरोना वायरस आया है मेरे पति सारे प्रीकॉश्न्स ले रहे थे. सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेंन करने से लेकर मास्क लगाने तक हर चीज का ध्यान रखा. वो लगातार हाथ सेनिटाइज करते थे. फिर वायरस उनतक पहुंच गया.'

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मां के साथ भव्य गांधी मां के साथ भव्य गांधी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मई 2021,
  • अपडेटेड 7:22 PM IST

तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम एक्टर भव्य गांधी के पापा का कोरोना से मंगलवार को निधन हो गया. अब उनकी मां ने 1 महीने के स्ट्रगल के बारे में बात की है.

स्पॉटबॉय को दिए इंटरव्यू में यशोदा गांधी ने कहा- 'पिछले साल जब से कोरोना वायरस आया है मेरे पति सारे प्रीकॉश्न्स ले रहे थे. सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेंन करने से लेकर मास्क लगाने तक हर चीज का ध्यान रखा. वो लगातार हाथ सेनिटाइज करते थे. फिर वायरस उनतक पहुंच गया. उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें अच्छा फील नहीं हो रहा. उस वक्त उन्हें कोई स‍िंपटम नहीं थे. अगले दिन जब मैं उनके रूम में गई तो देखा कि उन्हें हल्का बुखार है. तो मैंने उन्हें तुरंत दवा दी.'

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'इसके बाद उन्हें चेस्ट में दर्द होने लगा. इसके बाद उन्हें चेस्ट स्कैनिंग के लिए लेकर गए तो 5 प्रतिशत इंफेक्शन था. डॉक्टर ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है उन्हें हम आइसोलेशन में घर पर ही रख सकते हैं. वो दो दिन रहे लेकिन कोई रिलीफ नहीं मिला. दोबारा उनका CT स्कैन हुआ. हमें पता चला कि इंफेक्शन डबल हो गया है. हमने उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करने का निर्णय लिया. लेकिन मुझे कोई हॉस्पिटल नहीं मिल रहा था. जहां भी फोन करो वो बोलते हैं कि बीएमसी में रजिस्टर करो और जब नंबर आएगा तो बुलाएंगे. भव्य के मैनेजर की मदद से दादर में उन्हें एक हॉस्पिटल में ए़डमिट कराया. दो दिन बाद वहां डॉक्टर्स ने कहा कि इन्हें आईसीयू में रखना होगा और वो हमारे पास नहीं है. तो इन्हें प्लीज दूसरे हॉस्पिटल में शिफ्ट कीजिए.'

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आईसीयू बेड्स के लिए किए कम से कम 500 कॉल्स

आईसीयू बेड्स के लिए मैंने कम से कम 500 कॉल्स लगाए. अस्पतालों से लेकर राजनेताओं तक, कार्यकर्ताओं से लेकर एनजीओ तक मेरे परिचितों और परिवार के कुछ सदस्यों के लिए भी, लेकिन मैं उनके लिए आईसीयू बेड नहीं ढूंढ सकी. मैं और मेरा परिवार पूरी तरह से टूट गए थे क्योंकि हम उस समय इतने असहाय महसूस कर रहे थे. लेकिन भगवान की कृपा से मेरे एक दोस्त ने गोरेगांव के एक छोटे से अस्पताल में आईसीयू बेड की व्यवस्था कराई.' 


दुबई से मंगाना पड़ा इंजेक्शन

आगे उन्होंने कहा- 'स्ट्रगल यहीं खत्म नहीं हुआ. मेरे पति के बाद मेरा बड़ा बेटा और बहू भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए. दोनों आइसोलेशन में रहे और उनकी देखभाल के लिए मुझे घर पर रुकना पड़ा. भव्य था जो अकेले सारे इंतजाम करने में लगा था. डॉक्टर ने हमें रेमडेसिविर अरेंज करने के लिए कहा. मैंने 6 इंजेक्शनों के लिए 8 इंजेक्शनों की कीमत चुकाई. उसके बाद उन्होंने मुझे 'टॉक्सिन' इंजेक्शन की व्यवस्था करने के लिए कहा और मुझे यह बताने में बहुत बुरा लगता है कि जो इंजेक्शन हमारे इंडिया में बनती है वो मुझे पूरे इंडिया में नहीं मिली. मुझे ये दुबई से मंगाना पड़ा था और 45 हजार के इंजेक्शन के लिए 1 लाख रुपये का भुगतान करना था. लेकिन वो इंजेक्शन भी उनके काम नहीं आया.'

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'अंत में मुझे उन्हें कोकिलाबेन में शिफ्ट करना पड़ा, लेकिन वे उन्हें लेने के लिए तैयार नहीं थे क्योंकि उन्होंने कहा कि हम BMC पंजीकरण के बिना COVID मामले नहीं ले रहे हैं. इसने मुझे पूरी तरह से तोड़ दिया. उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उन्हें कहीं और ले जाऊं लेकिन मैं उन्हें कहां लेकर जाऊं वो बेहोश थे. मैंने उन्हें उनकी स्थिति दिखा कर जैसे तैसे मना लिया. और इसके बाद उन्होंने आखिरकार मुझे ICU बेड दिया. इसके बाद उन्होंने आखिरी सांस लेने से पहले,15 दिन तक वहां रहे.'

 

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