पद्मावती पर 'बाहुबली' प्रभास को भी लपेटने की थी कोशिश, अंकल ने बचाया

पद्मावती पर 'बाहुबली' प्रभास को भी लपेटने की थी कोशिश, अंकल ने बचाया

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प्रभास और दीपिका पादुकोण प्रभास और दीपिका पादुकोण

हंसा कोरंगा

  • नई दिल्ली,
  • 22 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 10:04 AM IST

पद्मावती को लेकर जारी विवाद राजनीतिक रूप ले चुका है. अलग-अलग पार्टियों के नेताओं ने फिल्म के कंटेंट पर आपत्ति दर्ज कराई है. राजपूत समाज से आने वाले नेताओं ने तो इतिहास के नाम पर बनने वाली फिल्मों में राजपरिवारों के चित्रण को लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की.

विवाद के बीच राजपूत संगठन एक मुहिम भी चला रहे हैं. उनकी कोशिश है कि राजपूत समाज से आने वाले सेलेब्स भी उनके साथ आकर पद्मावती का विरोध करें. खबरों की मानें तो क्षत्रीय समाज से आने वाले 'बाहुबली' फेम प्रभास से भी पद्मावती के विरोध के लिए संपर्क की कोशिश की गई.

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राजपूत संगठनों ने प्रभास की प्रतिक्रिया के लिए उनसे कई बार संपर्क किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑल इंडिया क्षत्रीय महासभा विवाद में प्रभास के विचार जानना चाहती थी. दरअसल, प्रभास खुद भी क्षत्रिय हैं. इसलिए संगठन चाहता था कि साउथ फिल्मों का ये सुपरस्टार अपनी राय जाहिर करते हुए पद्मावती का विरोध करें. हालांकि प्रभास ने इस विवाद से दूरी बनाने का फैसला किया.

दरअसल, इस बारे में प्रभास को उनके चाचा कृष्णम राजू ने सलाह दी है. उन्होंने विवाद पर कुछ भी बोलने से मना किया है. उनका मानना है कि पद्मावती पर प्रभास की किसी भी प्रतिक्रिया से उनके खिलाफ माहौल बन सकता है. इस वजह से उनकी आगामी फिल्म 'साहो' को लेकर मुसीबत हो सकती सकती है.

पद्मावती बनाम राजपूतों के विरोध की इस मुहिम से अब तक कई बड़े नेता जुड़ चुके हैं. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ फिल्म के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि जब तक आपत्तिजनक सीन नहीं हटेंगे यूपी में फिल्म रिलीज नहीं होगी. साथ ही योगी ने भंसाली पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने की आदत हो गई है. जितनी गलती प्रदर्शनकारियों की है, उतनी ही गलती संजय लीला भंसाली की है. प्रदर्शनकारियों के साथ निर्माताओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए.

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राजस्थान, एमपी और पंजाब ने भी आपत्तिजनक सीन हटाए जाने से पहले फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है. हालांकि अभी फिल्म सेंसर से पास नहीं हुई है.

राजनीतिक गलियारों में पूर्व राजपरिवारों से आने वाले जिन नेताओं ने पद्मावती का कड़ा विरोध किया है. उनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे, कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे नेता शामिल हैं.

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