कोलकाता पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर चली सेंसर की कैंची, डायरेक्टर ने उठाए सवाल

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा कि अब कोलकाता पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री पर कैंची चलाने को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड चर्चा के घेरे में आ गया है.

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फिल्म का पोस्टर फिल्म का पोस्टर

खुशदीप सहगल / वन्‍दना यादव

  • नई दिल्ली,
  • 09 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 8:26 PM IST

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा कि अब कोलकाता पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री पर कैंची चलाने को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) चर्चा के घेरे में आ गया है.

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार अनिर्बान दत्ता की डॉक्यूमेंट्री ‘कालीक्षेत्र’ (काली की जमीन) कोलकाता के इतिहास पर आधारित है. CBFC ने डॉक्यूमेंट्री में साम्प्रदायिक दंगों और नक्सली आंदोलन के संदर्भों को लेकर कई कट लगाने के लिए कहा है. CBFC यानि सेंसर बोर्ड के इस कदम पर फिल्मकार अनिर्बान दत्ता ने कड़ी आपत्ति जताई है.

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दत्ता ने कहा, 'CBFC ने फिल्म में 5 कट लगाने के लिए कहा है. बोर्ड ने ‘1946 डायरेक्ट एक्शन डे’ और ‘नक्सली आंदोलन’ के उल्लेख किए जाने पर आपत्ति जताई है. वे सर्टिफिकेट दिए जाने के दिशार्निदेशों का गलत मतलब निकाल रहे हैं. मैं कैसे एक ऐसी ऐतिहासिक राजनीतिक घटना का गैर राजनीतिकरण कर सकता हूं जो पहले से ही दस्तावेज में दर्ज है. अगर ऐसी कोशिश की जाती है तो मूल तत्व (डॉक्यूमेंट्री का) ही खो जाएगा. ये अजीब है.'

दत्ता के मुताबिक सेंसर बोर्ड ने डॉक्यूमेंट्री से सीपीआई (एम) और इंडियन नेशनल कांग्रेस जैसी पार्टियों के उल्लेख भी हटाने के लिए कहा है. CBFC ने भारत सरकार के दिशार्निदेशों का हवाला देते हुए कहा है कि डॉक्यूमेंट्री के कुछ अंश सिनेमाटोग्राफ एक्ट, 1952 के नियम 2 (xiv और xix) का उल्लंघन करते हैं. इस नियम के तहत ऐसे किसी भी दृश्य या शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता जो साम्प्रदायिकता, रूढ़िवादिता, अवैज्ञानिकता या देशविरोधी रुख को बढ़ावा देता हो. या किसी व्यक्ति, व्यक्तियों के समूह की मानहानि करता हो या कोर्ट की अवमानना करता हो.

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दत्ता ने सवाल किया, '1946 की ऐतिहासिक घटना से जुड़े संदर्भ अब कैसे साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ा सकते हैं. ये अच्छी तरह डॉक्यूमेंटेंड किया इतिहास है और इसे दबाया नहीं जा सकता. इसकी जगह इससे हमें सबक लेना चाहिए.' दत्ता ने कहा कि अगर उन्हें अंधेरे कमरे में ही अभिव्यक्ति करनी है तो फिर अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब ही क्या है? दत्ता ने कहा कि आज मुख्यधारा की राजनीतिक भाषा कहीं अधिक साम्प्रदायिक और हिंसक है. CBFC के फैसले का विरोध करते हुए दत्ता ने फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलेट ट्रिब्यूनल में इसे चुनौती देने का फैसला किया है. हैरानी की बात है कि फिल्म को सरकारी स्वामित्तव वाले प्रसारक दूरदर्शन के लिए पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग ट्रस्ट (PSBT) ने कमीशन किया है.

दत्ता ने कहा, 'फिल्मकार के नाते मैं सिर्फ इतिहास के एक हिस्से को बताने की कोशिश कर रहा हूं. मैंने पहले अपनी किसी भी फिल्म के लिए भी, कहीं ज्यादा विवादित विषय उठाने पर भी, इस तरह की स्थिति का सामना नहीं किया.'

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