IIFA अवॉर्ड्स पर भड़का कन्नड़ डायरेक्टर- मैं 3 बजे सुबह तक बैठा हुआ था, मेरा नाम तक नहीं ल‍िया...

हेमंत इस बात से खफा नजर आए कि किसी अवॉर्ड का विनर न होने के बावजूद उन्हें इवेंट में बहुत देर तक बैठना पड़ा. उन्होंने इस बात की भी शिकायत की कि इस अवॉर्ड सेरेमनी में इस बार नॉमिनीज के नाम भी नहीं लिए गए और सिर्फ विनर्स को अवॉर्ड दे दिए गए.

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हेमंत एम राव हेमंत एम राव

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 30 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:40 PM IST

हाल ही में हुए IIFA अवॉर्ड्स काफी चर्चा में रहे मगर कन्नड़ फिल्मों के जानेमाने डायरेक्टर हेमंत एम. राव इस अवॉर्ड फंक्शन से नाराज हो गए हैं. हेमंत ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में IIFA अवॉर्ड्स के ऑर्गनाइजर्स को काफी खरी-खोटी सुनाई है. 

हाल ही में काफी चर्चा बटोरने वालीं कन्नड़ फिल्मों 'सप्त सागरदाचे एलो' (साइड ए और साइड बी) के डायरेक्टर हेमंत इस बात से खफा नजर आए कि उन्हें इवेंट में बहुत देर तक बैठना पड़ा. उन्होंने इस बात की भी शिकायत की कि इस अवॉर्ड सेरेमनी में इस बार नॉमिनीज के नाम भी नहीं लिए गए और सिर्फ विनर्स को अवॉर्ड दे दिए गए. 

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IIFA पर बरसे हेमंत 
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए हेमंत ने लिखा, 'ये पूरा IIFA एक्सपीरियंस बहुत असुविधानजनक और असम्मान भरा रहा. मैं इस बिजनेस में एक दशक से हूं और ये अवॉर्ड शो पर मेरा पहला मौका नहीं था. ये हमेशा से होता रहा है कि इवेंट के लिए विनर्स को आखिरी मोमेंट तक बुलाए जाते हैं और उन्हें होस्ट किया जाता है. कॉन्टेक्स्ट के लिए बता दूं, मैं 3 बजे सुबह तक बैठा हुआ था और अंत में पता चला कि मेरा कोई अवॉर्ड ही नहीं है. मेरे म्यूजिक डायरेक्टर चरण राज के साथ भी यही हुआ.'

हेमंत ने कहा कि उन्हें अवॉर्ड न मिलने का दुख नहीं है, बल्कि जीतने वालों के अलावा, कैटेगरी में शामिल बाकी नॉमिनीज का नाम तक नहीं लिया गया और सीधा जीतने वालों को उनके अवॉर्ड थमा दिए गए. उन्होंने आगे लिखा, 'ये आपका अवॉर्ड है. आप जिसे चाहे उसे दे सकते हैं. ये आपकी चॉइस है! मैंने बहुत अवॉर्ड नहीं जीते हैं और न उन्हें गंवाने पर मेरी नींद खराब होती है, तो मेरे लिए अंगूर खट्टे नहीं हैं. अगर बाकी सभी नॉमिनी बुलाए गए होते और उसमें से एक विनर बनता, तो मैं परेशान होने की मेहनत नहीं करता. और इस साल फॉर्मेट ये था कि बस जीतने वालों को अवॉर्ड पकड़ा दिए गए. नॉमिनीज का जिक्र भी नहीं किया गया.' 

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'मुझे आपके अवॉर्ड की जरूरत नहीं'
उन्होंने आगे लिखा कि अवॉर्ड शोज को फिल्म टैलेंट की जरूरत रहती है, फिल्ममेकर्स को अवॉर्ड शोज की नहीं. हेमंत ने कहा, 'शायद आपको और आपकी टीम को काफी दिन से ये एहसास नहीं हुआ कि आपके अवॉर्ड शोज उस टैलेंट पर चलते हैं जिन्हें आप स्टेज पर बुलाते हैं. इसका उल्टा नहीं होता. दुनिया का बेस्ट जॉब एन्जॉय करने के लिए मुझे आपके अवॉर्ड की जरूरत नहीं है. अगली बार जब आपको अपने स्टेज पर मेरी जरूरत पड़ेगी... और यकीन मानिए, आपको जरूरत पड़ेगी, तब अपना अवॉर्ड लेना और उस जगह रख लेना जहां सूरज की रौशनी भी नहीं पहुंचती!' 

हालांकि, हेमंत ने इतनी देर तक बैठे रहने का एक पॉजिटिव पॉइंट भी खोज लिया. 'हर जगह कुछ न कुछ अच्छी चीज तो होती ही है. मेरे कई टीम मेंबर्स का स्टेज पर जाना और कई अवॉर्ड्स लेना, मेरे लिए वो चीज रही. वक्त पूरी तरह तो बर्बाद नहीं ही हुआ. चियर्स' हेमंत ने अपनी पोस्ट में लिखा. 

बता दें, हेमंत नेशनल अवॉर्ड भी जीत चुके हैं. वो आयुष्मान खुराना की फिल्म 'अंधाधुन' (2018) में, डायरेक्टर श्रीराम राघवन के साथ स्क्रिप्ट के को-राइटर थे. दोनों को बेस्ट एडाप्टेड स्क्रीनप्ले की कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड मिला था. 

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