आने वाला शुक्रवार एक ऐसी हॉलीवुड फिल्म लेकर आ रहा है, जिसे इस साल की सबसे 'धमाकेदार' फिल्म माना जा रहा है. इसकी स्टारकास्ट या बहुत ग्रैंड बजट की वजह से नहीं— बल्कि इसके टॉपिक की वजह से. ये फिल्म है महान डायरेक्टर स्टीवन स्पीलबर्ग की डिस्क्लोज़र डे (Disclosure Day) और इसका टॉपिक है धरती पर मौजूद एलियन लाइफ.
हाल ही में अमेरिका की ट्रंप सरकार ने UFO (Unidentified Flying Objects) से जुड़ी सीक्रेट जानकारियां पब्लिक करनी शुरू की हैं. दिलचस्प ये है कि सरकार ने UFOs को लेकर जनता के सामने पारदर्शी होने के ये कदम भी डिस्क्लोज़र डे की डिटेल्स सामने आने के बाद उठाए हैं. ऐसे में कई एक्सपर्ट्स को लगता है कि एलियंस पर सबसे शुरुआती, काफी भरोसेमंद और पॉपुलर फिल्में बनाने वाले स्पीलबर्ग के हाथ कुछ क्रांतिकारी जानकारियां लगी हैं, जो इस फिल्म में दिखाई गई हैं. दुनिया भर के सिनेमा लवर्स ही नहीं, UFO और एलियन लाइफ में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति की नजर इस वक्त डिस्क्लोज़र डे पर टिकी है. चलिए बताते हैं कि पूरा मैटर क्या है...
साल 1977 में स्टीवन स्पीलबर्ग ने क्लोज एनकाउंटर ऑफ द थर्ड काइंड (Close Encounter Of The Third Kind) बनाई थी, जिसने एलियन-लाइफ से जुड़ी मॉडर्न फिल्मों की नींव रखी. इस लैंडमार्क फिल्म ने पहली बार एलियंस को हमारी ही तरह किसी दूसरे ग्रह के जीवों की नजर से देखा, जो धरती पर जीवन को लेकर चकित हैं. इस फिल्म ने पहली बार एलियंस को हमारी कहानी का विलेन नहीं बनाया था और न ही ये कोई सस्ती-मस्ती करने वाला बी-ग्रेड फैंटेसी ड्रामा थी.
स्पीलबर्ग ने ‘क्लोज एनकाउंटर्स' को वैज्ञानिक वजन देने के लिए मशहूर खगोलशास्त्री और प्रोफेसर जॉन एलेन हाईनेक को अपनी फिल्म पर कंसल्टेंट रखा था. अब ट्विस्ट देखिए— डोनाल्ड ट्रंप के आने से पहले अमेरिका ने एलियंस के होने या UFO से कॉन्टैक्ट की बात कभी ऑफिशियली स्वीकार नहीं की थी, लेकिन यूएस एयरफोर्स UFO की स्टडी और एलियन लाइफ की संभावनाओं को लेकर तीन बड़े सीक्रेट प्रोजेक्ट चला रही थी. और इन तीनों प्रोजेक्ट्स में एडवाइजर कौन थे? जोसेफ एलेन हाईनेक— यानी स्पीलबर्ग के वही कंसल्टेंट!
इसके बाद 1982 में स्पीलबर्ग ने ई. टी. द एक्स्ट्रा-टेरेस्ट्रियल (E.T. The Extra-Terrestrial) बनाई, जो एलियंस को इंसानों के और करीब ले आई. इस फिल्म ने एलियन को एक इंसानी परिवार का सदस्य बना दिया, जिसका एलियन बच्चों जैसा मासूम था. स्पीलबर्ग का नया एलियन कोई सुपरपावर्स या विज्ञान का खौफनाक करिश्मा दिखाने वाला जीव नहीं था, बल्कि वो एक इंसान के बच्चे जितना वल्नरेबल और मासूम प्राणी था.
इसके बाद स्पीलबर्ग ने खुद एलियंस पर कोई कहानी डायरेक्ट नहीं की, लेकिन बतौर एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर वो मेन इन ब्लैक और ट्रांसफॉर्मर्स जैसी फ्रेंचाइजी लेकर आए, जो अलग-अलग एंगल से एलियंस और इंसान के रिश्तों को एक्सप्लोर करती हैं. अब दशकों बाद स्पीलबर्ग डिस्क्लोज़र डे में अपनी लिखी एलियंस की कहानी खुद डायरेक्ट कर रहे हैं. उनकी पहली दो एलियन-लाइफ स्टोरीज को ये फिल्म एक लेवल और आगे ले जाती है, जिसका प्लॉट है— एलियंस पिछले 79 सालों से इंसानों के बीच, धरती पर ही हैं और सरकारें उनकी सच्चाई जनता से छुपा रही हैं.
स्पीलबर्ग फिर से एलियन-लाइफ की कहानी पर काम कर रहे हैं, ये खुलासा पहली बार 2024 में हुआ था. लेकिन इसकी कहानी उन्होंने 2023 में ही लिखनी शुरू कर दी थी. साथ में उन्होंने अपने सबसे भरोसेमंद स्क्रिप्ट-राइटर डेविड कोएप को साथ में काम पर लगा लिया था. यही कहानी अब डिस्क्लोज़र डे बनकर तैयार हुई है. इधर लोग स्पीलबर्ग की फिल्म पर नजरें पैनी करने लगे और उधर अमेरिका में UFOs और एलियन लाइफ की सच्चाई को लेकर अचानक गहमागहमी तेज हो गई.
हवा में नजर आने वाली अज्ञात उड़ने वाली वस्तुओं को कभी इंसानों ने UFO नाम दिया था, लेकिन पिछले कुछ सालों में इसकी जगह एक नई टर्म ज्यादा इस्तेमाल में आई है— UAP. एलियन लाइफ को सिर्फ 'उड़नतश्तरियों' की पहचान देने की बजाय उन्हें 'इंसान से अपरिचित जीवन या उड़ने वाली चीज' मानने पर जोर दिया गया. इसलिए नई टर्म आई UAP यानी Unidentified Anomalous (or Aerial) Phenomena.
साल 2023 में अमेरिकी संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एक कमिटी ने ऐतिहासिक संसदीय सुनवाई की. इसमें मिलिट्री के बड़े अधिकारियों ने पहली बार ऑफिशियली स्वीकार किया कि अमेरिकी सरकार UFO और उनसे जुड़ी अज्ञात तकनीकों पर सीक्रेट प्रोग्राम चलाती रही है, जिसकी डिटेल्स जनता से छुपाई गई हैं. इसके बाद सांसदों ने 'UAP डिस्क्लोज़र एक्ट' पेश किया. नेशनल आर्काइव्स को UAP और दूसरी एलियन तकनीकों के सारे डॉक्यूमेंट्स जुटाकर सार्वजनिक करने का आदेश दिया गया.
मई 2024 में एक नया कानून, 'UAP ट्रांसपेरेंसी एक्ट' आया, जिसने अमेरिका के राष्ट्रपति के लिए 270 दिनों के अंदर UAP से जुड़ी सारी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया. नवंबर 2024 में अमेरिकी संसद की उसी कमिटी ने UAP पर एक और बड़ी सुनवाई की, जिसे 'सच का खुलासा' (UAP: Exposing The Truth) कहा गया. इसमें बताया गया कि कैसे इंटेलिजेंस अधिकारियों ने जनता के चुने प्रतिनिधियों से UAP डेटा छुपाया था. अभी हाल ही में यूएस के डिपार्टमेंट ऑफ वॉर ने एक नई वेबसाइट बनाकर UAP की जो जानकारी पब्लिक करनी शुरू की है, वो इसी कड़ी का फाइनल स्टेप है.
अमेरिकी संसद में UAP खुलासों को लेकर बने इस माहौल का असर ये हुआ है कि पिछले एक-डेढ़ साल में इस टॉपिक पर दुनिया भर में बहुत सारी स्टडी और चर्चाएं शुरू हो गई हैं. हाल ही में मेक्सिको के एक किसान ने अपने फार्म के पास UAP एक्टिविटी का सनसनीखेज वीडियो शेयर किया था. दुनिया भर में लोग ऐसी एक्टिविटीज और अपने अजीबो-गरीब अनुभवों के बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं.
जो लोग इन बातों को कभी बकवास मानकर नकारते आए थे, वो अब इस पर सीरियस जानकारी और अपडेट की तलाश में हैं. इस बीच दिसंबर 2025 से पोस्टर्स, टीजर और कई ट्रेलर्स के साथ स्पीलबर्ग डिस्क्लोज़र डे का भारी प्रमोशन शुरू कर चुके थे. ये नई फिल्म उनकी पिछली कल्ट फिल्मों क्लोज एनकाउन्टर और ई टी से भी ज्यादा बड़ा पॉप कल्चर असर पैदा कर सकती है. इसलिए केवल चर्चाओं से ऊपर उठकर यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर सकती है.
एलियंस पर सबसे बड़े खुलासे का दावा करने वाली फिल्म का आना और उसी के साथ-साथ रियल लाइफ में इस मुद्दे का गर्माना, लोगों को महज एक संयोग नहीं लग रहा है. इसलिए कुछ लोग डिस्क्लोज़र डे को अमेरिका का सरकारी प्रोपेगैंडा भी बोल रहे हैं.
स्टीवन स्पीलबर्ग पहले भी एलियंस पर ऐसी फिल्में बना चुके हैं कि जनता एलियंस से घबराने की बजाय, उनसे दोस्ती की संभावनाओं को स्वीकार करने लगी. एक बड़ी कॉन्सपिरेसी थ्योरी ये है कि एलियंस का सच और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का उनसे कॉन्टैक्ट बहुत पुराना है. लेकिन ये जानकारी अगर एकदम से बाहर आती, तो दुनिया में भारी डर और पैनिक फैल सकता था. इसलिए अमेरिका का डिफेंस डिपार्टमेंट 'पेंटागन', स्पीलबर्ग के साथ मिलकर जनता को धीरे-धीरे एलियंस के प्रति मानसिक रूप से तैयार करने के लिए फिल्में बनाता रहा है. इसे सिनेमाई दुनिया में ‘सॉफ्ट डिस्क्लोजर’ (Soft Disclosure) थ्योरी कहा जाता है, और डिस्क्लोज़र डे को इसी प्रोसेस का क्लाइमेक्स माना जा रहा है.
अपने प्रमोशनल इंटरव्यूज में स्पीलबर्ग लगातार बोल रहे हैं कि उन्हें धरती पर एलियन-लाइफ के होने या उनके लगातार संपर्क में होने पर पूरा यकीन है. अपनी फिल्म को वो बार-बार 'फिक्शन' बोल तो रहे हैं, मगर ऐसा कहते हुए उनके चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान दिखती है. इन सब चीजों ने मिलकर डिस्क्लोज़र डे को एक ऐसी फिल्म बना दिया है, जो बड़ा धमाका कर सकती है. इंटरनेशनल सिनेमा लवर्स से लेकर देसी इंडियन ऑडियंस तक इस फिल्म के लिए क्रेजी है. अब देखना है कि 12 जून को इंडिया और ग्लोबल थिएटर्स में क्या कमाल होता है.
सुबोध मिश्रा