मुंबई छोड़ मशहूर डायरेक्टर ने पत्नी-बच्चों संग साउथ में बसाई अलग दुनिया, हाथी-तेंदुए संग काट रहा जिंदगी!

'कयामत से कयामत तक' और 'जो जीता वही सिकंदर' जैसी हिट फिल्में बनाने वाले मंसूर खान पिछले 25 साल से निर्देशन से दूर हैं. अब वो तमिलनाडु के कूनूर में अपने फार्महाउस पर रहते हैं, जहां हाथी और तेंदुए भी अक्सर नजर आते हैं.

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मंंसूर खान ने छोड़ी मुंबई (Photo: Instagram @zaynmarie) मंंसूर खान ने छोड़ी मुंबई (Photo: Instagram @zaynmarie)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:05 PM IST

बॉलीवुड को 'कयामत से कयामत तक', 'जो जीता वही सिकंदर', 'अकेले हम अकेले तुम' और 'जोश' जैसी यादगार फिल्में देने वाले फिल्म मेकर मंसूर खान पिछले 25 सालों से फिल्मों के डायरेक्शन से दूर हैं. हालांकि उन्होंने बहुत कम फिल्में बनाई हैं, लेकिन हिंदी सिनेमा पर उनका प्रभाव आज भी कायम है.

मशहूर फिल्ममेकर नासिर हुसैन के बेटे भाई मंसूर खान ने साल 1988 में 'कयामत से कयामत तक' से डायरेक्शन की दुनिया में कदम रखा था. इस फिल्म में उनके चचेरे भाई आमिर खान और जूही चावला मुख्य भूमिकाओं में थे. फिल्म सुपरहिट साबित हुई और मंसूर रातोरात फेमस हो गए.

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इसके बाद उन्होंने आमिर खान के साथ 'जो जीता वही सिकंदर' (1992) और 'अकेले हम अकेले तुम' (1995) बनाई. फिर साल 2000 में उन्होंने शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय स्टारर 'जोश' का डायरेक्शन किया. यही उनकी आखिरी फिल्म रही.

मुंबई से दूर साउथ में बनाया आलीशान फार्म हाउस

हालांकि उनकी लगभग सभी फिल्में सफल रहीं और आज भी दर्शकों के बीच पसंद की जाती हैं, लेकिन मंसूर खान अब फिल्मों की दुनिया से लगभग पूरी तरह दूरी बना चुके हैं. वो इन दिनों तमिलनाडु के खूबसूरत हिल स्टेशन कूनूर में अपने फार्महाउस पर रहते हैं.

हाल ही में वरायटी से बातचीत में मंसूर खान ने बताया कि वो हमेशा से एक आजाद और बेफिक्र जिंदगी जीना चाहते थे. उन्होंने कहा- मैं हमेशा एक घुमक्कड़ इंसान बनना चाहता था. शायद यही वजह है कि मेरी फिल्मों के हीरो भी वैसे ही होते थे.

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उन्होंने बताया कि मुंबई छोड़ने का विचार उनके मन में उस समय से था, जब वो अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में पढ़ाई कर रहे थे. मंसूर ने कहा- 1991 में हमने महाराष्ट्र के मांडवा में जमीन खरीदी थी क्योंकि मैं पहले से तय कर चुका था कि एक दिन फिल्मों को छोड़ दूंगा. मुझे वहां रहना बहुत पसंद था. लेकिन 1997 में सरकार ने उस जमीन को वहां बनने वाले इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित कर लिया. इसके बाद मांडवा में रहने का सपना पूरा नहीं हो सका और मैं 2003 में कूनूर आ गया.

जानवरों के बीच शांति वाली जिंदगी

मंसूर खान ने अपने फार्महाउस के बारे में भी दिलचस्प बातें साझा कीं. उन्होंने बताया कि उनके यहां कई तरह के जानवर आते-जाते रहते हैं. उन्होंने कहा- यहां काफी जीव-जंतु हैं. हाथी और तेंदुए अक्सर हमारे इलाके में आते हैं. इसके अलावा बतख, मुर्गियां और हंस भी हैं. सभी एक-दूसरे के साथ शांतिपूर्वक रहते हैं. हाथी मैदानों की ओर चले जाते हैं और फिर वापस लौट आते हैं.

तेंदुए के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा- असल में तेंदुआ काफी शर्मीला जानवर होता है. कई मामलों में हाथी उससे ज्यादा खतरनाक है. हमारे मेहमानों ने कई बार रात में तेंदुए को पानी के बर्तनों से पानी पीते हुए देखा है.

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पत्नी को भी कूनूर से है खास लगाव

मंसूर ने बताया कि उनकी पत्नी टीना खान को कूनूर उनसे भी ज्यादा पसंद है. उन्होंने खुलासा किया कि एक समय आर्थिक परेशानियां आने पर भी उनकी पत्नी मुंबई वापस जाने के लिए तैयार नहीं हुईं. मंसूर और टीना के दो बच्चे हैं. उनकी बेटी जैन मैरी खान भी एक्टिंग की दुनिया से जुड़ी हुई हैं.

वर्क फ्रंट की बात करें तो मंसूर खान ने हाल ही में आमिर खान के साथ मिलकर साई पल्लवी और जुनैद खान की फिल्म 'एक दिन' को प्रोड्यूस किया था. हालांकि ये रोमांटिक ड्रामा बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी.

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