'आदमी चू$%# है' गाने की कहानी जो शेरदिल की रिलीज से सालों पहले हिट हो गया था

सोशल मीडिया पर आपने गाहे-बगाहे रील्स में 'आदमी चू$%# है' सॉन्ग तो सुना ही होगा. पिछले दिनों यह गाना पंकज त्रिपाठी स्टारर फिल्म शेरदिल द पीलीभीत सागा में भी दिखा. कई लोगों ने यह गाना सुनने के बाद गूगल पर इसके सिंगर और राइटर को भी सर्च किया.

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राहगीर राहगीर

नेहा वर्मा

  • मुंबई,
  • 30 जून 2022,
  • अपडेटेड 11:35 AM IST
  • सॉन्ग के राइटर राहगीर बता रहे हैं, सॉन्ग के पीछे की स्टोरी
  • सोशल मीडिया पर वायरल था यह सॉन्ग

रातो-रात अपनी अनोखी लिरिक्स की वजह से वायरल हुए इस सॉन्ग 'आदमी चू$%# है' के गायक और राइटर कौन हैं और आखिर इस गाने को लिखने के पीछे की उनकी मंशा क्या थी. खुद बताया इस सॉन्ग के कर्ता-धर्ता 'राहगीर' ने. अपने पेन नाम 'राहगीर' से फेमस इस सिंगर का असली नाम है सुनील कुमार गुर्जर. 

राहगीर बताते हैं कि मुझे मेल पर फिल्म के डायरेक्टर सृजित मुखर्जी ने अप्रोच किया था. उन्होंने अपना नंबर लिखते हुए कहा कि तुम्हारे एक गाने को लेकर बातचीत करनी है, बताओ कैसे कनेक्ट किया जाए. मैंने उन्हें फौरन कॉल किया और उन्होंने बताया कि मेरा गाना 'आदमी चू$%# है' उनकी फिल्म की थीम पर फिट बैठ रहा है. बात यहां से आगे बढ़ी. मैं राजस्थान से मुंबई पहुंचा और मेरे गाने को रिकॉर्ड किया गया. इस मौके पर पंकज त्रिपाठी भी पहुंचे थे. वहां उनसे मुलाकात हुई और काफी देर तक हमारी बात भी हुई.

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राहगीर ने इस गाने को दो बार रिकॉर्ड किया. एक बार पूरा हुबहू गाया और दूसरी बार आपत्तिजनक शब्द को भूतिया से रिप्लेस कर दिया. इसके पीछे डायरेक्टर की मंशा थी कि जहां वो मूल शब्द का इस्तेमाल सेंसर की वजह से नहीं कर सकते, वहां भूतिया ही रखेंगे. वहीं ओटीटी पर जब फिल्म आएगी, तो वहां उसे ओरिजनल गाने की तरह ही लिया जाएगा. 

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अपने गाने के बारे में राहगीर कहते हैं, इस गाने को मैंने 2018 में रिकॉर्ड किया था. डर था कि कहीं लोग इसके लिए गालियां न देने लगें. चार-पांच महीने तक तो इसे ऐसे ही रखा. फिर सोचा, जो होगा, देखा जाएगा. यह गाना सालभर तक ऐसे ही पड़ा रहा, तीन से चार हजार व्यूज ही रहे होंगे. उसके बाद रील्स में अचानक से पॉपुलर हो गया. रिलीज के एक साल बाद इस गाने का व्यू 63 लाख पहुंच गया. 

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गाने के आइडिया पर राहगीर बताते हैं कि मैं पेशे से इंजीनियर हूं. पुणे में 9 to 5 जॉब करता था. एक दिन वैलेंटाइनंस डे के मौके पर रास्ते से गुजर रहा था. रोड किनारे जो ठेले लगते हैं, वहां गुलदस्ते मिल रहे थे. कोई एक लड़का वहां आता है, और दुकानदार से कहता है कि भाई ताजे-ताजे फूलों वाला दो. उसी वक्त मेरे दिमाग में यह लाइन क्लिक किया कि यार कैसा बंदा है, फूलों की लाशों में ताजगी चाह रहा है. उसी वक्त मैंने इस सिचुएशन पर शेर लिखा था. फिर वक्त निकालकर उसे पूरा किया, तब जाकर नेचर को डेडिकेट करते हुए मैंने इस गाने को लिखा और गाया.

अपनी जर्नी के बारे में राहगीर बताते हैं कि 2016 में मैंने इंजीनियरिंग से ब्रेक लिया और वापस घर आ गया. बहुत बेचैन था क्योंकि कहीं मन ही नहीं लगता था. मैं फिर रोड ट्रिप पर निकल गया. मेरे साथ बैकपैक और बस मेरा गिटार था. मैंने सड़कों पर ट्रक, ऑटो से लिफ्ट मांगी बदले में उनको गाना सुनाया. वो कहते हैं कि मैं हर दिन नई जगहों पर होता था. गांवों, स्कूलों में पहुंचकर लोगों के बीच गाना गाता था. उनसे रिक्वेस्ट करता था कि मेरा गाना सुनें और बदले में मैं कुछ नहीं लूंगा. इस तरह से मैंने लगभग तीन साल गुजारे हैं. मुझे लगा कि शायद यही जिंदगी है, रोजाना नए किस्से, नई मुलाकातें, नया शहर, इन सब एक्स्पीरियंस ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है.

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