दिलजीत दोसांझ इस समय अपनी फिल्म सतलुज के कारण विवाद में फंस चुके हैं. इस फिल्म को 5 जुलाई के दिन जी5 से अचानक हटाया गया था. 3 जुलाई को इसे ओटीटी पर चुपचाप रिलीज किया गया. बिना सेंसर बोर्ड से पास हुए ये फिल्म जब कई लोगों ने देखी, तो हर कोई इसमें दिखाई कहानी से हैरान रह गया. जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी पर बेस्ड इस फिल्म को इंडिया में इसलिए रोक दिया क्योंकि सरकार का मानना था कि इस फिल्म के कुछ हिस्से इंडिया के खिलाफ इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
पाकिस्तान देखेगा 'सतलुज'
फिल्म सतलुज अब ओटीटी पर तो मौजूद नहीं है, मगर कई लोग इसे प्राइरेसी के जरिए देख रहे हैं. इस कड़ी में पाकिस्तान भी जुड़ने की कोशिश कर रहा है. वहां के न्यूज चैनल्स पर फिल्म को लेकर चर्चा हो रही है. एक पाकिस्तानी पत्रकार ने X पर लिखा है कि आखिर क्यों फिल्म सतलुज उनके मुल्क में देखी जानी चाहिए, खासतौर से पंजाब (पाकिस्तान) में. सोशल मीडिया पर तो पाकिस्तान के एक नेता फवाद चौधरी ने पूछा है कि वो दिलजीत की विवादित फिल्म कहां देख सकते हैं.
द प्रिंट की रिपोर्ट अनुसार, पाकिस्तानी जर्नलिस्ट फैजल हुसैन का कहना है- मेरे मुताबिक, फिल्म सतलुज को पाकिस्तानी सरकार को हर सिनेमाघर में दिखाने की इजाजत देनी चाहिए. ये फिल्म भारत सरकार की कथित बर्बरता को दिखाती है, दिलजीत दोसांझ और पूरी टीम की एक बेहतरीन कलात्मक कोशिश है. मेरी पाकिस्तान सरकार और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से विनती है कि इसे रिलीज की अनुमति दी जाए.
नेता ने पूछा सवाल, हुआ ट्रोल
पाकिस्तानी नेता फवाद चौधरी, जो पंजाब के पूर्व सूचना मंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी के लीडर हैं, उन्होंने दरअसल इस पूरी चर्चा की शुरुआत की. रिपोर्ट में आगे लिखा गया है कि पाकिस्तान की जनता को फिल्म सतलुज, पाकिस्तान के किसी प्रोडक्शन हाउस से बनी पिक्चर लगती है, जिसे इस्लामाबाद में बैन किया गया. फिर नेता से सवाल किया कि उन्होंने से क्यों बैन किया है.
कई लोगों ने इस फिल्म की तुलना सिखों के साथ हुए अत्याचारों और पाकिस्तानी आर्मी जनरल आसिम मुनीर के शासनकाल में पाकिस्तान द्वारा लगाए गए जबरन गायब किए जाने के आरोपों से की. आगे नेता फवाद चौधरी ने एक दूसरी पोस्ट भी की, जिसमें उन्होंने फिल्म सतलुज के बैन में 'मोदी जनता' शब्द का जिक्र किया. हालांकि वहीं के कुछ लोग उनकी इस बात से सहमत नहीं दिखे, उल्टा उन्हें ही सेंसरशिप का पाठ पढ़ाने लगे.
मगर फवाद चौधरी इसके बाद भी पीछे नहीं हटे. उन्होंने फिल्म सतलुज देख तो ली, फिर अपने सुझाव भी देते नजर आए. वो चाह रहे हैं कि पंजाब की मौजूदा सूचना एवं प्रसारण मंत्री उजमा बुखारी इसे विशेष रूप से पाकिस्तान के क्राइम कंट्रोल विभाग के लिए प्रीमियर करें. उनका मानना है कि शायद उन्हें ये समझ आ जाए कि लोगों की हत्या करना कितनी बड़ी त्रासदी होती है.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क