बॉबी देओल स्टारर फिल्म 'बंदर' अपने विषय के कारण सुर्खियों में है. फिल्म एक गुम होते सितारे की कहानी दिखाई गई है, जिसकी जिंदगी सेक्शुअल हैरेसमेंट के आरोपों के बाद पूरी तरह उलट-पुलट हो जाती है. कई लोगों ने फिल्म के विषय को गलत तरीके से समझा है, जिसके कारण फिल्म को सोशल मीडिया पर भारी बैकलैश का सामना करना पड़ा है. लेकिन क्या बॉबी देओल की ये फिल्म वाकई महिलाओं के खिलाफ है? क्या इसका मी टू मूवमेंट से कोई संबंध है? इस बारे में आइए बात करते हैं.
क्या है बंदर की कहानी?
फिल्म 'बंदर' की कहानी एक अहंकारी, खराब और उम्रदराज स्टार समर (बॉबी देओल) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी उसकी एक्स गर्लफ्रेंड गायत्री (सपना पब्बी) के लगाए गए झूठे सेक्शुअल हैरेसमेंट के आरोपों के बाद बदल जाती है. कहानी की शुरुआत तब होती है जब गायत्री, समर की जिंदगी में वापस आना चाहती है. समर, गायत्री के साथ नहीं रहना चाहता. उससे संपर्क करने से बचता है और उसे हर जगह से ब्लॉक कर देता है. अपने अतीत से क्लोजर चाहती गायत्री, गुस्सा होकर उस पर यौन छेड़छाड़ और बलात्कार का केस दर्ज करा देती है. इसके कारण उसकी तुरंत गिरफ्तारी हो जाती है. फिर उसकी बेगुनाही साबित करने की लड़ाई शुरू होती है.
'बंदर' की कहानी एक निर्दोष एक्टर पर लगाए गए झूठे केस की पड़ताल करती है, जबकि मी टू मूवमेंट पीड़ितों को आवाज देने के बारे में है. इसलिए इस फिल्म का मी टू मूवमेंट से कोई नाता नहीं है. फिल्म के डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने भी इन दावों पर अपना रिएक्शन दिया है. स्क्रीन के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'मी टू पावर के बारे में है, कोई अपनी पावर का इस्तेमाल करके कुछ करता है. इस फिल्म का उस तरह की पावर प्ले या सेक्शुअल एंगल से कोई लेना-देना नहीं है, इसलिए इसका मी टू से कोई संबंध नहीं है.'
टाइम्स नाउ के न्यूजअवर एट 9 में फिल्म के प्रोड्यूसर निखिल द्विवेदी ने भी इस मुद्दे पर बात की थी. उन्होंने कहा, 'हमारी फिल्म महिलाओं के खिलाफ नहीं है. ट्विशा के साथ जो कुछ हो रहा है, हम भी उसे देख रहे हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. इसे जांच की जरूरत है. अगर इसमें कोई अपराध हुआ है तो दोषियों को सजा मिलनी चाहिए. यह एंटी-वुमेन फिल्म नहीं है, बल्कि प्रो-जस्टिस फिल्म है. हमें समझना होगा कि कोई ये नहीं कह रहा कि अगर महिलाओं के साथ गलत हुआ है तो उन पर विश्वास मत करो.'
क्या है मी टू?
मी टू मूवमेंट की बात करें तो ये यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के खिलाफ एक सामाजिक आंदोलन है. 2017 में दुनियाभर का ध्यान इसकी ओर तब आकर्षित हुआ था जब कई महिलाओं ने #MeToo हैशटैग के जरिए अपने साथ हुए दुर्व्यवहार और हैरेसमेंट की कहानियां शेयर कीं. इसमें एंटरटेनमेंट, मीडिया, राजनीति और बिजनेस जैसी इंडस्ट्री में शक्तिशाली लोगों की हरकतों को उजागर किया गया था.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क