बॉलीवुड एक्ट्रेस अमीषा पटेल अक्सर हर बड़े मुद्दे पर अपना पक्ष रखती नजर आती हैं. कुछ दिन पहले उनकी सुपरहिट फिल्म गदर एक प्रेम कहानी ने अपने 25 साल पूरे किए थे. सकीना बेगम के रोल में उन्हें दर्शकों का प्यार मिला. मगर अपने से 19 साल बड़े सनी देओल संग रोमांस करने पर उन्हें थोड़ी ट्रोलिंग भी सहनी पड़ी.
ऐज-गैप पर अमीषा की राय
हाल ही में अमीषा ने इंडिया टुडे/आजतक से बातचीत के दौरान इंडस्ट्री के सबसे चर्चित ऐज-गैप वाले मुद्दे पर अपनी बात रखी. उन्होंने ये सारी बातें अपनी फिल्म गदर के 25 साल पूरे होने के मौके पर की. अमीषा पटेल ने कहा- मैं आज भी मानती हूं कि जब कहानी में उम्र का फर्क जरूरी ना हो, तो बॉलीवुड को इस पर खुलकर और सच्चाई से बात करनी चाहिए.
'मेरे अंदर भी एक डर था. मैं सोचती थी कि क्या उम्र के हिसाब से ये जोड़ी ठीक है या फिर ये फेल हो जाएगी. ये चिंता इसलिए नहीं थी क्योंकि मैं नई थी. आज भी मैं यही सवाल पूछूंगी. नई होने के बावजूद मुझे खुशी है कि मैंने ये सवाल पूछे थे, मुझे खुशी है कि मैंने सोचा था कि क्या उम्र ठीक है, और मुझे खुशी है कि गदर की कहानी ने इसे सही ठहराया.'
अमीषा आगे ये भी कहती हैं कि उन्हें तबतक उम्र के फासले से तकलीफ नहीं जबतक वो कहानी की जरूरत हो. उन्होंने कहा- उम्र का फर्क बिल्कुल ठीक है अगर कहानी को इसकी जरूरत हो और वो इसे सही ठहराए. लेकिन जब कहानी में उम्र का फर्क जरूरी ना हो फिर भी उसे डाल दिया जाए तो उस पर सवाल जरूर उठाना चाहिए.
'सच्चाई ये है कि आज दर्शक कुछ फिल्मों को इसलिए स्वीकार नहीं कर रहे हैं. उस समय फिल्म काफी रिस्की लग रही थी. कई लोगों ने मुझे फिल्म ना करने की सलाह दी क्योंकि ऑन-पेपर ये किसी भी बॉक्स को टिक नहीं करती थी. सनी सुपरस्टार थे लेकिन मुझसे काफी बड़े थे. लोग पूछते थे कि मैं इतने बड़े उम्र वाले हीरो के साथ कैसे जोड़ी जा सकती हूं.'
गदर में क्यों किया सनी संग रोमांस?
अमीषा ने बताया कि फिल्म गदर में उनके और सनी देओल के किरदार में उम्र का फासला दिखाना जरूरी था, इसलिए उन्हें कास्ट किया गया. एक्ट्रेस ने कहा- कहानी में उम्र का फर्क जरूरी था. ये पहले से नौकरी कर रहे एक शख्स की लव स्टोरी थी जो एक लड़की से प्यार कर बैठा जब वो अभी कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ रही थी. वो सोचता था कि ये लड़की उसके लिए असंभव है - उम्र, समाज, पढ़ाई और धर्म के कारण. सकीना के बारे में सब कुछ तारा की पहुंच से बाहर लगता था. उसके लिए वो एक रानी थी जिसे वो कभी हासिल नहीं कर सकता. एक राजकुमारी जिसे वो कभी पा नहीं सकता.
'ये गदर की खूबसूरती है. सकीना उसके हिंदू संस्कार और परिवार में खूब घुल-मिल गई. वहीं दूसरी तरफ जब बात आई तो अपनी जान से प्यारी लड़की को बचाने के लिए तारा सिंह पाकिस्तान में बसने को भी तैयार हो गया. मस्जिद में सबके सामने उसने ये ऐलान कर दिया. वो तभी गुस्सा होता है जब उसे अपनी पहचान छोड़ने को कहा जाता है. तो ये गहरी लव स्टोरी है - जुनून और सच्चे प्यार की. ये दिखाती है कि हिंदू और मुस्लिम साथ रह सकते हैं. दोनों तरफ की दुश्मनी और नफरत अक्सर राजनीति से चलती है. असलियत में दोनों तरफ के लोग हमेशा से गहरे इंसानी रिश्ते रखते आए हैं.'
कैसे अंडरडॉग फिल्म है गदर?
अमीषा पटेल इसी बातचीत में ये भी कहती हैं कि फिल्म गदर एक अंडरडॉग फिल्म है, क्योंकि इसकी सक्सेस की उम्मीद कई लोगों ने नहीं की थी. एक्ट्रेस ने कहा- गदर एक अंडरडॉग फिल्म थी जिसमें सिर्फ इसमें काम करने वालों को भरोसा था. सबने दिल से काम किया. उन्होंने बहुत मेहनत की, समर्पण, ईमानदारी और विश्वास के साथ.
बात करें फिल्म गदर की लेगेसी की, तो इसने बॉक्स ऑफिस पर वर्ल्डवाइड 100 करोड़ का आंकड़ा पार किया था. साल 2001 में रिलीज हुई ये फिल्म अभी तक सबसे ज्यादा टिकट बेचने वाली इकलौती फिल्म है, जिसका रिकॉर्ड अभी तक किसी ने नहीं तोड़ा है.
अनिता