‘कितने बुरे दिन आ गए हैं अक्षय कुमार के… कितने बुरे! इतनी क्या मजबूरी रही होगी?’ अक्षय कुमार के गाने ‘घिस घिस घिस’ पर ये एक सोशल मीडिया यूजर का कमेंट था. अगर आपको अभी तक नहीं पता चला है कि वेलकम टू द जंगल (उर्फ वेलकम 3) फिल्म से अक्षय कुमार का एक भोजपुरी गाना आया है, तो आप मुफ्त का मजेदार एंटरटेनमेंट मिस कर रहे हैं. काहें कि बवाल मचल बा भईया!
कुछ लोग मजाक उड़ा रहे हैं कि अक्षय का कितना बुरा दौर आ गया कि भोजपुरी गाना कर लिया. कुछ भोजपुरिया लोग टेंशन में हैं कि उनकी भाषा को उसी ‘अश्लील गीत’ स्टाइल में खर्च किया जा रहा है, जो बदनाम है. लेकिन एक जगह कोई फोकस नहीं कर रहा— अक्षय का भोजपुरी गाना मजबूरी है, या मार्केटिंग का गेम प्लान?
अक्षय के भोजपुरी गाने का मैटर क्या है?
अक्षय कुमार का गाना ही बता रहा है कि फिल्म में वो एक एक्टर के रोल में हैं. ये एक्टर पहले बहुत हिट होता था, फिर ऐसा पिट गया कि अब भोजपुरी फिल्मों में आइटम नंबर करता फिर रहा है. इस बैकग्राउंड के साथ, अक्षय और भोजपुरी इंडस्ट्री की स्टार एक्ट्रेस अक्षरा सिंह का गाना ‘घिस घिस घिस’ शुरू होता है. और अगले ढाई मिनट अक्षय अपनी ट्रेडमार्क एनर्जी और कॉमेडी के कमिटमेंट के साथ स्क्रीन पर माहौल जमा देते हैं.
गाने का फ्लेवर-कलेवर-तेवर फुल भोजपुरी है. लेकिन इमेज तो इमेज है न भाईसाहब! पिछले डेढ़ दशक में मेनस्ट्रीम भोजपुरी फिल्मों-स्टार्स-गायकों ने इमेज ही ऐसी कमाई है. इसलिए कई लोगों को एक बॉलीवुड स्टार का ‘ऐसे गाने’ में नजर आना बड़ा ‘डाउनमार्केट’ लग रहा है. लेकिन गौर करना जरूरी है कि वेलकम टू द जंगल में ‘घिस घिस घिस’ गाना बाकायदा बैकस्टोरी और सेटअप के साथ आया है. तो सवाल ये है कि इतनी मेहनत क्यों?
मजबूरी नहीं, मार्केट का खेल
वेलकम टू द जंगल, अक्षय की बड़ी फिल्म है. इसकी कास्ट बड़ी है, बजट बड़ा है और कहानी का कन्फ्यूजन भी बड़ा है. ऊपर से ये एक कॉमेडी फिल्म है. एक्शन-मसाला वाली फिल्मों के लिए बॉक्स ऑफिस से बड़े बजट की वसूली बहुत मुश्किल नहीं होती, लेकिन कॉमेडी फिल्मों के लिए बड़ा बजट, लॉकडाउन के बाद से काफी रिस्क भरा समीकरण रहा है.
लेकिन एक दिक्कत ये भी है कि बॉलीवुड की कॉमेडी फिल्में अक्सर ऐसी होती हैं जो शहरी ह्यूमर समझने वालों को ज्यादा अपील करती हैं. आइकॉनिक कॉमेडी फिल्में वही होती हैं जिनकी कॉमेडी हर लेवल की जनता को अपील करे. फिल्म का सेटअप कैसा भी हो, मगर कहानी में ह्यूमर का डिजाइन ऐसा हो कि साउथ दिल्ली के शानदार मल्टीप्लेक्स से लेकर, कस्बे के सिंगल स्क्रीन तक की ऑडियंस उसे बिना दिमाग लगाए समझ सके.
ऊपर से बड़ी फिल्मों को कामयाबी के लिए जिस 'मास' ऑडियंस की जरूरत होती है, वो भोजपुरी भाषी क्षेत्र से ही आती है. हिंदी सिनेमा का ये दर्शक आता अधिकतर उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश से ही है, मगर काम-धंधे के चक्कर में ये दिल्ली-मुंबई में भी खूब पाया जाता है. इसलिए अगर कोई हिंदी फिल्म इस मास ऑडियंस से कनेक्ट कर गई, तो कमाई में भला हो जाता है. इस ऑडियंस को अपील किए बिना भी फिल्में चल तो जाती हैं, मगर कमाई का आंकड़ा बड़ा इन्हीं की कृपा से होता है.
हिंदी और भोजपुरी का पुराना याराना
भाषाओं के समाज में हिंदी और भोजपुरी को बहनें कहा जाता है. इसलिए भोजपुरी भाषा और कल्चर का मेल, हिंदी फिल्मों के साथ शुरुआत में ही सेट हो गया था. 1931 में हिंदी फिल्मों को आवाज मिली थी और पहली बोलती फिल्म आलम आरा आई थी. उसी साल तीन फिल्मों में भोजपुरी गीतों की एंट्री हो गई थी— दौलत का नशा में एक मुजरा था 'गगरिया भरत न देख हो बांके छैला'. नूरजहां में 'जबसे मोहन दरसवा दिखाई गयो रे' और फरेबीलाल में 'बलमुवा साथी कहो मोसे बतिया'. ये कहना गलत नहीं होगा कि हिंदी फिल्मों में पंजाबी कल्चर और गानों की एंट्री से पहले, भोजपुरी ही पहली सहेली थी.
'रंग बरसे' से लेकर 'ई है बंबई नगरिया तू देख बबुआ' या 'खईके पान बनारस वाला' तक, हिंदी फिल्मों में कई आइकॉनिक भोजपुरी गाने मिलते थे. लेकिन फिर ये ट्रेंड कहानी की सेटिंग के हिसाब से ही फॉलो हुआ. जैसे यूपी में सेट ओमकारा (2006) में 'बीड़ी जलईले', डेढ़ इश्किया (2014) में 'हमरी अटरिया पे' या फिर झारखंड में सेट गैंग्स ऑफ वासेपुर (2012) के गाने. लेकिन अब ये ट्रेंड एक नए अंदाज में फिर से लौट रहा है.
भोजपुरी से भीड़ जुटाने के ट्रेंड की वापसी
बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर स्त्री 2 (2024) में भोजपुरी सुपरस्टार सिंगर पवन सिंह के गाने 'आई नहीं' की एंट्री धमाकेदार हिट रही थी. गाना हिंदी में था, लेकिन मेकर्स ने पवन सिंह से कनेक्ट करने वाली ऑडियंस को इस गाने से अपील किया. विक्की विद्या का वो वाला वीडियो (2024) में पवन से 'चुम्मा' और पैन इंडिया फिल्म डकैत में 'टच बडी' भी इसी कनेक्ट के लिए गवाया गया. इसी कनेक्ट की तलाश में राजकुमार राव की फिल्म मालिक (2025) में मेकर्स ने एक और स्टार भोजपुरी सिंगर खेसारी लाल यादव से गाना गवाया था. और भोजपुरी फिल्म-म्यूजिक इंडस्ट्री के आइकॉन मनोज तिवारी ने पंचायत वेब सीरीज में जो 'हिंद के सितारा' गाना गाया, उसकी धुआंधार पॉपुलैरिटी तो मिसाल है ही.
इसी तर्ज पर अक्षय कुमार की फिल्म वेलकम टू द जंगल में 'घिस घिस घिस' की एंट्री हुई है. इस गाने के सिंगर विक्रम मॉन्ट्रोज और सुप्रिया पाठक, भोजपुरी गानों के सिंगर नहीं हैं, मगर 'घिस घिस घिस' का पूरा डिजाइन और प्रेजेंटेशन किसी भी धमाकेदार भोजपुरी गाने जैसा है.
अक्षय के लिए भोजपुरी कनेक्शन कोई नया भी नहीं है. टशन (2008) फिल्म में उन्होंने भोजपुरी बोलने वाले गैंगस्टर बच्चन पांडे का किरदार निभाया था. फिल्म के गाने 'दिल डांस मारे' में तगड़ा भोजपुरी फ्लेवर था और इसे उदित नारायण ने गाया था, जो हिंदी के साथ-साथ भोजपुरी गानों के भी आइकॉन हैं. फिल्म में अक्षय के किरदार का ये फ्लेवर लोगों को बहुत पसंद आया था. 2022 में अक्षय कुमार फिर से बच्चन पांडे बने थे, उनके किरदार का नाम ही फिल्म का टाइटल था. उनका देसी अंदाज खूब भौकाल बनाने में कामयाब हुआ था, हालांकि फिल्म अपनी कहानी की वजह से कुछ खास कमाल नहीं कर पाई.
अब अक्षय ने एक बार फिर से वेलकम टू द जंगल में भोजपुरी फ्लेवर पकड़ा है और ये लोगों को पसंद भी आ रहा है. गाने के यूट्यूब वीडियो पर कई यूजर्स ने इस तरह के कमेंट किए हैं कि 'ये तो हमारे पॉपुलर भोजपुरी गानों से भी तगड़ा है'. साथ ही गाने में स्ट्रगलिंग भोजपुरी एक्टर के रोल में अक्षय के डेडिकेशन की भी तारीफ हो रही है. यानी अक्षय का भोजपुरिया अवतार उनकी फिल्म के लिए माहौल बनाने में तो कामयाब हो रहा है. अब 26 जून को वेलकम टू द जंगल की रिलीज के साथ ये भी पता चल जाएगा कि उनकी ये मेहनत, मार्केट में फिल्म का भौकाल बनाने में कितनी कामयाब होती है.
सुबोध मिश्रा