अखिलेश यादव के 'काम बोलता है' नारे और यूपी के विकास का सच!

हरदोई में ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन 17 दिसंबर 2016 को हो चुका है लेकिन अभी भी ट्रॉमा सेंटर में बेड लगाने का काम चल रहा है. डॉक्टर और दूसरी सुविधाओं की बात तो दूर की बात है. मतलब साफ है कि चुनाव को देखते हुए योजनाओं के पूरे होने से पहले ही उनका उद्घाटन कर दिया गया है.

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उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव

हिमांशु मिश्रा

  • हरदोई,
  • 20 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 3:13 AM IST

यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस विधानसभा चुनाव में नारा दिया है कि काम बोलता है. ये बात सही है कि यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में कई विकास कार्यों की शुरुआत की है.

रविवार को के समय 'आज तक' संवाददाता ने हरदोई में ऐसी योजनाओं का जायज़ा लिया तो पता चला कि योजनाओं की शुरुआत हो चुकी है लेकिन अभी काफी काम इन योजनाओं में बाक़ी है.

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हरदोई में ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन 17 दिसंबर 2016 को हो चुका है लेकिन अभी भी ट्रॉमा सेंटर में बेड लगाने का काम चल रहा है. डॉक्टर और दूसरी सुविधाओं की बात तो दूर की बात है. मतलब साफ है कि चुनाव को देखते हुए योजनाओं के पूरे होने से पहले ही उनका उद्घाटन कर दिया गया है.

हरदोई जिले के लिए 100 बेड के अस्पताल का शिलान्यास 5 मार्च 2014 में किया गया था जिसके पूरे होने का समय 31 मार्च 2016 था लेकिन काम अभी पूरा नहीं हुआ है. आज तक संवाददाता ने जब अस्पताल के अंदर एक व्यक्ति से बात की तो उसने कहा कि 31 मार्च तक अस्पताल चालू हो जाएगा. फिलहाल अस्पताल के गेट पर ताला लगा हुआ है.

कुछ इसी तरह का माहौल हरदोई जिले को 2012 में ऐग्रिकल्चर कॉलेज मिला था लेकिन वो भी अभी तक शुरू नहीं हुआ है. ये तो सिर्फ हरदोई की बात है. पूरे में इस तरह की कई दर्जन योजनाएं हैं जो सिर्फ़ अभी तक कागज पर ही शुरू हुई हैं. धरातल पर शुरू होने में थोड़ा समय लगेगा.

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जिस तरह से काम बोलता है का नारे दे रहे हैं, उससे एक बात तो साफ होती है कि जिस तरह से 2014 में बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में विकास के नाम पर इंडिया शाइनिंग का नारा गढ़ा था उसके नतीजे चुनाव में क्या आएं ये पूरा देश जानता है. अब इसी तरह से अखिलेश यादव करने जा रहे हैं.

दरअसल, अखिलेश यादव अपने विकास आधे-अधूरे और जिन परियोजनाओं की शुरुआत अभी नहीं हुई है उनका लोकार्पण कर उससे सत्य रूपी छवि देने की कोशिश कर रहे हैं.

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