मेरठ में तीन, बदायूं में दो दफा बदले उम्मीदवार... इन 8 सीटों पर कैंडिडेट चुनने में कन्फ्यूज क्यों हैं अखिलेश?

पीडीए का जो फ़ॉर्मूला अखिलेश यादव ने गढ़ा, लगता है उसी चक्रव्यूह में वो फंस गए हैं. जहां एक बार टिकट देते हैं, फिर उन्हें कमजोर लगता है या पार्टी में विद्रोह होता है. अखिलेश टिकट बदल देते हैं. समाजवादी पार्टी आठ में प्रत्याशी बदल चुकी है. दो से तीन में दो-दो तीन-तीन बार बदला है.

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अखिलेश यादव क्यों नहीं चुन पा रहे उम्मीदवार अखिलेश यादव क्यों नहीं चुन पा रहे उम्मीदवार

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 3:25 AM IST

लोकसभा चुनाव का माहौल बन गया है. पहले फेज के चुनाव होने में गिनती के ही दिन रह गए हैं. अभी भी राजनीतिक दल सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर रहे हैं तो वहीं, नेताओं का एक से दूसरे दलों में आवाजाही भी जारी है. कुल मिलाकर सारे चुनावी सिलसिले चल रहे हैं. उत्तर प्रदेश जो कि सबसे बड़ी लोकसभा सीटों वाला राज्य है, यहां के कई संसदीय क्षेत्रों पर अभी भी उम्मीदवारों की घोषणा नहीं हुई है. एक ठीक-ठीक आंकड़े पर बात करें तो यूपी की 7 ऐसी सीटें हैं, जिस पर बीजेपी और सपा-कांग्रेस ने अभी प्रत्याशी नहीं उतारे हैं. 

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सपा ने आठ सीटों पर कई बार बदले उम्मीदवार
इसमें कांग्रेस की बात करें तो वह अपनी गढ़ मानी जाने वाली सीटों को लेकर असमंजस में है, लेकिन सपा का असमंजस तो और भी बढ़ा दिखाई दे रहा है. उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस का गठबंधन है. ऐसे में सीट शेयरिंग के फॉर्मूले के तहत समाजवादी पार्टी प्रदेश की 63 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन सपा इतनी उलझन और न जाने कैसी उधेड़बुन में दिख रही है कि, अखिलेश यादव की पार्टी यूपी में चुनाव से ऐन पहले अब कुछ सीटों पर घंटों के भीतर कैंडिडेट का नाम बदल रही है. पार्टी, आठ सीटों पर कई बार अपने उम्मीदवारों की ही अदला बदली में फंसी हुई है.

RLD नेता जयंत चौधरी ने ली चुटकी
एक प्रेस कान्फ्रेंस में अखिलेश यादव यह कहते दिख रहे हैं कि 80 हराओ लोकतंत्र बचाओ का नारा लेकर संगठन के लोग गांव-गांव जाएंगे. इसी बात पर RLD नेता जयंत चौधरी ने गुरुवार को एक ट्वीट कर बिना नाम लिए ही सपा पर निशाना साधा. उन्होंने X पर लिखा कि, विपक्ष में किस्मत वालों को ही कुछ घंटों के लिए लोक सभा प्रत्याशी का टिकट मिलता है! और जिनका टिकट नहीं कटा, उनका नसीब…' जयंत चौधरी ने जो ये चुटकी ली, इसके बड़े मायने हैं.

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मेरठ में कई बार बदले प्रत्याशी
असल में मेरठ सीट में सबसे पहले अखिलेश यादव ने भानु प्रताप सिंह को टिकट दिया. फिर अतुल प्रधान का नाम फाइनल किया. अतुल प्रधान ने नामांकन कर दिया. 24 घंटे बाद फिर टिकट बदलकर सुनीता वर्मा को दिया.

बागपत में भी हुआ मेरठ वाला खेल
मेरठ में सपा का ये खेल चल ही रहा था कि, यही अदला-बदली का खेल बागपत में भी हुआ. पहले जाट बिरादरी के मनोज चौधरी को टिकट मिला. मगर गुरुवार को अमरपाल शर्मा को टिकट देकर पर्चा अखिलेश ने भरवाया. इसी तरह बदायूं में पहले धर्मेंद्र यादव के नाम टिकट रहा फिर वहां से शिवपाल यादव को टिकट दिया गया. अब उन्हीं के बेटे आदित्य यादव की चर्चा चलने लगी है.

तीन-तीन बार बदल रहे उम्मीदवार
पीडीए का जो फ़ॉर्मूला अखिलेश यादव ने गढ़ा, लगता है उसी चक्रव्यूह में वो फंस गए हैं. जहां एक बार टिकट देते हैं, फिर उन्हें कमजोर लगता है या पार्टी में विद्रोह होता है. अखिलेश टिकट बदल देते हैं. समाजवादी पार्टी आठ में प्रत्याशी बदल चुकी है. दो से तीन में दो-दो तीन-तीन बार बदला है.

यह भी पढ़िएः बदायूं से शिवपाल यादव की जगह बेटे आदित्य यादव को चुनाव लड़ाने की चर्चा, BJP ने ली चुटकी

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मिश्रिख, मेरठ, मुरादाबाद कई बार बदले प्रत्याशी
मिश्रिख सीट का हाल देखिए. 19 फरवरी को मिश्रिख से रामपाल राजवंशी को टिकट मिला, 16 मार्च को उनके बेटे मनोज राजवंशी उम्मीदवार बने. अब मनोज की पत्नी संगीता उम्मीदवार हैं. इसी तरह 15 मार्च को बिजनौर से यशवीर सिंह को टिकट दी गई, लेकिन 24 मार्च को बदलकर दीपक सैनी को दे दिया गया.

नोएडा से महेंद्र नागर फिर बने प्रत्याशी
अगले दिन 16 मार्च को महेंद्र नागर नोएडा से प्रत्याशी बने, 20 मार्च को उनकी जगह राहुल अवाना ने ले ली और 28 एक बार फिर महेंद्र नागर प्रत्याशी हो गए. इसी तरह 24 मार्च को मुरादाबाद से एसटी हसन को टिकट मिला.  26 को उन्होंने पर्चा भरा. 27 को रुचि वीरा को सिंबल देकर नामांकन करवा दिया गया. 

मुलायम सिंह चरखा दांव लगाकर सियासत करते थे. अखिलेश यादव महीनों से बीजेपी के खिलाफ दम ठोकने की बात करते-करते अपना पहलवान ही बदलते रहेंगे तो खुद ही अदला-बदली दांव में मुंह की न खा जाएं.

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