बिहारः ओवैसी के बाद PFI की पार्टी भी चुनाव मैदान में, पप्पू यादव से मिलाया हाथ

ओवैसी के बिहार में बढ़ते जनाधार को देखते हुए एसडीपीआई ने चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने का फैसला किया है. हालांकि, एसडीपीआई के साथ पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का नाम भी जुड़ा है.

Advertisement
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली ,
  • 28 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 7:40 PM IST
  • बिहार में मुस्लिम वोटों पर छिड़ा सियासी संग्राम
  • पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की SDPI बिहार में दस्तक
  • मुस्लिम पार्टियों की नजर बिहार के सीमांचल पर

बिहार की सियासत में असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अभी पैर जमाए भी नहीं थे कि दक्षिण भारत की दूसरी मुस्लिम पार्टी ने दस्तक दे दी है. एआईएमआईएम के बाद अब पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की सियासी विंग सोशल  डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) बिहार में किस्मत आजमाने के लिए मैदान में उतर रही है. ऐसे में मुस्लिम वोटों को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया है और देखना है कि मुसलमानों की पहली पसंद कौन सी पार्टी बनती है? 

एसडीपीआई बिहार में जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव के अगुवाई में बनने वाले प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) का हिस्सा है, जिसमें दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की पार्टी बीएमपी भी शामिल है. पप्पू यादव ने तीन छोटी पार्टियों को एक साथ लाकर बिहार में दलित-मुस्लिम-यादव वोटों का समीकरण बनाने की कवायद की है. हालांकि, असदुद्दीन ओवैसी ने भी बिहार में अपने सियासी जनाधार को बढ़ाने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव की पार्टी समाजवादी जनता दल के साथ गठबंधन किया है, जिसे यूनाइटेड डेमोक्रेटिक सेक्युलर एलायंस (यूडीएसए) का नाम दिया गया है. 

Advertisement
बिहार में पप्पू यादव के साथ एसडीपीआई का गठबंधन

बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने 2015 में पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव में छह उम्मीदवार उतारे थे और सभी हार गए थे, लेकिन करीब 96 हजार वोट हासिल करने में कामयाब रही थी. कोचा धामन सीट पर एआईएमआईएम 38 हजार से ज्यादा वोट हासिल कर दूसरे नंबर रही थी. इसके अलावा बाकी सीटों पर कोई खास असर नहीं दिखा सकी थी, लेकिन बिहार में पिछले साल उपचुनाव में एआईएमआईएम खाता खोलने में कामयाब रही है. ऐसे में ओवैसी की पार्टी के हौसले बुलंद हैं और इस बार बिहार के चुनाव गठबंधन कर सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है.

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की SDPI पार्टी है

ओवैसी के बिहार में बढ़ते जनाधार को देखते हुए एसडीपीआई ने चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने का फैसला किया है. हालांकि, एसडीपीआई के साथ पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का नाम भी जुड़ा है. सीएए और एनआरसी के खिलाफ हुए प्रदर्शन में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का नाम तेजी से उभरा था. दक्षिण भारत के केरल और कर्नाटक में पीएफआई का अच्छा खासा जनाधार है और अब उत्तर भारत में भी वो अपने पैर पसारने में जुटी है, जिसके चलते दिल्ली के बाद अब बिहार में चुनाव लड़ने का फैसला किया है. 

Advertisement

बिहार की मुस्लिम बाहुल्य सीट

दरअसल, बिहार में करीब 16 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं. वहीं,  बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम वोटर निर्णायक स्थिति में हैं. इन इलाकों में मुस्लिम आबादी 20 से 40 प्रतिशत या इससे भी अधिक है. बिहार की 11 सीटें हैं, जहां 40 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं और 7 सीटों पर 30 फीसदी से ज्यादा हैं. इसके अलावा 29 विधानसभा सीटों पर 20 से 30 फीसदी के बीच मुस्लिम मतदाता हैं. मौजूदा समय में बिहार में 24 मुस्लिम विधायक हैं.

ओवैसी और SDPI की नजर सीमांचल पर

ओवैसी की नजर बिहार के सीमांचल इलाके पर है. सीमांचल में 24 सीटें आती हैं और मुसलमानों की आबादी 40 फीसदी से भी ज्यादा है. ओवैसी की पार्टी ने साल 2015 में पहले मुस्लिम प्रभाव वाली सीमांचल की सभी 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में छह उम्मीदवार ही उतारे थे और सभी हार गए थे.

लोकसभा चुनाव के बाद बिहार के किशनगंज सीट पर हुए उपचुनाव में उनकी पार्टी के उम्मीदवार कमरुल होदा ने जीत दर्ज की थी. ओवैसी का असर सीमांचल की राजनीति में साफ दिख रहा है. मुस्लिम वोटरों के एक बड़े तबके का ओवैसी की पार्टी की तरफ झुकाव बढ़ा है.

Advertisement

वहीं, पप्पू यादव का राजनीतिक ग्राफ भी सीमांचल और कोसी के इलाके में है. पूर्णिया और मधेपुरा से पप्पू यादव सांसद रह चुके हैं और यहां यादव और मुस्लिम समुदाय का अच्छा खासा वोट है. इस तरह से ओवैसी और अब एसडीपीआई सीमांचल को अपना सियासी दुर्ग बनाना चाहती है, जिसका सीधा राजनीतिक नुकसान आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन को उठाना पड़ सकता है.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »