नयाग्राम, पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले की एक अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षित विधानसभा सीट है. 1962 से यह राज्य की चुनावी राजनीति का हिस्सा रही है और झाड़ग्राम लोकसभा क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से एक है. इसमें नयाग्राम और गोपीबल्लवपुर-I विकास खंड शामिल हैं, जबकि गोपीबल्लवपुर-II खंड की तीन ग्राम पंचायतें भी इसके अंतर्गत आती
हैं.
नयाग्राम का राजनीतिक इतिहास लंबा और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. यह क्षेत्र वर्षों तक नक्सली गतिविधियों का गढ़ रहा और 2006 तक "रेड कॉरिडोर" का हिस्सा माना जाता था. हिंसा और अस्थिरता के बीच भी यहां की जनता ने हमेशा राज्य की सत्ता में काबिज दल को समर्थन दिया है. केवल 1962 के पहले चुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी.
1967 और 1969 में बांग्ला कांग्रेस ने जीत हासिल की, जब अजय मुखर्जी मुख्यमंत्री थे. इसके बाद 1971 और 1972 में कांग्रेस का वर्चस्व रहा. 1977 से 2011 तक लगातार सात बार सीपीआई(एम) ने यहां परचम लहराया.
2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद से तृणमूल कांग्रेस के दुलाल मुर्मू ने लगातार तीन बार जीत दर्ज की है. 2016 में उन्होंने भाजपा के बाकुल मुर्मू को 43,255 मतों से हराया, लेकिन 2021 में यह अंतर घटकर 22,754 रह गया. वाम-कांग्रेस गठबंधन उम्मीदवार हरिपद सरें महज 5,863 वोट पाकर हाशिए पर चले गए.
भाजपा ने नयाग्राम में धीरे-धीरे पकड़ बनाई है. 2019 लोकसभा चुनाव में इसने यहां 3,338 मतों से बढ़त बनाई थी, हालांकि 2024 में तृणमूल कांग्रेस ने 24,265 वोटों से बाजी पलट दी.
2021 में नयाग्राम में कुल 2,26,791 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें 34.98% अनुसूचित जनजाति और 25.71% अनुसूचित जाति के मतदाता शामिल हैं. यह पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र है और यहां मतदान प्रतिशत लगातार ऊंचा रहता है - 2021 में 84.84%, 2019 में 83.73% और 2016 में 85.03% रही.
भौगोलिक रूप से नयाग्राम पश्चिम बंगाल के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में, झारखंड की सीमा के पास स्थित है. यहां की भूमि लेटराइट मिट्टी वाली, कम उपजाऊ और कटाव प्रवण है. यह इलाका सूखा प्रभावित है, जल संचयन क्षमता कम है और सिंचाई सुविधाएं सीमित हैं. कालयाघाई और सुवर्णरेखा नदियां पास से बहती हैं, लेकिन उनका योगदान कृषि में सीमित है.
यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि आधारित है. धान प्रमुख फसल है, जबकि दालें और तिलहन सहायक फसलें हैं. वनोपज और पशुपालन भी आजीविका में योगदान करते हैं. रोजगार के अवसर कम होने के कारण लोगों को पड़ोसी जिलों और झारखंड के कस्बों में पलायन करना पड़ता है. मृदा संरक्षण और जल प्रबंधन परियोजनाओं के माध्यम से हाल के वर्षों में स्थिति सुधारने की कोशिशें की जा रही हैं.
नयाग्राम, मिदनापुर (पूर्व जिला मुख्यालय) से लगभग 53 किमी दक्षिण और झाड़ग्राम नगर से 35 किमी दूर है. पास के कस्बों में बेलदा (30 किमी), खड़गपुर (60 किमी) और ओडिशा का जलेश्वर (40 किमी) शामिल हैं. झारखंड में बारिपदा (50 किमी) और चकुलिया (45 किमी) नजदीक पड़ते हैं. राज्य की राजधानी कोलकाता लगभग 166 किमी दूर है.
2026 विधानसभा चुनाव में नयाग्राम पर सभी की नजरें टिकी होंगी. ऐतिहासिक रूप से यह सीट राज्य में सत्तारूढ़ दल के पक्ष में जाती रही है. भाजपा ने पिछले एक दशक में यहां पकड़ मजबूत की है और आदिवासी वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है. फिर भी तृणमूल कांग्रेस का संगठन और पकड़ अभी भी मजबूत है. जब तक भाजपा निर्णायक रूप से आदिवासी मतदाताओं को अपने पक्ष में नहीं करती, नयाग्राम में तृणमूल कांग्रेस की बढ़त बरकरार रहने की संभावना है.
(अजय झा)