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कटवा विधानसभा चुनाव 2026 (Katwa Assembly Election 2026)

कटवा, पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धवान जिले की एक सामान्य (जनरल) श्रेणी की विधानसभा सीट है. यह बर्धमान पूर्व लोकसभा क्षेत्र के सात खंडों में से एक है. इस सीट में कटवा नगरपालिका, दैन्हाट नगरपालिका, कटवा-II सामुदायिक विकास खंड और कटवा-I ब्लॉक के चार ग्राम पंचायत - खाजुर्दीही, सुदपुर, करजग्राम और गोई शामिल हैं. यह एक मिश्रित निर्वाचन क्षेत्र है, जहां

ग्रामीण मतदाता कुल मतदाताओं का लगभग 65.40 प्रतिशत और शहरी मतदाता 34.60 प्रतिशत हैं.

1951 में स्थापित होने के बाद से कटवा ने राज्य की अब तक की सभी 17 विधानसभा चुनावों में भाग लिया है. लंबे समय तक यह सीट वाम मोर्चे का गढ़ रही. एकीकृत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने यहां दो बार जीत दर्ज की, जबकि 1964 के विभाजन के बाद माकपा (CPI-M) ने छह बार जीत हासिल की. बीच-बीच में कांग्रेस ने भी सफलता पाई.

1996 से इस सीट पर कांग्रेस के रवींद्रनाथ चटर्जी का दबदबा कायम हुआ. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लगातार चार चुनाव जीते. 2016 में चटर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और वहां से भी लगातार 2016 और 2021 के चुनावों में जीत दर्ज की. कुल मिलाकर 1996 से अब तक छह बार लगातार जीत का उनका रिकॉर्ड इस सीट पर बेजोड़ है.

2016 का चुनाव बेहद कड़ा रहा, जब चटर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार श्यामा मजूमदार को मात्र 911 वोटों से हराया. बाद में मजूमदार ने भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा और 2021 में भाजपा प्रत्याशी बने. इस बार दोनों पूर्व कांग्रेसी नेताओं के बीच सीधी लड़ाई हुई, जिसमें चटर्जी ने मजूमदार को 9,155 वोटों से मात दी.

भाजपा का उदय कटवा में धीरे-धीरे हुआ. 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कटवा खंड में 1,859 वोटों से बढ़त हासिल कर राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने फिर से पकड़ मजबूत की और 12,415 वोटों से बढ़त बनाई.

2021 विधानसभा चुनाव में कटवा में 2,67,738 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2024 के लोकसभा चुनाव तक बढ़कर 2,75,698 हो गए. इनमें अनुसूचित जाति के मतदाता 27.41 प्रतिशत और मुस्लिम मतदाता 21.80 प्रतिशत हैं. मतदान प्रतिशत हमेशा ऊंचा रहा. 2016 में 84%, 2019 में 82.55%, 2021 में 84.13% और 2024 में 80.45% रहा था.

कटवा नगर, जो इस क्षेत्र को नाम देता है, का इतिहास बेहद समृद्ध है. इसे पहले इंद्रणी परगना और बाद में कांटाक नगरी के नाम से जाना जाता था. यह वैष्णव संप्रदाय के लिए धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है. अजय और हुगली नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण कटवा मुगलों और नवाबों के दौर में रणनीतिक दृष्टि से अहम केंद्र रहा.

कटवा, मुर्शिदाबाद (बंगाल की राजधानी) का प्रवेश द्वार था और मराठा आक्रमणों तथा ब्रिटिश विजय के दौरान कई युद्धों का गवाह बना. 1740 के दशक में प्रथम और द्वितीय कटवा युद्ध और 1763 में तृतीय कटवा युद्ध के दौरान एक महत्वपूर्ण मुठभेड़ यहीं हुई. 1757 में प्लासी की निर्णायक लड़ाई से पहले रॉबर्ट क्लाइव ने यहां युद्ध परिषद भी आयोजित की थी.

कटवा का भूभाग उपजाऊ और समतल है, जो मध्य बंगाल की जलोढ़ मिट्टी का हिस्सा है. अजय नदी और हुगली नदी इस क्षेत्र के पास बहती हैं, जिससे कृषि और व्यापार को सहारा मिलता है. धान, जूट और मौसमी सब्जियां यहां की प्रमुख फसलें हैं. एक समय नदी मार्ग से नमक और अन्य वस्तुओं का बड़ा व्यापार होता था. आज भी कृषि यहां की रीढ़ है, साथ ही लघु उद्योग और व्यापार भी अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं.

सांस्कृतिक दृष्टि से भी कटवा काफी जीवंत है. खासकर कार्तिक पूजा, जिसे स्थानीय स्तर पर कार्तिक लड़ाई कहा जाता है, यहां का बड़ा आकर्षण है. इस दौरान 250 से अधिक संगठन भव्य आयोजन में हिस्सा लेते हैं.

कटवा का बुनियादी ढांचा साधारण लेकिन कार्यात्मक है. यहां से बर्धवान, बांदेल, आजीमगंज और अहमदपुर तक रेल संपर्क उपलब्ध है, जो 20वीं सदी की शुरुआत में स्थापित हुआ था. सड़क संपर्क भी पास के कस्बों और गांवों तक अच्छा है. शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन उच्च शिक्षा और विशेष चिकित्सा सेवाओं के लिए लोगों को अक्सर बर्धवान या कोलकाता जाना पड़ता है.

कटवा, जिला मुख्यालय बर्धवान से लगभग 55 किमी, राज्य की राजधानी कोलकाता से 150 किमी दूर है. निकटवर्ती कस्बों में कालना (30 किमी), दैन्हाट (10 किमी) और पूर्वस्थली (25 किमी) शामिल हैं. आसनसोल लगभग 152 किमी और झारखंड का धनबाद लगभग 150 किमी की दूरी पर स्थित है.

2026 विधानसभा चुनाव से पहले कटवा में रोमांचक मुकाबले के आसार हैं. भाजपा, अपनी बढ़ती पकड़ और पिछली बढ़तों के सहारे यहां जीत दर्ज करने की कोशिश करेगी. तृणमूल कांग्रेस, अनुभवी नेता रवींद्रनाथ चटर्जी के नेतृत्व में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए संघर्ष करेगी. यदि कांग्रेस-वाममोर्चा गठबंधन अपना खोया जनाधार वापस पाने में सफल रहता है, तो यह विपक्षी वोटों का बंटवारा कर भाजपा को बढ़त दिला सकता है.

यानी, कटवा 2026 में एक बेहद कड़े और दिलचस्प चुनावी मुकाबले का गवाह बनने जा रहा है.

(अजय झा)

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कटवा विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2021
2016
WINNER

Rabindranath Chatterjee

AITC
वोट1,07,894
विजेता पार्टी का वोट %48.1 %
जीत अंतर %4.1 %

कटवा विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Shyama Majumdar

    BJP

    98,739
  • Prabir Ganguli

    INC

    12,976
  • Nota

    NOTA

    1,780
  • Paritosh Chair

    BSP

    1,598
  • Apurba Chakraborty

    SUCI

    1,472
WINNER

Rabindranath Chatterjee

AITC
वोट91,489
विजेता पार्टी का वोट %44.8 %
जीत अंतर %0.4 %

कटवा विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Shyama Majumdar

    INC

    90,578
  • Anil Dutta

    BJP

    14,939
  • Nota

    NOTA

    2,081
  • Krishnadas Saha

    PDS

    1,800
  • Apurba Chakraborty

    SUCI

    1,690
  • Sridam Goldar

    BSP

    1,614
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से जुड़े Frequently Asked Questions (FAQs)

कटवा विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2021) विधायक कौन हैं?

2021 में कटवा में AITC का विजयी वोट प्रतिशत कितना था?

2021 के कटवा चुनाव में Rabindranath Chatterjee को कितने वोट मिले थे?

2021 में कटवा सीट पर उपविजेता कौन था?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 कब आयोजित होंगे?

पिछले कटवा विधानसभा चुनाव 2021 किस पार्टी ने जीता था?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम 2026 कब घोषित होंगे?

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