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सिंगूर विधानसभा चुनाव 2026 (Singur Assembly Election 2026)

सिंगूर का नाम आते ही सबसे पहले उस किसान आंदोलन की याद ताजा हो जाती है, जिसने पश्चिम बंगाल में तीन दशक से अधिक समय से सत्तारूढ़ वाम मोर्चा सरकार को हिला कर रख दिया था. 2006 में बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार ने हुगली जिले के सिंगूर ब्लॉक में 997 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया. उद्देश्य था- उन उद्योगों को वापस लाना,

जो 1977 में वाम मोर्चा के सत्ता में आने के बाद ट्रेड यूनियन की आक्रामकता के चलते एक-एक कर राज्य से बाहर चले गए थे. यह जमीन टाटा मोटर्स को उनकी छोटी कार ‘नैनो’ के निर्माण के लिए दी जानी थी.

लेकिन जमीन अधिग्रहण का किसानों ने तीखा विरोध किया. पुलिस के साथ झड़पें हुईं और CPI(M) कार्यकर्ताओं पर अत्याचार के आरोप लगे. इसी दौर में ममता बनर्जी, जिनकी तृणमूल कांग्रेस 2006 के विधानसभा चुनाव में 60 से घटकर 30 सीटों पर सिमट गई थी, किसानों के साथ खड़ी हो गईं. जब उन्हें सिंगूर जाने की अनुमति नहीं मिली, तो उन्होंने कोलकाता में 26 दिन का अनशन शुरू किया. नागरिक अधिकार समूहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन बढ़ता गया और सिंगूर का मुद्दा राज्य की राजनीति का केंद्र बन गया.

आखिरकार टाटा मोटर्स ने परियोजना वापस ले ली और गुजरात को यह अवसर मिला. पर राजनीतिक रूप से इसका फायदा ममता बनर्जी को मिला, जिनके नेतृत्व में तृणमूल ने 2011 में वाम मोर्चा को सत्ता से बेदखल कर 34 साल पुराने शासन का अंत कर दिया. विडंबना यह है कि जिस औद्योगिकीकरण के नाम पर यह संघर्ष शुरू हुआ था, वह आज तक साकार नहीं हो पाया और बंगाल के युवक रोजगार की तलाश में लगातार राज्य छोड़ते रहे हैं.

सिंगूर विधानसभा क्षेत्र पिछले बीस वर्षों से ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस का मजबूत आधार रहा है. यह हुगली लोकसभा क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से एक है और सामान्य श्रेणी का निर्वाचन क्षेत्र है. वर्तमान स्वरूप में इसमें सिंगूर ब्लॉक के 13 ग्राम पंचायत और चांदितला–II ब्लॉक के तीन ग्राम पंचायत शामिल हैं.

1951 में स्थापित इस सीट पर अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. CPI(M) ने यहां पांच बार, उसके सहयोगी CPI ने तीन बार और कांग्रेस ने चार बार जीत दर्ज की है. लेकिन 2001 से अब तक तृणमूल कांग्रेस लगातार पांच बार यह सीट जीत चुकी है.

सिंगूर आंदोलन के प्रभाव का असर अगले चुनाव में ही दिख गया. तृणमूल के रवींद्रनाथ भट्टाचार्य, जो 2001 और 2006 में क्रमशः 4,770 और 1,787 वोटों के मामूली अंतर से जीत पाए थे, 2011 में 34,811 वोटों से लुढ़का मार गए. 2016 में जीत का अंतर कुछ कम होकर 20,327 पर आ गया.

2021 में जब भट्टाचार्य को टिकट नहीं मिला और उन्होंने BJP का दामन थाम लिया, तब भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा. तृणमूल के बेचूराम मन्ना ने उन्हें 25,923 वोटों से हराया. परिणाम ने स्पष्ट कर दिया कि सिंगूर की वफादारी व्यक्ति से नहीं, ममता बनर्जी से जुड़ी है. भट्टाचार्य की मौजूदगी ने बस इतना किया कि BJP ने CPI(M) को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल कर लिया.

2019 लोकसभा चुनाव में BJP ने पहली बार बड़ा असर दिखाया और सिंगूर में 10,429 वोटों की बढ़त बना ली. लेकिन 2024 में तृणमूल ने फिर से बढ़त हासिल कर ली और BJP को 18,826 वोटों से पीछे कर दिया.

सिंगूर में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. साल 2019 में 2,41,112, 2021 में 2,46,867, और 2024 में 2,51,585 रही. 2021 के आंकड़ों के अनुसार, यहां 15.49% अनुसूचित जाति, 1.67% अनुसूचित जनजाति और 11.50% मुस्लिम मतदाता हैं. क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां केवल 34.83% वोटर शहरी इलाकों में रहते हैं. मतदान प्रतिशत लगातार ऊंचा रहा है,2024 में 83.64%, 2021 में 85.15%, 2019 में 83.14% और 2016 में 84.64% था.

सिंगूर हुगली नदी के मैदानी इलाकों में स्थित है. यहां की समतल जमीन और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी गहन कृषि को प्रोत्साहित करती है. दामोदर और सरस्वती नदियां सिंचाई के प्रमुख स्रोत हैं. प्रमुख फसलें धान, सब्जियां और फूल हैं. क्षेत्र में छोटे उद्योग, चावल मिलें और कोल्ड स्टोरेज भी हैं. सड़क संपर्क काफी अच्छा है और कोलकाता–हावड़ा से कनेक्टिविटी मजबूत है. बिजली और मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध हैं. जलापूर्ति मुख्यतः ट्यूबल और कुछ क्षेत्रों में पाइपलाइन से होती है. स्वास्थ्य सुविधाएँ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और एक उप–डिविजनल अस्पताल के माध्यम से उपलब्ध हैं.

भौगोलिक रूप से सिंगूर हुगली-चुंचुड़ा से 21 किमी, कोलकाता से लगभग 30 किमी दूर है. आसपास के प्रमुख शहर चंदननगर (16.5 किमी), रिषड़ा (16 किमी), कोन्नगर (17 किमी) और सैरमपुर (13 किमी) हैं. उत्तर में पांडुआ (31 किमी) और पश्चिम में तारकेश्वर (23 किमी) स्थित हैं.

तृणमूल कांग्रेस की लगातार पांच जीत और हर बार बढ़ते मतांतर यह संकेत देते हैं कि 2026 के विधानसभा चुनाव में इस सीट को जीतना विपक्ष के लिए बेहद कठिन होगा. BJP अभी भी तृणमूल से काफी पीछे है और CPI(M) अपने सुनहरे अतीत की केवल परछाईं बनकर रह गई है. आखिरी चुनावों में 10% से भी कम वोट मिले. ऐसे में यदि कोई मुद्दा तृणमूल के खिलाफ माहौल बना सकता है तो वह है विकास की कमी.

सिंगूर के मतदाताओं का ममता बनर्जी के प्रति प्यार तो कायम है, मगर उनके जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है. यही असंतोष 2026 में चुनावी नैरेटिव बदलने का एकमात्र आधार बन सकता है.

(अजय झा)

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सिंगूर विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2021
2016
WINNER

Becharam Manna

AITC
वोट1,01,077
विजेता पार्टी का वोट %48.1 %
जीत अंतर %12.3 %

सिंगूर विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Rabindranath Bhattacharya

    BJP

    75,154
  • Srijan Bhattacharyya

    CPI(M)

    30,016
  • Nota

    NOTA

    2,345
  • Shankar Jana

    SUCI

    1,346
WINNER

Rabindranath Bhattacharya E

AITC
वोट96,212
विजेता पार्टी का वोट %49.2 %
जीत अंतर %10.4 %

सिंगूर विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Rabin Deb

    CPM

    75,885
  • Patra Souren

    BJP

    14,264
  • Nota

    NOTA

    3,098
  • Dwijaprosad Bhattacharya

    IND

    2,606
  • Uma Das(paul)

    FDLP

    1,712
  • Shankar Jana

    SUCI

    1,667
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से जुड़े Frequently Asked Questions (FAQs)

सिंगूर विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2021) विधायक कौन हैं?

2021 में सिंगूर में AITC का विजयी वोट प्रतिशत कितना था?

2021 के सिंगूर चुनाव में Becharam Manna को कितने वोट मिले थे?

2021 में सिंगूर सीट पर उपविजेता कौन था?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 कब आयोजित होंगे?

पिछले सिंगूर विधानसभा चुनाव 2021 किस पार्टी ने जीता था?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम 2026 कब घोषित होंगे?

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