पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में स्थित चुंचुड़ा विधानसभा क्षेत्र, हुगली लोकसभा सीट के सात खंडों में से एक है. इसमें हुगली-चुंचुड़ा नगर पालिका, चिनसुरा-मोगरा ब्लॉक के चार ग्राम पंचायत और पोल्बा-दादपुर ब्लॉक के तीन ग्राम पंचायत शामिल हैं. 1951 में पहले विधानसभा चुनाव से ही यह सीट बंगाल की राजनीतिक मानचित्र का हिस्सा रही है.
में 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 1973 का उपचुनाव भी शामिल है. इस सीट पर सबसे ज्यादा बार जीत हासिल करने वाली पार्टी ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक रही है, जिसने 11 बार कब्जा जमाया. इसके प्रमुख नेताओं में शंभु चरण घोष और नरेन डे का नाम खास है, जिन्होंने पांच-पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. नरेन डे ने 1987 से 2006 तक लगातार जीत दर्ज की. कांग्रेस ने यहां तीन बार जीत हासिल की, जबकि 1973 के उपचुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा. 2011 से यह सीट तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पास है, जहां असीत मजूमदार लगातार तीन बार जीत चुके हैं. 2011 में उन्होंने नरेन डे को 44,592 वोटों से हराकर पहली बार सीट जीती थी. हालांकि, इसके बाद से उनके जीत के अंतर लगातार घटते गए- 2016 में 29,684 वोट और 2021 में 18,417 वोटों का अंतर रहा.
2021 में भाजपा ने हुगली से सांसद और मशहूर फिल्म अभिनेत्री लॉकेट चटर्जी को चुंचुड़ा से मैदान में उतारा था. उन्होंने दमदार प्रदर्शन करते हुए फॉरवर्ड ब्लॉक को तीसरे स्थान पर धकेल दिया और टीएमसी की बढ़त घटा दी. 2024 लोकसभा चुनाव में भी चुंचुड़ा खंड में भाजपा को बढ़त मिली, जिससे अटकलें लग रही हैं कि 2026 में पार्टी दोबारा लॉकेट चटर्जी को उतार सकती है. दूसरी ओर, कांग्रेस और वाम मोर्चा (फॉरवर्ड ब्लॉक सहित) के गठबंधन में साथ आने से तृणमूल का वोट बैंक बंट सकता है और मुकाबला और भी कड़ा हो सकता है.
2021 विधानसभा चुनाव में चुंचुड़ा सीट पर कुल 3,14,274 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें अनुसूचित जाति के मतदाता 21.62%, मुस्लिम मतदाता लगभग 7% और अनुसूचित जनजाति 3.71% थे। यह क्षेत्र मुख्य रूप से शहरी है - 74.54% मतदाता नगर क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि 25.46% ग्रामीण इलाकों से आते हैं. मतदान प्रतिशत यहां लगातार ऊंचा रहता है. 2021 में 81.06% मतदान हुआ, जो 2016 के 82.25% से थोड़ा कम और 2019 के 81.19% के बराबर है.
चुंचुड़ा हुगली नदी के पश्चिमी किनारे पर बसा है, जो कोलकाता से लगभग 35 किलोमीटर उत्तर में स्थित है. यह क्षेत्र निचले गंगीय मैदान की तरह उपजाऊ और समतल है. नदी कृषि, व्यापार और परिवहन के लिए सहायक है. ऐतिहासिक रूप से चुंचुड़ा 1635 में डच उपनिवेश था, जिसे 1825 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने कब्जे में लिया. आज भी यहां औपनिवेशिक दौर की इमारतें और चर्च देखने को मिलते हैं.
स्थानीय अर्थव्यवस्था कृषि, लघु उद्योग और सेवा क्षेत्र पर आधारित है. धान, जूट और सब्जियों की खेती प्रमुख है. नगर में व्यापारिक केंद्र, शैक्षणिक संस्थान और सरकारी कार्यालय मौजूद हैं. हुगली-चुंचुड़ा नगर पालिका कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (KMDA) के तहत आती है, जिससे बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है. चुंचुड़ा रेलवे स्टेशन हावड़ा–बर्दवान मेन लाइन पर स्थित है, जो इसे कोलकाता और अन्य शहरों से जोड़ता है.
चुंचुड़ा से बैंडेल (5 किमी), चंदननगर (10 किमी) और श्रीरामपुर (15 किमी) जैसे प्रमुख शहर पास में हैं. जिला मुख्यालय हुगली भी इसी क्षेत्र में आता है. राज्य की राजधानी कोलकाता यहां से करीब 35 किलोमीटर दक्षिण में है. यह इलाका उत्तर 24 परगना और हावड़ा जैसे जिलों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है.
तकनीकी रूप से देखें तो तृणमूल कांग्रेस को यहां लगातार जीत का फायदा मिल सकता है. लेकिन भाजपा का उभार, खासकर यदि लॉकेट चटर्जी को दोबारा टिकट मिलता है, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है. वहीं, कांग्रेस-वाम मोर्चा गठबंधन भी तृणमूल की मुश्किलें बढ़ा सकता है, क्योंकि इससे उसका परंपरागत वोट बैंक फिर से खिसक सकता है. कुल मिलाकर, चुंचुड़ा सीट 2026 विधानसभा चुनाव में बंगाल की सबसे हॉट सीटों में से एक बनने की ओर अग्रसर है.
(अजय झा)