आसनसोल दक्षिण, पश्चिम बर्धवान जिले का एक सामान्य वर्ग का विधानसभा क्षेत्र है, जो आसनसोल लोकसभा सीट के सात खंडों में से एक है. वर्ष 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद इस क्षेत्र का गठन हुआ. इसके तहत पुराने आसनसोल विधानसभा क्षेत्र को दो हिस्सों- आसनसोल दक्षिण और आसनसोल उत्तर में विभाजित किया गया. यह क्षेत्र आसनसोल नगर निगम के 22 वार्डों और
रानीगंज सामुदायिक विकास खंड की पांच ग्राम पंचायतों से मिलकर बना है. यहां केवल 5.55 प्रतिशत ग्रामीण मतदाता हैं, इसलिए यह पूरी तरह शहरी क्षेत्र माना जाता है.
अब तक इस सीट पर तीन विधानसभा चुनाव हुए हैं. 2011 और 2016 में तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जब तपस बनर्जी ने लगातार दो बार सीपीएम उम्मीदवारों को पराजित किया. 2011 में उन्होंने सीपीएम के आलोक कुमार मुखर्जी को 28,541 वोटों से हराया, जबकि 2016 में सीपीएम के हेमंत प्रभाकर को 14,283 वोटों से मात दी.
हालांकि, 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने रणनीति बदलते हुए तपस बनर्जी को रानीगंज से चुनाव लड़ाया और आसनसोल दक्षिण से फिल्म अभिनेत्री सायोनी घोष को मैदान में उतारा. यह फैसला पार्टी के लिए उल्टा पड़ गया और भाजपा की उम्मीदवार तथा फैशन डिजाइनर अग्निमित्रा पॉल ने 4,487 वोटों से जीत दर्ज कर ली. यह भाजपा की इस सीट पर पहली विजय थी.
गौरतलब है कि इस सीट पर उम्मीदवारों के चेहरे लगातार बदलते रहे हैं. न तो सीपीएम और न ही भाजपा ने अब तक किसी प्रत्याशी को लगातार दूसरी बार मौका दिया. तृणमूल की रणनीति ने तपस बनर्जी को रानीगंज में तो सफलता दिलाई, लेकिन आसनसोल दक्षिण में हार का सामना करना पड़ा.
भाजपा की जीत केवल 2021 तक सीमित नहीं रही. पार्टी लगातार इस क्षेत्र में अपनी जड़ें मजबूत करती रही है. 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने आसनसोल दक्षिण खंड में 21,062 वोटों की बढ़त बनाई थी. यह बढ़त 2019 में बढ़कर 53,820 हो गई, जबकि 2024 में घटकर 12,157 पर आ गई. इन आंकड़ों से साफ है कि भाजपा का आधार खासतौर पर हिंदी भाषी मतदाताओं के बीच लगातार बढ़ रहा है. अनुमान है कि इस क्षेत्र में हिंदी भाषी मतदाता, जिनकी जड़ें मुख्य रूप से बिहार और झारखंड से जुड़ी हैं, कुल मतदाताओं का 35 से 40 प्रतिशत तक हो सकते हैं.
2021 के विधानसभा चुनावों में आसनसोल दक्षिण में 2,74,245 पंजीकृत मतदाता थे. यह संख्या 2019 में 2,58,223 और 2016 में 2,47,366 थी. यहां मुस्लिम मतदाता लगभग 12.30 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की हिस्सेदारी क्रमशः 20.56 प्रतिशत और 6.50 प्रतिशत है. मतदान प्रतिशत भी स्थिर रहा है - 2021 में 74.01 प्रतिशत, 2019 में 75.48 प्रतिशत और 2016 में 75.08 प्रतिशत.
आसनसोल शहर इस विधानसभा क्षेत्र का मुख्य केंद्र है. यह पश्चिम बंगाल का कोलकाता के बाद दूसरा सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है. झारखंड की सीमा से लगे इस इलाके का भूभाग ऊबड़-खाबड़ है और इसमें कोयले की खदानें व वन क्षेत्र पाए जाते हैं. दामोदर नदी यहां से होकर गुजरती है, लेकिन औद्योगिक उपयोग और प्रदूषण के कारण इसका सिंचाई में योगदान सीमित है. यह क्षेत्र रानीगंज कोलफील्ड का हिस्सा है, जो भारत के सबसे पुराने कोयला खनन क्षेत्रों में से एक है.
खनन के अलावा इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था इस्पात और रेलवे उद्योगों पर आधारित है. इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी (IISCO) और ईस्टर्न रेलवे की वर्कशॉप्स यहां रोजगार का बड़ा स्रोत रही हैं. हालांकि, हाल के वर्षों में मशीनीकरण और कर्मचारियों की संख्या घटाने से नौकरियों में कमी आई है.
आसनसोल, कोलकाता से लगभग 210 किमी दूर स्थित है. पश्चिम बंगाल में इसके आसपास दुर्गापुर (50 किमी), रानीगंज (15 किमी), जामुरिया (10 किमी) और बर्दवान (100 किमी) प्रमुख शहर हैं. झारखंड की ओर धनबाद (45 किमी), चिरकुंडा (25 किमी) और झरिया (50 किमी) नजदीकी कस्बे हैं.
जैसे-जैसे 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, आसनसोल दक्षिण में फिर से कड़ा मुकाबला होने की संभावना है. भाजपा, जो अपने प्रवासी मतदाताओं के समर्थन और हाल की जीत से उत्साहित है, सीट को बरकरार रखना चाहेगी. वहीं तृणमूल कांग्रेस, जिसने 2021 में गलती की थी, इस बार अपनी रणनीति पर खास ध्यान देगी. इस बार भी किसी पार्टी के पास स्पष्ट बढ़त नहीं है, ऐसे में हर वोट निर्णायक साबित हो सकता है.
आसनसोल दक्षिण निश्चित रूप से पश्चिम बंगाल के सबसे हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबलों में से एक होगा.
(अजय झा)