उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027: बीएसपी ने दलित-ओबीसी भाईचारा कमेटी से मजबूत की चुनावी रणनीति

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बसपा ने दलित और ओबीसी वर्ग के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए भाईचारा कमेटी की बैठकों का आयोजन शुरू कर दिया है. पार्टी के जिला संयोजक जमीनी स्तर पर वोट बैंक की स्थिति का आकलन कर रहे हैं, जिसकी रिपोर्ट मायावती को पेश की जाएगी.

Advertisement
 बसपा के कार्यकर्ता ( PHOTO-ITGD) बसपा के कार्यकर्ता ( PHOTO-ITGD)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 11 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:51 PM IST

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बहुजन समाज पार्टी ने अपनी कमर कस ली है. 22 जून को बीएसपी की फैजाबाद में एक बड़ी रैली है. इस बीच अब बसपा ने उत्तर प्रदेश में भाईचारा कमेटी की बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है. बैठकों में दलित और ओबीसी वर्ग के जिला संयोजकों को बुलाया गया है, जो अपने-अपने जिलों की संगठनात्मक और राजनीतिक रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेंगे.

Advertisement

सभी जिलों से प्राप्त रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल के माध्यम से बसपा सुप्रीमो मायावती को प्रस्तुत की जाएगी.अलग-अलग चरणों में आयोजित हो रही इन बैठकों में एससी और ओबीसी प्रतिनिधि जमीनी स्तर पर बसपा के वोट बैंक की स्थिति का आकलन कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें: BSP Crisis 2027: बसपा में आउटगोइंग जारी, मायावती की रणनीति पर सवाल

दलित और पिछड़ा वर्ग पर विशेष फोकस

उत्तर प्रदेश में दलित और पिछड़ा वर्ग एक बड़ा वोट बैंक है. इसी को ध्यान में रखते हुए बसपा ओबीसी और दलितों पर विशेष फोकस कर रही है. जमीनी स्तर पर आकलन करने के बाद संयोजक यह रिपोर्ट देंगे कि दलित और पिछड़ा वर्ग का समर्थन किस हद तक अब भी बसपा के साथ बना हुआ है और संगठन की वर्तमान स्थिति क्या है. इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की रणनीति को तैयार किया जाएगा.भाईचारा कमेटी की इस कवायद का उद्देश्य दलित और ओबीसी समाज के बीच समन्वय को मजबूत करना तथा दोनों वर्गों को एकजुट कर पार्टी के साथ जोड़कर रखना है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: एसआईआर के नफा-नुकसान भांप रहीं मायावती, बसपा नई रणनीति से तय कर रही कैंडिडेट

अपने पारंपरिक वोट बैंक को साधने में जुटी है बसपा

बीते कुछ सालों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा धरातल पर आ चुकी है. उसका अपना वोट बैंक ही पार्टी से दूर जा रहा है. ऐसे में बसपा आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने और अपने पारंपरिक वोट बैंक को फिर सक्रिय करने पर फोकस कर रही है.

समाजवादी पार्टी के पिछड़ा दलित PDA के जवाब में भाईचारा कमेटी

समाजवादी पार्टी के पिछड़ा दलित PDA के जवाब में भाईचारा कमेटी को देखा जा रहा है. जिससे बसपा का कोर वोट बैंक न टूटे. बसपा इस कवायद में लगी हुई है कि किसी तरह वह अपने पारंपरिक वोट बैंक को फिर से पार्टी के साथ जोड़ सके.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »