पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बहुल बूथ पर BJP को 97% वोट, आखिरी राउंड में ऐसे पलटी बाजी

बंगाल की राजारहाट न्यू टाउन सीट का नतीजा अब बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है. मुस्लिम-बहुल मुसलमान पाड़ा के एक बूथ पर BJP को 97% वोट मिलने के बाद TMC ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. अब EVM से लेकर काउंटिंग प्रक्रिया तक पर बहस छिड़ गई है.

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बंगाल की राजारहाट न्यू टाउन सीट पर आखिरी राउंड के बाद बदला नतीजा. (File Photo: ITG) बंगाल की राजारहाट न्यू टाउन सीट पर आखिरी राउंड के बाद बदला नतीजा. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 23 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:19 PM IST

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में BJP की बड़ी जीत के बीच राजारहाट न्यू टाउन सीट का नतीजा अब विवाद का विषय बन गया है. इस सीट पर मुकाबला इतना करीबी था कि आखिरी राउंड तक तस्वीर साफ नहीं हो पाई. लेकिन 5 मई को वोटों की गिनती के अंतिम चरण में मुसलमान पाड़ा के बूथ नंबर 164 की काउंटिंग होते ही पूरा नतीजा BJP के पक्ष में पलट गया.

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आखिरकार BJP उम्मीदवार पीयूष कनौजिया ने तृणमूल कांग्रेस के तापस चटर्जी को महज 316 वोटों के अंतर से हरा दिया. Scroll की रिपोर्ट के मुताबिक, खास बात यह रही कि जिस समय तक बूथ नंबर 164 की गिनती नहीं हुई थी, तब तक TMC उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए थे. मुसलमान पाड़ा स्थित बूथ नंबर 164 पर BJP को रिकॉर्ड 97 प्रतिशत वोट मिले. इसके बाद BJP ने सीट अपने नाम कर ली. 

इसके बाद TMC ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. राजारहाट न्यू टाउन सीट पर वोटों की गिनती कुल 18 राउंड में हुई थी. 4 मई तक 17 राउंड की गिनती पूरी हो चुकी थी. आधी रात तक TMC उम्मीदवार तापस चटर्जी 316 वोटों की मामूली बढ़त बनाए हुए थे. लेकिन बूथ नंबर 164 की गिनती उस दिन नहीं हुई.

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इसे अगले दिन अलग से गिना गया. बताया गया कि यह एकमात्र बूथ था जिसकी काउंटिंग बाकी रह गई थी. 5 मई को जब 18वें और अंतिम राउंड में इसकी गिनती हुई तो नतीजे चौंकाने वाले रहे. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बूथ नंबर 164 पर कुल 656 वोट पड़े थे. इनमें से BJP को 637 वोट मिले, जबकि TMC को सिर्फ 5 वोट हासिल हुए. 

इस बूथ पर पड़े कुल वोटों में से करीब 97 प्रतिशत वोट BJP के पक्ष में गए. बूथ नंबर 164 में पड़े 637 वोटों में से 558 वोट मुस्लिम मतदाताओं के थे. इसका मतलब यह हुआ कि इस बूथ पर बड़ी संख्या में मुस्लिम वोट BJP के पक्ष में गए. बंगाल की पारंपरिक चुनावी राजनीति और पिछले चुनावी रुझानों को देखते हुए इसे बेहद असामान्य माना जा रहा है.

यही वजह रही कि बूथ नंबर 164 की गिनती पूरी होते ही TMC की बढ़त खत्म हो गई और BJP उम्मीदवार पीयूष कनौजिया 316 वोटों से चुनाव जीत गए. दिलचस्प बात यह है कि जितने वोटों से BJP पीछे चल रही थी, उतने ही वोटों के अंतर से उसने जीत दर्ज की. इस पूरे विवाद के बीच मुसलमान पाड़ा के दूसरे बूथ यानी बूथ नंबर 165 के नतीजों ने भी सवाल खड़े किए हैं. 

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दोनों बूथ एक ही इलाके में स्थित हैं. दोनों जगह मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है. मतदाताओं ने एक ही मतदान केंद्र, जगदीशपुर स्कूल, में वोट डाले थे. लेकिन बूथ नंबर 165 का मतदान पैटर्न पूरी तरह अलग दिखाई दिया. यहां 91 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम थे, लेकिन BJP को 638 वोटों में से सिर्फ 32 वोट मिले. यानी करीब 5 प्रतिशत वोट ही BJP के खाते में गए. 

इस बूथ पर सबसे ज्यादा वोट लेफ्ट उम्मीदवार को मिले, जिन्हें 299 वोट हासिल हुए, जबकि TMC को 290 वोट मिले. यानी एक ही इलाके के दो मुस्लिम-बहुल बूथों पर मतदान का रुझान बिल्कुल अलग नजर आया. एक बूथ पर BJP को 97 प्रतिशत वोट मिले, जबकि दूसरे बूथ पर TMC और लेफ्ट को बढ़त मिली. इसी विरोधाभास ने मामले को विवादित बना दिया है.

राजारहाट सीट के नतीजे सामने आने के बाद TMC ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए. राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि आखिरी राउंड में मुस्लिम-बहुल बूथ की गिनती तय क्रम से पहले कराई गई और उसी बूथ से BJP को 97 प्रतिशत वोट मिले. उन्होंने चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और मुख्य चुनाव पर भी निशाना साधा. 

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी इस मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यदि किसी मुस्लिम-बहुल बूथ पर BJP को 97 प्रतिशत वोट मिलते हैं तो यह या तो EVM में हेरफेर, या फिर काउंटिंग डेटा में गड़बड़ी की ओर इशारा करता है. इस पूरे विवाद ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है. 

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पिछले आंकड़ों के अनुसार, 2021 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनावों में BJP को बंगाल के मुस्लिम वोटों का सिर्फ 4 से 7 प्रतिशत समर्थन मिला था. वहीं TMC को करीब 70 से 75 प्रतिशत मुस्लिम वोट हासिल हुए थे. 2011 में सत्ता में आने के बाद से ममता बनर्जी की योजनाओं और अल्पसंख्यक समर्थन के चलते मुस्लिम वोट बैंक बड़े पैमाने पर TMC के साथ बना रहा. 

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