दिल्ली यूनिवर्सिटी रिसर्च में इंडस्ट्री के रोल को देगी मजबूती...

दिल्ली यूनिवर्सिटी के भीतर होने वाले रिसर्च वर्क में इंडस्ट्री को मजबूती देने के लिए हो रहा काम. रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए नई ड्राफ्ट पॉलिसी पर हो रहा तेजी से काम...

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विष्णु नारायण

  • नई दिल्ली,
  • 22 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 11:09 AM IST

दिल्ली यूनिवर्सिटी के भीतर होने वाले रिसर्च में इंडस्ट्री के रोल को और भी मजबूत किया जाएगा. ऐसे रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए नई ड्राफ्ट पॉलिसी पर तेजी से काम हो रहा है.

साल भर के भीतर दिल्ली विश्वविद्यालय कुल 400 डॉक्टरेट देती है. इस वर्ष यह आकड़ा 600 है. इसकी वजह से विश्वविद्यालय को बाहर से 300 करोड़ रुपये मिलते हैं. यूनिवर्सिटी की के पीछे रिसर्च एक बड़ी वजह होती है. यहां के दस्तावेज यूनिवर्सिटी स्तर पर ग्रांट की संख्या बढ़ाने, नए संस्थान और थीमों को राष्ट्रीय और सामाजिक जरूरतों के हिसाब से तैयार किए जाते हैं.

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यूनिवर्सिटी-इंडस्ट्री सेल ऐसी कोशिश में है कि इंडस्ट्री के साथ सहयोग बढ़ाया जाए. यह अकैडमिक्स और इंडस्ट्री को साथ लाने में सहयोग करेगा. इस सहयोग और लिंकेज से एक डाटाबेस के निर्माण की भी उम्मीद बंधी है.

यूनिवर्सिटी की आभा देव हबीब ऐसे किसी गठजोड़ से आगाह करती हैं. वह कहती हैं कि यदि इस गठजोड़ के मार्फत लैब में काम करना और किसी चिप को बनाना है तो ठीक है. मगर इंडस्ट्री के किसी दिशा विशेष में रिसर्च और परिणाम को प्रभावित भी करना चाहेगा.

इन ड्राफ्टों के सलाह में लैब के लिए मेंटेनेंस ग्रांट और किसी व्यक्ति के लिए महंगे हो सकने वाले ग्रांट भी शामिल होंगे. वे रिसर्च स्टार्ट-अप्स में मदद करेंगे. इस ड्राफ्ट में डिपार्टमेंट स्तर पर की पेशकश की गई है. इंडस्ट्री की स्थापित शख्सियतें विजिटिंग प्रोफेसर होंगी.

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फैकल्टी के सदस्यों को किन्हीं विशेष रिसर्च परफॉर्मेंस, पेटेंट के लिए फाइल करने, इंडस्ट्री को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने के मामले में ग्रांट दिए जाएंगे. इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय पोस्ट डॉक्टोरल अवॉर्डों के साथ-साथ विजिटिंग फेलोशिप भी दी जाएगी. इस ड्राफ्ट में कॉलेज के शिक्षकों के साथ-साथ स्टूडेंट्स को ट्रैवल ग्रांट दिए जाने की बात भी कही गई है.

देव हबीब कहती हैं कि यूनिवर्सिटी को और प्रोग्राम शुरू करने से पहले इनोवेशन केन्द्र के आउटकम का अंदाजा लगा लेना चाहिए. वह आगे कहती हैं कि शिक्षकों का एक बड़ा हिस्सा गेस्ट फैकल्टी है और सेमेस्टर सिस्टम ने रिसर्च के क्वालिटी टाइम में घुसपैठ की है. यहां पढ़ाई और रिसर्च में कोई आम सुविधा नहीं है.

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