उत्तर प्रदेश में आज से प्रदेश की सबसे बड़ी सिपाही भर्ती परीक्षा का शंखनाद हो चुका है. पुलिस महकमे में 32,679 पदों पर होने वाली इस महा-परीक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों का असर जमीन पर साफ दिख रहा है.परीक्षा को पूरी तरह 'लीक-प्रूफ' और पारदर्शी बनाने के लिए यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड और यूपी एसटीएफ (UPSTF) ने सुरक्षा का ऐसा डिजिटल चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसे भेदना सॉल्वर गैंग के लिए ही नहीं, बल्कि उनके मददगारों के लिए भी नामुमकिन होगा.
अगर आप भी इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं या इससे जुड़े हैं, तो इस महा-कवरेज में जानिए परीक्षा की हर छोटी-बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण गाइडलाइंस.
3 दिन, 2 पालियां और 75 जिले...
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में आयोजित हो रही इस परीक्षा के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. भर्ती बोर्ड की मुस्तैदी को इस तरह समझा जा सकता है. ये परीक्षा 8, 9 और 10 जून को दो पालियों (शिफ्ट) में आयोजित की जा रही है. पहली शिफ्ट सुबह 10 से 12 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 से शाम 5 बजे तक होगी. प्रदेश के 1,183 परीक्षा केंद्रों पर 28 लाख 80 हजार से अधिक अभ्यर्थी अपना भाग्य आजमा रहे हैं.
बिना स्पेशल आई-कार्ड नो एंट्री
परीक्षा को सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस बल के अतिरिक्त 60,000 से ज्यादा कर्मचारियों को ड्यूटी पर तैनात किया गया है. इस बार भर्ती बोर्ड ने सिर्फ अभ्यर्थियों पर ही नहीं, बल्कि परीक्षा कराने वाले स्टाफ पर भी नकेल कसी है. अक्सर देखा गया है कि स्थानीय स्तर पर मिलीभगत से गड़बड़ी होती है, इसलिए बोर्ड ने इस बार अभूतपूर्व फैसला लिया है.
ड्यूटी पर तैनात हर कक्ष निरीक्षक (Invigilator) से लेकर स्कूल के चपरासी तक का विशेष आई-कार्ड खुद भर्ती बोर्ड ने जारी किया है. इसके बिना किसी भी स्टाफ को केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा. ड्यूटी देने वाले हर कर्मचारी की गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है.
'सॉल्वर' ही नहीं, मददगार भी नपेंगे
तकनीक के मोर्चे पर इस बार परीक्षा केंद्र किसी किले से कम नहीं हैं. पूरे प्रदेश में 32,000 सीसीटीवी कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है.
3-लेयर मॉनिटरिंग: परीक्षा कक्ष का सीसीटीवी सीधे केंद्र के कंट्रोल रूम से जुड़ा है. केंद्र का कंट्रोल रूम जिला स्तर के कंट्रोल रूम से और जिला कंट्रोल रूम सीधे लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती प्रोन्नति बोर्ड के आला अधिकारियों की लाइव निगरानी में है.
मूवमेंट पैटर्न ट्रैकिंग: इस बार साधारण कैमरों के बजाय AI-बेस्ड (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कैमरे लगाए गए हैं. ये कैमरे संदिग्ध अभ्यर्थियों की थर्मल स्कैनिंग तो करेंगे ही, साथ ही परीक्षा कक्ष में मौजूद कर्मचारियों और छात्रों के 'मूवमेंट पैटर्न' (गतिविधि के तरीके) को भांपकर कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देंगे.
कलावा और मंगलसूत्र उतारने की मजबूरी नहीं
जहाँ एक तरफ सुरक्षा बेहद सख्त है, वहीं दूसरी तरफ बोर्ड ने अभ्यर्थियों की धार्मिक भावनाओं का पूरा ख्याल रखा है. अक्सर चेकिंग के नाम पर कलावा काटने या शादीशुदा महिलाओं के मंगलसूत्र उतरवाने पर विवाद होता था. इस बार बोर्ड ने साफ कर दिया है कि परीक्षार्थियों के लिए धार्मिक चिन्ह, कलावा धागा या मंगलसूत्र उतारना आवश्यक नहीं है. छात्र पूरी श्रद्धा और शांति के साथ परीक्षा दे सकते हैं.
STF की सभी यूनिट्स हाई अलर्ट पर
पेपर लीक माफिया और सॉल्वर गैंग के मंसूबों को मिट्टी में मिलाने के लिए यूपी एसटीएफ (UPSTF) पूरी तरह मुस्तैद है. पहले से चिन्हित अपराधियों पर एसटीएफ पहले से नजर रखे हुए थी और अब मेरठ, नोएडा, बरेली, आगरा, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर और अयोध्या की सभी एसटीएफ यूनिट्स को हाई अलर्ट पर डाल दिया गया है.
याद रहे नया कानून!
यदि कोई भी इस परीक्षा में सेंधमारी करने, पेपर लीक करने या सॉल्वर गैंग चलाने की कोशिश करते पकड़ा गया, तो उस पर नए सख्त कानून के तहत कार्रवाई होगी. इसमें 50 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगेगा. दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा होगी. इतना ही नहीं, गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराधियों की संपत्ति की कुर्की भी तुरंत की जाएगी.
वैसे सरकार का यह सख्त रुख यह साफ करता है कि अब युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों का ठिकाना सिर्फ और सिर्फ जेल की कालकोठरी होगी. अभ्यर्थियों से अपील है कि वे किसी भी बहकावे में न आएं और अपनी मेहनत पर भरोसा रखें.
संतोष शर्मा