कैंटीन में तोड़फोड़, दरवाजे तोड़े, कई छात्र हिरासत में... जामिया में अब क्यों हो रहा बवाल?

विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि "छात्रों ने विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन किया और आपत्तिजनक सामग्री के साथ पकड़े गए. विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वविद्यालय संपत्ति को हुए नुकसान, दीवारों की तोड़-फोड़ और कक्षाओं में रुकावट को देखते हुए उपाय किए हैं ताकि शैक्षिक गतिविधियां सामान्य रूप से चल सकें."

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 1:03 PM IST

दिल्ली पुलिस ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के 10 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया है. इन दो छात्रों को पिछले साल एक विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के आरोप में शो-कॉज नोटिस जारी किए गए थे. दरअसल, साल 2019 में जामिया यूनिवर्सिटी में सीएए को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठी चार्ज किया था और फायरिंग भी हुई थी. इस मामले को लेकर कुछ स्टूडेंट्स इसकी बरसी बनाना चाहते थे, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उसकी अनुमति नहीं दी. 

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अनुमति ना मिलने के बाद भी छात्रों ने अन्य साथियों के साथ मिलकर कार्यक्रम आयोजित किया था. विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से इन छात्रों को कारण बताओ नोटिस दिया गया. नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद विश्वविद्यालय इन छात्रों के खिलाफ एक्शन लेने के मूड में था, जिसके बाद इन छात्रों ने वहां हिंसक प्रदर्शन किया था. छात्रों ने कैंटीन में तोड़फोड़ की और जमकर हंगामा भी किया.

छात्रों ने विश्वविद्यालय की संपत्ति को पहुंचाया नुकसान

विश्वविद्यालय ने दावा किया कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने विश्वविद्यालय की संपत्ति, जैसे कि केंद्रीय कैंटीन को नुकसान पहुंचाया और सुरक्षा सलाहकार के कार्यालय का गेट तोड़ दिया, जिससे प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी. पुलिस सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने के लिए पुलिस हस्तक्षेप की मांग की थी. सूत्र ने कहा कि "विश्वविद्यालय प्रशासन से बात करने के बाद लगभग 4 बजे 10 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया है. इसके अलावा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कैंपस के बाहर भारी पुलिस सुरक्षा तैनात की है," 

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विश्विवद्यालय ने जारी किया बयान

विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि कुछ छात्रों ने 10 फरवरी की शाम को एकेडमिक ब्लॉक में अवैध रूप से जमा होकर प्रदर्शन शुरू किया था. तब से, उन्होंने न केवल कक्षाओं के शांतिपूर्ण संचालन में खलल डाला, बल्कि अन्य छात्रों को केंद्रीय पुस्तकालय और कक्षाओं में प्रवेश करने से भी रोका.

विश्वविद्यालय की ओर से आगे कहा गया कि "छात्रों ने विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन किया और आपत्तिजनक सामग्री के साथ पकड़े गए. विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वविद्यालय संपत्ति को हुए नुकसान, दीवारों की तोड़-फोड़ और कक्षाओं में रुकावट को देखते हुए उपाय किए हैं ताकि शैक्षिक गतिविधियां सामान्य रूप से चल सकें. विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों से उनके मुद्दों पर एक समिति के माध्यम से चर्चा करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन छात्रों ने प्रशासन, पर्यवेक्षक, विभागाध्यक्ष और डीन के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया. 

क्या है छात्रों की मांगे?

छात्र नेता सोनाक्षी ने पीटीआई को बताया कि प्रदर्शनकारियों की चार मुख्य मांगें हैं. पहली यह कि दो पीएचडी छात्रों को जारी किए गए शो-कॉज नोटिस को रद्द करना, दूसरी 2022 के ऑफिस मेमोरेंडम को निरस्त करना जो कैंपस में प्रदर्शन पर रोक लगाता है और तीसरी यह कि ग्रैफिटी और पोस्टर के लिए 50,000 रुपये के जुर्माना को खत्म करना और भविष्य में छात्रों के खिलाफ किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई को रोकना जो प्रदर्शन में भाग लेते हैं.

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जानकारी के अनुसार, अनुशासन समिति 25 फरवरी को बैठक करेगी ताकि यह समीक्षा की जा सके कि दो पीएचडी छात्रों का "जामिया प्रतिरोध दिवस" (15 दिसंबर 2024) का आयोजन करने में क्या योगदान था, जो 2019 के नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) विरोध प्रदर्शन को चिह्नित करने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम है.

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