साथ में पढ़ाई अब साथ में ली डिग्री... दीक्षांत समारोह में छाई मां-बेटे की ये जोड़ी, पढ़ें- सक्सेस स्टोरी

आईआईटी मद्रास के दीक्षांत समारोह में 45 वर्षीय जिगीषा टेलर और उनके 21 वर्षीय बेटे आदित्य कपाड़िया ने एक साथ डिग्री हासिल कर यादगार पल बनाया. दोनों ने ऑनलाइन डेटा साइंस प्रोग्राम पूरा किया. बेटे की प्रेरणा से मां ने दोबारा पढ़ाई शुरू की और दोनों की मेहनत ने इस अनोखी उपलब्धि को संभव बनाया.

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मां और बेटे बने IIT ग्रेजुएट. (Image: IIT Madras) मां और बेटे बने IIT ग्रेजुएट. (Image: IIT Madras)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:46 PM IST

आईआईटी मद्रास के हालिया दीक्षांत समारोह में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया. 45 वर्षीय जिगीषा टेलर और उनके 21 वर्षीय बेटे आदित्य कपाड़िया एक ही मंच पर पहुंचे और दोनों ने आईआईटी मद्रास के ऑनलाइन डेटा साइंस प्रोग्राम की डिग्री एक साथ हासिल की. मां और बेटे ने कभी सोचा भी नहीं था कि वे एक ही दिन, एक ही समारोह में अपनी-अपनी डिग्री लेंगे. यह पल उनके परिवार के लिए यादगार बन गया.

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यह अनोखा संयोग आईआईटी मद्रास के दीक्षांत समारोह में हुआ, जहां संस्थान के अलग-अलग शैक्षणिक कार्यक्रमों के छात्रों को डिग्रियां दी जा रही थीं. इनमें ऑनलाइन बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस प्रोग्राम भी शामिल था. जिगीषा और आदित्य ने इसी कार्यक्रम से अपनी पढ़ाई पूरी की. समारोह के दौरान दोनों को एक साथ मंच पर बुलाया गया और उन्होंने अपने-अपने प्रमाणपत्र प्राप्त किए.

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ने कभी यह योजना नहीं बनाई थी कि वे एक साथ ग्रेजुएट होंगे. यह संयोग तब बना जब दीक्षांत समारोह से पहले एक सहपाठी को उनकी कहानी पता चली. उसी सहपाठी ने प्रयास किया कि मां और बेटे को एक साथ मंच पर बुलाया जाए. हालांकि दोनों अलग-अलग सेक्शन में बैठे थे, क्योंकि आदित्य बीएस डिग्री और जिगीषा डिप्लोमा प्राप्त कर रही थीं. फिर भी दोनों को एक साथ डिग्री लेने का मौका मिला.

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आईआईटी मद्रास के मंच पर बना यादगार पल

जिगीषा टेलर गुजरात के भरूच स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज में 16 वर्षों तक इलेक्ट्रॉनिक्स पढ़ाती रही थीं. वर्ष 2019 में उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपनी नौकरी छोड़ दी. इसके बाद कुछ वर्षों तक उन्होंने पूरी तरह परिवार पर ध्यान दिया.

साल 2022 में उनके बेटे आदित्य ने उन्हें फिर से पढ़ाई शुरू करने के लिए प्रेरित किया. आदित्य पहले से ही आईआईटी मद्रास के ऑनलाइन बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस प्रोग्राम में पढ़ाई कर रहे थे. उन्होंने अपनी मां से कहा कि वह भी इस कोर्स में दाखिला लें. बेटे की बात मानकर जिगीषा ने कार्यक्रम में प्रवेश लिया और नई शुरुआत की.

आदित्य ने वर्ष 2021 में 18 साल की उम्र में इस कार्यक्रम में दाखिला लिया था. उस समय कोविड-19 महामारी के कारण देशभर के कॉलेजों में ऑनलाइन पढ़ाई हो रही थी. उन्होंने बताया कि अगर वह किसी दूसरे बड़े संस्थान में भी पढ़ते, तब भी पढ़ाई ऑनलाइन ही होती. डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में रुचि होने के कारण उन्होंने आईआईटी मद्रास का यह कोर्स चुना.

शुरुआत में नियमों के अनुसार ऑनलाइन प्रोग्राम के छात्रों के लिए किसी फिजिकल कॉलेज में भी नामांकन जरूरी था. इसलिए आदित्य ने अहमदाबाद के एक कॉलेज में डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किया. बाद में जब आईआईटी मद्रास की बीएस डिग्री को नियमित चार वर्षीय डिग्री के बराबर मान्यता मिली, तो उन्होंने डिप्लोमा छोड़ दिया और पूरी तरह आईआईटी मद्रास की पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया.

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जिगीषा ने पहले अपने बेटे को घर पर पढ़ते हुए देखा. इलेक्ट्रॉनिक्स की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें सांख्यिकी और कंप्यूटर सिस्टम जैसे विषय कुछ हद तक परिचित लगे, लेकिन कई नए विषय भी सीखने पड़े. उन्होंने एक या दो विषय प्रति सेमेस्टर लेकर धीरे-धीरे पढ़ाई आगे बढ़ाई.

मां और बेटा बने स्टडी पार्टनर और दोस्ताना प्रतिद्वंद्वी

जिगीषा का पढ़ाई का तरीका काफी अनुशासित था. वह रोज सुबह करीब साढ़े चार बजे उठती थीं और सात बजे तक पढ़ाई करती थीं. इसके बाद घर के काम करतीं और दोपहर में समय मिलने पर फिर पढ़ाई करती थीं. उन्होंने आईआईटी मद्रास की लाइव डाउट क्लियरिंग क्लासों में हिस्सा लिया और सहपाठियों के व्हाट्सएप समूह से भी मदद मिली.

उन्होंने बताया कि कई रिश्तेदार उनसे पूछते थे कि इस उम्र में पढ़ाई की क्या जरूरत है और नौकरी क्यों करनी है. लेकिन उनका जवाब हमेशा एक ही होता था कि वह कुछ अलग करना चाहती हैं. इस पूरे सफर में उनके पति ने भी पूरा साथ दिया। जब भी वह तनाव में होती थीं, उनके पति उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे. उनके पति भी एक कॉलेज में प्रोफेसर हैं.

धीरे-धीरे मां और बेटा सिर्फ छात्र नहीं रहे, बल्कि एक-दूसरे के अध्ययन साथी और दोस्ताना प्रतिद्वंद्वी भी बन गए. आदित्य ने बताया कि दोनों के बीच यह देखने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा रहती थी कि किसे बेहतर ग्रेड मिलेगा. कार्यक्रम में 'एस' ग्रेड सबसे उच्च माना जाता है, जबकि 'ए' भी उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रतीक है. जब एक को बेहतर ग्रेड मिलता था, तो दूसरा और अधिक मेहनत करता था.

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बेहतर ग्रेड पाने की रहती थी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा

चूंकि आदित्य ने पहले दाखिला लिया था, इसलिए वह अपनी मां की काफी मदद भी करते थे. वह उन्हें आने वाले विषयों, वाइवा परीक्षा और ऑनलाइन प्रॉक्टर्ड टेस्ट के बारे में पहले से समझा देते थे. इससे जिगीषा को पढ़ाई में काफी सुविधा मिली. आदित्य ने वर्ष 2024 में अपनी बीएस डिग्री पूरी की. इसके बाद उन्होंने सिंगेंटा में डेटा साइंस इंटर्न के रूप में काम शुरू किया और बाद में उन्हें वहीं पूर्णकालिक नौकरी मिल गई.

वहीं जिगीषा ने भी अपना कार्यक्रम पूरा कर लिया है। हालांकि फिलहाल उन्होंने नौकरी की तलाश टाल दी है, क्योंकि उनका छोटा बेटा 12वीं कक्षा में पढ़ रहा है और वह इस महत्वपूर्ण समय में उसकी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहती हैं. 

आगे चलकर वह फिर से अध्यापन के क्षेत्र में लौटने पर विचार कर रही हैं. उनके पति ने उन्हें अपने कॉलेज में अतिथि व्याख्याता के रूप में पढ़ाने का सुझाव भी दिया है. आदित्य का कहना है कि इस पूरी यात्रा ने मां-बेटे के रिश्ते को और मजबूत बना दिया. साथ पढ़ते हुए उन्होंने अपनी मां का एक नया रूप देखा. वहीं जिगीषा के लिए यह साबित करने का मौका था कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती.

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