सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर मचे देशव्यापी बवाल ने अब एक बेहद हाई-प्रोफाइल सियासी रूप ले लिया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा सीबीएसई परीक्षाओं में कथित विसंगतियों और धांधली के आरोपों पर देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अब तक का सबसे आक्रामक और तीखा पलटवार किया है.
सीबीएसई अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद मीडिया से बात करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कहा कि राहुल गांधी चुनावी हार की कुंठा के चलते देश की वैज्ञानिक प्रगति का विरोध कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाते हुए यह भी दोहराया कि इस प्रणाली में हुई किसी भी असुविधा की जिम्मेदारी वे खुद लेते हैं.
'राहुल गांधी डिजिटल इंडिया के विरोधी हैं'
राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए शिक्षा मंत्री ने उनके मानसिक संतुलन पर ही सवाल दाग दिए. धर्मेंद्र प्रधान ने बेहद कड़क लहजे में कहा, 'जहां तक राहुल गांधी का सवाल है, ऐसा लगता है कि वे एक अलग ही मानसिक स्थिति में पहुंच चुके हैं. लगातार मिल रही चुनावी हार के कारण वे पूरी तरह हताश और फ्रस्ट्रेटेड नजर आ रहे हैं. उन्होंने पहले इसरो (ISRO) का विरोध किया, फिर वे ईवीएम (EVM) का विरोध करने लगे, और अब वे 'डिजिटल इंडिया' का विरोध कर रहे हैं. वे भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के साथ खड़े ही नहीं होना चाहते.'
'सीबीएसई का टेंडर सरकारी नीति के तहत, राजनीति का समय नहीं'
विपक्ष द्वारा टेंडर और प्रोक्योरमेंट पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने साफ किया कि सीबीएसई ने कल ही इस मामले पर अपना आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर दिया है, जो भारत सरकार की खरीद नीति (Procurement Policy) के पूरी तरह अनुरूप है. उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि मैं सबको आश्वस्त करना चाहता हूं कि अगर कोई भी गड़बड़ी या अनियमितता पाई गई, तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. लेकिन यह समय राजनीति करने का नहीं है. राजनीति बाद में भी हो सकती है. इस वक्त सबसे जरूरी यह है कि हमारे परीक्षार्थियों और छात्रों का मानसिक तनाव न बढ़े. मैं सभी से अपील करता हूं कि किसी के भी बयान या व्यवहार से बच्चों का स्ट्रेस नहीं बढ़ना चाहिए.
वहीं प्रशासनिक मोर्चे पर आंकड़े रखते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि परीक्षा देने वाले 17 लाख छात्रों की 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है. उन्होंने कहा कि हर कॉपी में करीब 40 पेज होते हैं, यानी सीबीएसई ने पहली बार इतिहास में लगभग 40 करोड़ स्कैंड कॉपियों का मूल्यांकन इस OSM (On-Screen Marking) प्रणाली के जरिए किया है. यह एक बेहद प्रगतिशील और छात्र-केंद्रित तकनीक है, जिसकी तरफ पूरी दुनिया की यूनिवर्सिटीज बढ़ रही हैं ताकि छात्रों को उनके नंबरों की पारदर्शी जानकारी मिले.
आजतक एजुकेशन डेस्क