देश में इस साल परीक्षाओं का सीजन सिर्फ छात्रों की काबिलियत की परीक्षा नहीं ले रहा, बल्कि ऐसा लग रहा है कि यह हमारे पूरे प्रशासनिक तंत्र की नाकामी और तकनीकी ढर्रे की सीमाओं का इम्तिहान ले रहा है. नीट (NEET) के महा-विवाद के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई (CBSE) में भी अंदर ही अंदर एक बड़ा बवंडर खड़ा हो चुका है.
सीबीएसई की हालिया तकनीकी दिक्कतों, एडमिनिस्ट्रेटिव फेल्योर और री-इवैल्युएशन पोर्टल की गड़बड़ियों के शोर में जो सबसे बड़ा दर्द दब गया था, वो था 'केमिस्ट्री' का पेपर. 'इंडिया टुडे' के एक खास एनालिसिस में सामने आया है कि इस बार सीबीएसई के रिजल्ट में सबसे बड़ा झोल केमिस्ट्री के नंबरों में हुआ है, जिसे लेकर देश भर के छात्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर चीख-चीखकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं.
छात्रों ने 'X' को बनाया हथियार
सीबीएसई के वेरिफिकेशन और री-इवैल्युएशन (पुनर्मूल्यांकन) पोर्टल पर इस बार जिस कदर देरी और तकनीकी गड़बड़ियां (Glitches) देखने को मिलीं, उसने छात्रों को मानसिक तनाव में डाल दिया. इसके अलावा, बोर्ड के 'ऑनमार्क' सिस्टम की कमियों और नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (On-Screen Marking) प्रक्रिया ने छात्रों के सामने सवालों का अंबार खड़ा कर दिया, लेकिन आधिकारिक तौर पर उन्हें कहीं से कोई साफ जवाब नहीं मिला. जब थक-हारकर औपचारिक रास्ते बंद हो गए, तो परेशान छात्रों ने न्याय के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' का रुख किया.
'इंडिया टुडे' की ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने जब हाल ही में सीबीएसई के छात्रों द्वारा किए गए एक्स पोस्ट्स की बारीकी से समीक्षा की, तो पाया कि इस पूरे विवाद के केंद्र में 'केमिस्ट्री' का पेपर ही था.
65% छात्र सिर्फ केमिस्ट्री से परेशान!
सच्चाई को सामने लाने के लिए 'इंडिया टुडे' ने सीबीएसई, री-इवैल्युएशन, आंसर शीट और मार्क्स जैसे कीवर्ड्स के जरिए 'एक्स' से एक हजार से ज्यादा पोस्ट्स का डेटा निकाला. जब इस डेटा को फिल्टर करके छात्रों के करीब 200 पोस्ट्स को कोडेड और रिव्यू किया गया, तो जो आंकड़े सामने आए, वे हैरान करने वाले थे:
केमिस्ट्री का सबसे बड़ा झोल: विश्लेषण में सामने आया कि सबसे ज्यादा शिकायतें केमिस्ट्री के पेपर को लेकर थीं. विश्लेषण किए गए कुल पोस्ट्स में से 65 फीसदी से ज्यादा छात्रों ने सीधे तौर पर केमिस्ट्री के नंबरों में गड़बड़ी का दावा किया.
फिजिक्स और मैथ्स का हाल: इसके अलावा, करीब 31 प्रतिशत पोस्ट्स में फिजिक्स और 20 प्रतिशत पोस्ट्स में मैथमेटिक्स के पेपर में गड़बड़ी की बात कही गई (कई छात्रों ने एक से अधिक विषयों में भी शिकायत दर्ज कराई थी).
छात्रों का मुख्य आरोप है कि बाकी साइंस सब्जेक्ट्स में उनके नंबर बेहद शानदार हैं, लेकिन केमिस्ट्री में उन्हें अजीबोगरीब तरीके से बेहद कम नंबर दिए गए हैं. इसके अलावा, बार-बार कोशिशों के बावजूद री-इवैल्युएशन के लिए आंसर शीट उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जो कॉपियां मिली भी हैं वे धुंधली (Blurred) हैं, नंबर जोड़ने में भारी गलतियां हैं और ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में सही जवाबों को भी सही तरीके से नहीं जांचा गया है.
अजीबोगरीब मार्किंग: मैथ्स में 92, केमिस्ट्री थ्योरी में सिर्फ 7 नंबर!
छात्रों के साथ हुए इस मजाक के कुछ बेहद चौंकाने वाले उदाहरण भी सामने आए हैं, जो इस प्रकार हैं:
केस 1: एक छात्र को मैथ्स में 92 और इंग्लिश में 92 नंबर मिले हैं. फिजिक्स में भी उसके 74 नंबर हैं, लेकिन जब बात केमिस्ट्री थ्योरी की आई, तो बोर्ड ने उसे 70 में से महज 7 नंबर थमा दिए! क्या यह व्यावहारिक रूप से मुमकिन लगता है?
केस 2: एक अन्य छात्र जिसने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक JEE Main में 95 परसेंटाइल से ज्यादा स्कोर किया है, उसका दावा है कि सीबीएसई की इस खराब केमिस्ट्री मार्किंग की वजह से वह क्लास 12th के '75% एलिजिबिलिटी कट-ऑफ' को पार करने से भी चूक सकता है. यानी एक गलत इवैल्युएशन से छात्र का पूरा करियर दांव पर लग गया है.
केस 3: एक तीसरे छात्र ने दावा किया कि उसने केमिस्ट्री के 70 नंबर के पेपर में से कम से कम 67 नंबर के सवाल बिल्कुल सही-सही हल किए थे, लेकिन जब रिजल्ट आया तो उसे थ्योरी में सिर्फ 4 नंबर मिले. आपको बता दें कि इंडिया टुडे द्वारा विश्लेषित की गई केमिस्ट्री की 130 शिकायतों में से कम से कम 37 शिकायतें सीधे तौर पर इसी तरह की 'असामान्य रूप से कम मार्किंग' से जुड़ी हैं.
मांगी केमिस्ट्री की कॉपी, बोर्ड ने थमा दी फिजिकल एजुकेशन!
लापरवाही की हद सिर्फ कम नंबर देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि जब छात्रों ने अपनी कॉपियां मंगवाईं तो वहां भी तमाशा देखने को मिला:
एक अभिभावक ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बेटे की केमिस्ट्री की जो आंसर शीट दिखाई गई, उसमें से दो पन्ने ही गायब थे. एक दूसरे छात्र ने बताया कि उसने फिजिक्स और केमिस्ट्री की कॉपियों के लिए अप्लाई किया था, लेकिन सीबीएसई के महान सिस्टम ने उसे इंग्लिश कोर और फिजिकल एजुकेशन की आंसर बुक थमा दी!
छात्रों की शिकायतों का पूरा बही-खाता
इंडिया टुडे के विश्लेषण में यह भी साफ हुआ कि छात्र सिर्फ कम नंबर आने से नाराज नहीं हैं, बल्कि वे इस बात को लेकर पूरी तरह भ्रमित और परेशान हैं कि आखिर उनके साथ ऐसा हुआ कैसे?
31% शिकायतें: आंसर शीट की कॉपी मिलने में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर थीं, जो कि इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह है.
21% शिकायतें: असामान्य रूप से बेहद कम नंबर (Unusually Low Marks) दिए जाने के खिलाफ थीं.
17% शिकायतें: कॉपियों की चेकिंग और मार्किंग के लूपहोल्स से जुड़ी हुई थीं.
इस पूरे पैटर्न को देखकर एक बात साफ है कि देश के होनहार छात्रों के लिए असली परीक्षा क्लासरूम या बोर्ड एग्जाम के साथ खत्म नहीं हुई थी. उनकी असली परीक्षा तो रिजल्ट आने के बाद शुरू हुई है, री-इवैल्युएशन के चक्कर काटने में, आंसर शीट के चक्कर में हैंग होते पोर्टल्स को झेलने में और सोशल मीडिया की टाइमलाइन पर इंसाफ की गुहार लगाने में.
बिदिशा साहा