अब गायों के लिए भूसा जुटाएंगे सरकारी शिक्षक! DM के आदेश पर भड़के टीचर्स बोले- क्या अब गोबर भी उठवाएंगे?

शिक्षा विभाग के इस नए फरमान के मुताबिक, बरेली के नवाबगंज, भोजीपुरा और भुता क्षेत्र समेत तमाम ब्लॉकों में खंड शिक्षा अधिकारियों ने आदेश लागू कर दिया है. इसके तहत जिले के हर प्राइमरी स्कूल को अनिवार्य रूप से 46 किलो भूसा एकत्रित करना होगा. आदेश में साफ चेतावनी दी गई है कि यह 'दान' स्वैच्छिक नहीं बल्कि अनिवार्य है.

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भीषण गर्मी में घर-घर पहुंचकर जनगणना कर रहे शिक्षक (Photo: PTI) भीषण गर्मी में घर-घर पहुंचकर जनगणना कर रहे शिक्षक (Photo: PTI)

कृष्ण गोपाल राज

  • बरेली,
  • 28 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:30 PM IST

उत्तर प्रदेश के बरेली में बेसिक शिक्षा विभाग का एक ऐसा तुगलकी फरमान सामने आया है, जिसने सरकारी शिक्षकों को हैरान और आक्रोशित कर दिया है. एक तरफ जहां सरकारी शिक्षक पहले से ही जनगणना की जटिल प्रक्रिया और ड्यूटी में दिन-रात लगे हुए हैं, वहीं अब उन्हें बेसहारा गोवंश (गायों) के लिए घर-घर जाकर भूसा इकट्ठा करने और 'दान' करने का नया टास्क सौंप दिया गया है.

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जिलाधिकारी (DM) के आदेश का हवाला देते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने बरेली के सभी प्राइमरी स्कूलों और खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. इस आदेश के तहत हर ब्लॉक (खंड) के शिक्षकों को अनिवार्य रूप से 100 कुंतल भूसा इकट्ठा करना होगा. सोशल मीडिया पर इस आदेश की कॉपियां तेजी से वायरल हो रही हैं, जिस पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

आदेश न मानने पर नपेगें शिक्षक
शिक्षा विभाग के इस नए फरमान के मुताबिक, बरेली के नवाबगंज, भोजीपुरा और भुता क्षेत्र समेत तमाम ब्लॉकों में खंड शिक्षा अधिकारियों ने आदेश लागू कर दिया है. इसके तहत जिले के हर प्राइमरी स्कूल को अनिवार्य रूप से 46 किलो भूसा एकत्रित करना होगा. आदेश में साफ चेतावनी दी गई है कि यह 'दान' स्वैच्छिक नहीं बल्कि अनिवार्य है. जो भी स्कूल या शिक्षक इस आदेश का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. ऐसा पहली बार हो रहा है जब गुरुजी को गांव-गांव, घर-घर जाकर भूसा इकट्ठा करने के काम में झोंका जा रहा है.

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'इसके बाद क्या गोबर भी उठवाएंगे?'
इस अजीबोगरीब आदेश के सामने आने के बाद शिक्षक संगठनों और प्रधानाध्यापकों में भारी नाराजगी है. शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, प्रधानाध्यापक वीरेंद्र कुमार और हेमंत कुमार समेत तमाम शिक्षक नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

शिक्षकों ने गुस्से में दो टूक कहा, 'शिक्षा विभाग जिस तरह के गैर-शैक्षणिक फरमान आए दिन जारी कर रहा है, उससे तो यही लगता है कि भविष्य में हमसे लोगों के घरों से गोबर इकट्ठा करने का आदेश भी जारी कर दिया जाएगा. हो सकता है आगे चलकर गाय के बछड़ों को नहलाने और नालियां साफ करने का काम भी शिक्षकों को ही सौंप दिया जाए!' शिक्षकों ने इस पूरी प्रक्रिया को शिक्षा व्यवस्था का मखौल उड़ाना बताया है और इस आदेश का पुरजोर विरोध करने का ऐलान किया है. दूसरी तरफ, जिलाधिकारी अविनाश सिंह के इस आदेश को लेकर जिले के प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप मचा हुआ है कि आखिर इस लचर प्रणाली का क्या परिणाम निकलेगा.

जिलाधिकारी का यू-टर्न, बोले- कार्रवाई की बात मेरी नॉलेज में नहीं

शिक्षकों पर अनिवार्य कार्रवाई के इस आदेश पर जब बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने कार्रवाई की बात से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह मेरी नॉलेज में नहीं है कि कार्रवाई की बात हुई है. मैं इस मामले को दिखवा रहा हूं. जनपद में ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश हैं. इनको हम अस्थाई और स्थाई गौशाला बनाकर वहां रखकर संरक्षण प्रदान करते हैं, उनकी देखभाल करते हैं. इसके बावजूद ऐसे बहुत से गोवंश होते हैं जिन्हें लोग छोड़ देते हैं, उनकी लगातार हम देखभाल करने की कोशिश करते हैं. 

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डीएम ने कहा कि गौ सेवा को एक व्यक्तिगत और धार्मिक कार्य से जोड़कर देखें, इसे इस तरह देखेंगे तभी हम बेहतर तरीके से कर पाएंगे. स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भरण-पोषण के लिए सभी को आगे आना चाहिए. चैनल के माध्यम से मैं पूरे जनपद वासियों से अपील करना चाहूंगा कि गोवंश की भलाई के लिए जो भी चीज दान करना चाहें, कर सकते हैं, करना चाहिए. मैं कहना चाहता हूं कि स्कूल इन्हें गोद ले रहे हैं. जैसे हाई स्कूल-इंटरमीडिएट में टॉप करने वाले मेधावियों को स्कूटी गिफ्ट की गई है, कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने टीबी के पेशेंट को गोद लिया है, वैसे ही हम अपील करते हैं कि गोवंश को भी गोद लें.

एक हाथ में किताबें, दूसरे हाथ में भूसे का कट्टा...
इस तुगलकी आदेश पर अपनी ड्यूटी कर रहे प्रधानाध्यापक और सुपरवाइजर वीरेंद्र कुमार का दर्द और गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने कैमरे पर कहा कि मैं इस समय जनगणना का कार्य कर रहा हूं, सुपरवाइजर हूं. इस तरह का जो आदेश आया है भूसा एकत्र करने का, यह पूरी तरह से अव्यवहारिक है और काफी गलत है. गलत तरीके से ऐसे आदेश शिक्षकों पर ठोक दिए जाते हैं. अब हमारा शिक्षक अपने एक हाथ में सरकारी किताबें और दूसरे हाथ में भूसे का कट्टा लेकर घूमता हुआ नजर आएगा!

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'यह शिक्षकों का पतन और अपमान'
शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने इस आदेश को शिक्षकों की गरिमा के खिलाफ बताते हुए सीधे तौर पर न्याय प्रणाली को घेरा. उन्होंने दो टूक कहा कि यह जो फरमान आया है, यह न्याय वाला फरमान नहीं है. इस तरह का आदेश शिक्षकों पर थोपना सीधे तौर पर शिक्षकों का पतन करना है. शिक्षकों का इस तरह से सरेआम अपमान हो रहा है. जो आदेश जारी हुआ है, यह बिल्कुल गलत है. हमारा शिक्षक इस समय देश के सबसे महत्वपूर्ण कार्य यानी जनगणना में लगा हुआ है. ऐसे में यह आदेश देना कि भूसा जमा करना है, पूरी तरह गलत है.

'आगे जाकर कहेंगे नाली साफ करो... हम विरोध करेंगे'
इस आदेश से बिफरे एक और प्रधानाध्यापक हेमंत कुमार ने व्यवस्था को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली का ही परिणाम है. उन्होंने कहा कि इस तरीके का जो आदेश जारी हुआ है, वह बहुत ही ज्यादा गलत है. शिक्षक महत्वपूर्ण कार्य के लिए है, हमारा कार्य स्कूल में बच्चों को शिक्षा देना और जिम्मेदारी वाले सरकारी कार्य करना है. लेकिन भूसा इकट्ठा करने का यह कार्य हमारा नहीं है; यह पशुपालन विभाग, कृषि विभाग और जिला पंचायत विभाग का कार्य है. आज इन्होंने भूसा मांगने को कहा है, आगे जाकर इस तरह का कार्य करने के बाद कहा जाएगा कि हम गोबर साफ करें, नाली साफ करें! यह बहुत ही गलत है. हम सभी शिक्षक मिलकर विभाग के इस आदेश का पुरजोर विरोध करते हैं.

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